नांदेड लोकसभा सीट पर जीती कांग्रेस
मुंबई: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के साथ नांदेड लोकसभा चुनाव पर हुए उपचुनाव में बड़ा उलटफेर देखने को मिला। बीजेपी और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर के बाद आखिरकार में कांग्रेस उम्मीदवार रवींद्र चव्हाण को विजेता घोषित किया गया। यह सीट कांग्रेस सांसद वसंतराव चव्हाण के निधन के बाद खाली हुई थी। चुनाव आयोग द्वारा इस सीट पर होने वाले उपचुनाव की घोषणा के बाद कांग्रेस ने उनके बेटे रवींद्र चव्वहाण को यहां से उम्मीदवार बनाया था, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने यहां से डॉ. संतुक हंबार्डे को चुनावी मैदान में उतारा था। बता दें कि शुरुआती रुझानों में रवींद्र चव्हाण आगे चल रहे थे, जबकि डॉ संतुक लीड कर रहे थे। लेकिन आखिरी में कांग्रेस ने बाजी मार ली।
बता दें कि शुरुआती रुझानों में नांदेड़ लोकसभा सीट पर दोनों पार्टी के उम्मीदवारों के बीच काफी करीबी मुकाबला देखने को मिला। शुरुआत में कांग्रेस और दोपहर आते-आते बीजेपी आगे निकल गई। लेकिन शाम तक आखिरी नतीजों में कांग्रेस ने वापस उलटफेर करते हुए जीत हासिल कर ली है। कांग्रेस के रवींद्र चव्हाण ने बीजेपी के संतुक हंबार्डे को 1457 वोटों से हरा दिया है।
चुनाव से जुड़ी खबरें पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
गौरतलब है कि महाराष्ट्र के नांदेड़ लोकसभा सीट पर यह उपचुनाव कांग्रेस सांसद वसंतराव चव्हाण के निधन के कारण हो रहा है। इसी साल के अगस्त महीने में उनका निधन हो गया था। साल 2024 के अप्रैल-मई महीने में हुए लोकसभा चुनाव में वसंतराव चव्हाण ने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार प्रतापराव पाटिल चिखलीकर को कुल 59,442 मतों से हराया था। चव्हाण को चुनाव में 5,28,894 वोट मिले थे, जबकि चिखलीकर को 4,69,452 वोट मिले थे। वहीं इस बार इस सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने उनके बेटे रवींद्र चव्हाण को यहां से उम्मीदवार बनाया था।
आपके बताते चलें कि नांदेड़ महाराष्ट्र के 48 लोकसभा क्षेत्रों में से एक है। जो की एक जिला भी है। साल 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में यह सीट बीजेपी के पास गई थी। प्रतापराव गोविंदराव चिखलीकर सांसद बने थे। चिखलकर को 486,806 वोट मिले थे। कांग्रेस के अशोक चव्हाण को 4,46,658 वोट मिले थे।
नांदेड़ लोकसभा क्षेत्र में विधानसभा की 6 सीटें आती हैं। इस सीट पर पहली बार 1952 में लोकसभा चुनाव हुए थे। तब कांग्रेस के उम्मीदवार शंकरराव टेलकीकर जीते थे। 1957 में कांग्रेस ने देवराव नामदेवराव कांबले को टिकट दिया और वह जीते। 1962 में कांग्रेस के तुलसीदास जाधव जीते। 1967 में कांग्रेस ने वेंकटराव तिरोडकर को टिकट दिया और वह भी चुनाव जीते।