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Basirhat Voter List Controversy: पश्चिम बंगाल की बसीरहाट उत्तर विधानसभा क्षेत्र से हैरान करने वाला मामला सामने आया है। इस मामले को कई लोग एसआईआर प्रक्रिया की नाकामयाबी भी बता रहे हैं। क्षेत्र में जो सूची प्रकाशिक की गई है। उसमें भारी मात्रा में मुस्लिम वोटरों के नाम नहीं हैं। जिनके नाम काटे गए हैं वह सभी मतदाता बोरो गोबरा गांव के बूथ नंबर 5 के हैं। यहां तक की उस एरिया के बीएलओ का नाम तक सूची में नहीं है।
जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं उन्हें पहले ड्राफ्ट (मसौदा) मतदाता सूची में विचार के लिए रखा गया था लेकिन सोमवार को जब पहली पूरक सूची जारी हुई, तो उनके नाम अंतिम मतदाता सूची से हटा दिए गए।
इस मामले ने जब और तूल पकड़ लिया। जब लोगों को पता चला कि इस क्षेत्र में रहने वाले बूथ लेवल ऑफिसर मोहम्मद शफीउल आलम का नाम भी हटाए गए नामों में शामिल था। इस मामले के सामने आने के बाद सौ से ज्यादा लोगों ने अधिकारी के आवास और सड़कों पर प्रदर्शन किया। लोगों ने आरोप लगाया कि उन्हें उनके धर्म के आधार पर टारगेट करके नाम काटे गए हैं।
इस मामले पर बीएलओ आलम ने कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से इन वोटर्स को फॉर्म भरने में मदद की थी और यह सुनिश्चित किया था कि सभी मतदाताओं के जरूरी चुनावी दस्तावेज नियम अनुसार अपलोड हुए हैं या नहीं। सब प्रक्रिया अच्छे से होने के बाद भी नाम हटा दिए गए हैं। आपको बता दें कि यह विवाद बसीरहाट ब्लॉक II के बेगमपुर बिबीपुर ग्राम पंचायत के बूथ नंबर 5 से संबंधित है।
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प्रभावित मतदाताओं में शामिल एक मतदाता ने कहा कि चुनाव आयोग जहां सिर्फ 11 वैध दस्तावेजों में से किसी एक की मांग करता है। वहीं कई लोगों ने एक की जगह तीन-चार दस्तावेज तक जमा किए लेकिन फिर भी उनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। साथ ही प्रदर्शन कर रहे लोगों का आरोप है कि यह कार्रवाई राजनीतिक दबाव में आकर की गई है और कुछ खास मांगों को ध्यान में रखकर फैसले लिए गए हैं। वहीं आलम ने कहा कि वह इस मामले को लेकर अदालत का रुख करेंगे।
बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 का मुकाबला काफी दिलचस्प होते जा रहा है। जहां एकतरफ भाजपा ममता बनर्जी की सरकार को हटाने में और कमल खिलाने में लगी है। तो वहीं दूसरी तरफ ममता बनर्जी कुर्सी बचाने के लिए भारतीय जनता पार्टी पर एक के बाद एक आरोप लगा रही हैं। बीजेपी के लिए घुसपैठ मुख्य मुद्दा है और ममता एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग और केंद्रीय सरकार को घेर रही हैं। अब यह तो चुनाव के बाद ही पता चलेगा की किसके सिर सजेगा जीत का ताज।