यूपी की 16 सीटों पर बसपा ने पहुंचाया INDIA को नुकसान, इन सीटों पर हासिल किए हार-जीत के मार्जिन से ज्यादा वोट
देश के सबसे बड़े सियासी सूबे उत्तर प्रदेश में अगर हार जीत का विश्लेषण किया जाए तो यहां बहुजन समाज पार्टी ने भले ही एक भी सीट नहीं जीती है लेकिन वह 16 सीटों पर सपा-कांग्रेस की शिकस्त का सबब बनकर सामने आई है।
- Written By: अभिषेक सिंह
मायावती अखिलेश यादव व राहुल गांधी (डिजाइन फोटो)
लखनऊ : लोकसभा चुनाव 2024 नतीजे सामने आ चुके हैं। एक तरफ केन्द्र में एनडीए फिर से वापसी कर रहा है और शपथ ग्रहण की तैयारियां चल रही हैं। दूसरी तरफ चुनाव नतीजों का विश्लेषण किया जा रहा है। देश के सबसे बड़े सियासी सूबे यानी उत्तर प्रदेश में अगर हार जीत का विश्लेषण किया जाए तो यहां बहुजन समाज पार्टी ने भले ही एक भी सीट नहीं जीती है लेकिन वह 16 सीटों पर सपा-कांग्रेस की शिकस्त का सबब बनकर सामने आई है।
उत्तर प्रदेश में मायावती की बहुजन समाज पार्टी ने सपा-कांग्रेस को भारी नुकसान पहुंचाया है। यहां 16 सीटों पर बीएसपी ने बीजेपी और उसके सहयोगियों की जीत और सपा-कांग्रेस की हार के मार्जिन से ज्यादा वोट हासिल किए हैं। इनमें कई लोकसभा सीटें ऐसी भी हैं जहां यह अंतर हार-जीत के मार्जिन से दोगुना या उससे भी ज्यादा है।
इन सीटों पर बीएसपी ने पहुंचाया नुकसान
यूपी की जिन लोकसभा सीटों पर बसपा ने विपक्षी गठबंधन यानी ‘इंडिया’ को झटका दिया उनमें, अमरोहा, मेरठ, अलीगढ़, फतेहपुर सीकरी, शाहजहां पुर, हरदोई, मिश्रिख, उन्नाव, फर्रूखाबाद, अकबरपुर, फूलपुर, देवरिया, बांसगांव, भदोही, बिजनौर और मिर्जापुर शामिल हैं। इनमें 12 सीटें तो ऐसी हैं जहां बसपा प्रत्याशियों ने हार-जीत के अंतर से दोगुने या उससे भी ज्यादा वोट हासिल किए हैं।
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यूपी में16 सीटों पर बीएसपी ने पहुंचाया सपा-कांग्रेस को नुकसान (आंकड़े चुनाव आयोग की वेबसाइट से)
भाजपा को भी दिया झटका
उत्तर प्रदेश में विपक्षी गठबंधन के खाते में गई 43 सीटों में से 31 सीटों पर बसपा तीसरे नंबर पर रही। यहां भी बसपा को हार-जीत के मार्जिन से ज्यादा वोट मिले हैं। हालांकि इस बात की इतनी चर्चा इसलिए नहीं हो रही क्योंकि लोकसभा चुनाव के पहले बसपा को एनडीए में शामिल कराने को लेकर कोई कवायद नहीं की गई थी।
माया को मनाने की हुई थी कोशिश
विपक्षी गठबंधन को चुनाव से पहले ही इस नुकसान का अंदाज़ा था! तभी कई बार कांग्रेस नेताओं की तरफ से बसपा सुप्रीमो मायावती को मनाने की कोशिश की गई थी। सपा के एक दो नेताओं ने भी बसपा को भी गठबंधन में शामिल करने का समर्थन किया था। लेकिन मायावती अकेले चुनाव लड़ने के फैसले पर अडिग रहीं।
चुनाव नतीजों के इस विश्लेषण को आधार बनाकर देखा जाए तो यह बात साफ है कि विपक्ष अगर मायावती को मनाने में कामयाब होता तो उत्तर प्रदेश में परिणाम कुछ और होते। वैसे भी माना यह जा रहा है कि इन चुनावों में बसपा का वोट विपक्ष को ट्रांसफर हुआ है। यही वजह है कि यूपी बसपा का वोट प्रतिशत 2019 के 19.77 फीसदी के मुकाबले 2024 में घटकर 19.43 प्रतिशत ही बचा है। ऐसे में यदि बसपा विपक्षी खेमे में होती यूपी में एनडीए शायद 20 सीटों पर ही सिमटकर रह जाता!
