बंगाल चुनाव: क्या बारासात में चिरंजीत चक्रवर्ती लगा पाएंगे जीत का चौका, या भाजपा के बढ़ते कदम बदल देंगे समीकरण?
Barasat Seat Profile: उत्तर 24 परगना के मुख्यालय बारासात में 2026 की चुनावी जंग दिलचस्प होने वाली है, जहां तृणमूल कांग्रेस के गढ़ में भाजपा ने फासला कम कर कड़ी चुनौती पेश की है।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
फोटो- नवभारत
West Bengal Elections 2026: पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले का मुख्यालय बारासात, राज्य की उन महत्वपूर्ण विधानसभा सीटों में से एक है जहां का चुनावी इतिहास वामपंथ के उदय और पतन के साथ तृणमूल कांग्रेस की मजबूती की कहानी बयां करता है।
कोलकाता मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी के दायरे में आने वाला यह निर्वाचन क्षेत्र 2026 के चुनावों के लिए तैयार है, जहां 29 अप्रैल 2026 को मतदान होना है और 4 मई 2026 को परिणाम घोषित किए जाएंगे। यह एक सामान्य श्रेणी की सीट है जो बारासात लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है।
वामपंथ का पुराना गढ़ और टीएमसी की ‘हैट्रिक’
बारासात विधानसभा सीट का गठन 1951 में हुआ था और तब से यहां के मतदाताओं ने कई विचारधाराओं को सत्ता सौंपी है। ऐतिहासिक रूप से यहां ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक (वाम मोर्चा का हिस्सा) का दबदबा रहा है, जिसने यहां 9 बार जीत हासिल की है।
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हालांकि, 2011 के बाद से यहां की तस्वीर बदल गई है। तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार और प्रसिद्ध अभिनेता चिरंजीत चक्रवर्ती (दीपक चक्रवर्ती) यहां से लगातार तीन बार (2011, 2016, 2021) विधायक चुने जा चुके हैं। 2021 के चुनावों में उन्होंने भाजपा के शंकर चटर्जी को 23,783 वोटों के अंतर से हराया था।
घटता चुनावी फासला
भले ही बारासात में टीएमसी का कब्जा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों के चुनावी आंकड़े बताते हैं कि यहां मुकाबला बेहद करीबी होता जा रहा है। संसदीय चुनाव परिणामों के अनुसार, 2014 में जो बढ़त 25,492 वोटों की थी, वह 2019 में घटकर 3,590 और 2024 के लोकसभा चुनाव में महज 3,172 वोट रह गई है। भाजपा यहां मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभरी है और टीएमसी के 15 साल के शासन के खिलाफ एंटी-इंकम्बेंसी का लाभ उठाने की कोशिश में है।
शहरी मतदाता और सामाजिक समीकरण
बारासात एक अत्यधिक शहरी सीट है, जहां 89.71% मतदाता शहरी इलाकों में रहते हैं। 2024 के आंकड़ों के अनुसार यहां कुल 2,88,064 पंजीकृत मतदाता हैं। सामाजिक समीकरणों की बात करें तो यहां अनुसूचित जाति के मतदाता 17.08% के साथ सबसे बड़ा समूह हैं, जिसके बाद मुस्लिम मतदाता 16.60% और अनुसूचित जनजाति 1.21% हैं। यहां मतदान का प्रतिशत आमतौर पर अधिक रहता है, हालांकि 2011 (84.45%) के मुकाबले 2021 (80.73%) में इसमें मामूली गिरावट देखी गई है।
इतिहास और आधुनिक कनेक्टिविटी का संगम
बारासात का इतिहास मुगल काल से जुड़ा है और ब्रिटिश शासन के दौरान यह कलकत्ता के अधिकारियों के लिए एक ‘वीकेंड रिट्रीट’ हुआ करता था। यहां वॉरेन हेस्टिंग्स का बंगला, बंकिम चंद्र चटर्जी का निवास और चंद्रकेतुगढ़ जैसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल हैं।
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वर्तमान में यह एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र है, जो चावल, आलू और गन्ना के व्यापार के लिए जाना जाता है। इसकी कनेक्टिविटी का सबसे बड़ा साधन जेसोर रोड (NH-12) और रेलवे जंक्शन है। साथ ही, आगामी नोआपारा-बारासात मेट्रो लाइन यहां के विकास और शहरी आवागमन को एक नई दिशा देने वाली है।
