Hindi news, हिंदी न्यूज़, Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest Hindi News
X
  • देश
  • महाराष्ट्र
  • विदेश
  • चुनाव
  • खेल
  • मनोरंजन
  • नवभारत विशेष
  • वायरल
  • धर्म
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • करियर
  • टेक्नॉलजी
  • यूटिलिटी
  • हेल्थ
  • ऑटोमोबाइल
  • वीडियो
  • वेब स्टोरीज
  • फोटो
  • होम
  • विडियो
  • फटाफट खबरें

बंगाल चुनाव: कोयलांचल के हाई प्रोफाइल दंगल में खिलेगा कमल या होगी दीदी की वापसी? क्या है आसनसोल दक्षिण का गणित

Asansol Dakshin Seat Profile: पश्चिम बंगाल के आसनसोल दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में 23 अप्रैल 2026 को मतदान होगा, जहां भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर होने की संभावना जताई जा रही है।

  • Written By: प्रतीक पाण्डेय
Updated On: Apr 14, 2026 | 02:08 PM

फोटो- नवभारत

Follow Us
Close
Follow Us:

West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल की औद्योगिक नगरी आसनसोल के दक्षिणी हिस्से में माहौल कुछ बदला-बदला सा नजर आ रहा है। कोयले की खदानों और स्टील कारखानों के शोर के बीच अब राजनीतिक नारों की गूंज सुनाई देने लगी है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की आहट ने इस शहरी क्षेत्र में एक नई हलचल पैदा कर दी है।

आसनसोल दक्षिण केवल एक विधानसभा सीट नहीं है, बल्कि यह बंगाल की उस बदलती राजनीति का केंद्र है जहां हर वोट एक नई कहानी कहता है। इस बार यहां की जनता 23 अप्रैल को अपने मताधिकार का प्रयोग करेगी, जबकि जीत-हार का फैसला 4 मई को होगा। चुनावी रणनीतियों के इस महासमर में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भाजपा अपना किला बचा पाएगी या ममता बनर्जी की पार्टी फिर से अपना वर्चस्व कायम करेगी।

आसनसोल दक्षिण का सियासी उलटफेर जिसने सबको चौंकाया

इस क्षेत्र की राजनीतिक यात्रा बहुत पुरानी नहीं है क्योंकि इसे साल 2008 में परिसीमन आयोग की सिफारिशों के बाद बनाया गया था। शुरुआत में यहां तृणमूल कांग्रेस का दबदबा रहा और तापस बनर्जी ने 2011 और 2016 के चुनावों में लगातार दो बार जीत दर्ज की। हालांकि, साल 2021 के चुनाव में एक ऐसा मोड़ आया जिसने राज्य की राजनीति को हिलाकर रख दिया। तृणमूल कांग्रेस ने अपने पुराने सिपाही तापस बनर्जी को रानीगंज भेज दिया और उनकी जगह बंगाली फिल्मों की अभिनेत्री सायनी घोष को चुनावी मैदान में उतारा।

सम्बंधित ख़बरें

बंगाल चुनाव: सिलीगुड़ी में गर्माया चुनावी माहौल, क्या भाजपा बचा पाएगी अपना गढ़ या दीदी का दांव पड़ेगा भारी

तमिलनाडु के चुनावी मैदान से क्यों दूर हैं राहुल गांधी, क्या ये DMK-कांग्रेस गठबंधन में दरार की सुगबुगाहट है?

प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री? ममता बनर्जी ने क्यों मांगा पीएम मोदी का इस्तीफा? बंगाल के मैदान में छिड़ी नई जंग

बंगाल चुनाव से ठीक पहले ED का बड़ा एक्शन, I-PAC के को-फाउंडर विनेश चंदेल गिरफ्तार

दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी ने फैशन डिजाइनर अग्निमित्रा पॉल पर दांव खेला। दो ग्लैमरस चेहरों की इस लड़ाई में अग्निमित्रा पॉल ने महज 4,487 वोटों के अंतर से जीत हासिल कर पहली बार यहां भाजपा का परचम लहराया। यह हार तृणमूल कांग्रेस के लिए एक कड़ा सबक थी, जिसने उन्हें अपनी रणनीति पर दोबारा सोचने को मजबूर कर दिया।

हिंदी भाषी मतदाताओं का वो गणित जो बिगाड़ता है खेल

आसनसोल दक्षिण की सबसे बड़ी खूबी इसकी जनसांख्यिकी है, जो इसे बंगाल की अन्य सीटों से अलग बनाती है। यह एक मुख्य रूप से शहरी निर्वाचन क्षेत्र है जिसमें ग्रामीण मतदाताओं की संख्या 6 प्रतिशत से भी कम है। यहां की करीब 35 से 40 प्रतिशत आबादी हिंदी भाषी है, जिनमें से अधिकतर लोग पड़ोसी राज्य बिहार और झारखंड से आकर यहां बसे हैं।

भाजपा ने पिछले एक दशक में इस वर्ग के बीच अपनी पैठ बहुत मजबूत की है। आंकड़े बताते हैं कि 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान भी इस विधानसभा क्षेत्र में भाजपा को भारी बढ़त मिली थी। इसके अलावा यहां अनुसूचित जाति और जनजाति के मतदाताओं की संख्या भी करीब 27 प्रतिशत है, जबकि मुस्लिम मतदाता लगभग 12 प्रतिशत हैं। वोटों का यही समीकरण तय करता है कि किस पार्टी का पलड़ा भारी रहेगा।

धुएं और कोयले के बीच रोजी रोटी का चुनावी मुद्दा

इस क्षेत्र की राजनीति वहां की मिट्टी में दबे कोयले और कारखानों की चिमनियों से निकलने वाले धुएं से सीधे जुड़ी हुई है। आसनसोल को कोलकाता के बाद राज्य का दूसरा सबसे बड़ा शहरी समूह माना जाता है। रानीगंज कोलफील्ड्स का हिस्सा होने के कारण यहां की अर्थव्यवस्था का आधार कोयला खनन, स्टील उद्योग और रेलवे है। इल्को यानी आईआईएससीओ और पूर्वी रेलवे की वर्कशॉप ने दशकों तक हजारों परिवारों का पेट पाला है।

लेकिन हाल के वर्षों में मशीनीकरण और छंटनी की वजह से रोजगार के अवसर कम हुए हैं, जो युवाओं के लिए एक बड़ा मुद्दा बन गया है। दामोदर नदी के पास होने के बावजूद प्रदूषण और औद्योगिक उपयोग के कारण खेती के लिए पानी की समस्या भी बनी रहती है। जनता अब केवल नारों पर नहीं, बल्कि उन वादों पर वोट देने का मन बना रही है जो उनकी बुनियादी सुविधाओं और रोजगार से जुड़े हों।

अब 23 अप्रैल को जनता लिखेगी जीत का नया अध्याय

जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे राजनीतिक दलों ने अपनी घेराबंदी तेज कर दी है। भाजपा अपनी पिछली जीत को बरकरार रखने के लिए प्रवासियों और शहरी मतदाताओं के बीच सक्रिय है। वहीं तृणमूल कांग्रेस अपनी पिछली गलतियों को सुधारते हुए स्थानीय मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। माकपा जैसी पार्टियां भी अपने खोए हुए आधार को वापस पाने की कोशिश में जुटी हैं, हालांकि पिछले चुनाव में उन्हें केवल 15 हजार के करीब वोट मिले थे।

यह भी पढ़ें: सम्राट चौधरी होंगे बिहार के नए मुख्यमंत्री, निशांत बनेंगे डिप्टी CM! कल सुबह 11 बजे शपथग्रहण

आसनसोल दक्षिण का यह दंगल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां मुकाबला बहुत करीबी होता है और जीत का अंतर बहुत कम रहता है। 23 अप्रैल का दिन इस औद्योगिक बेल्ट के लिए भाग्य बदलने वाला साबित हो सकता है।

Asansol dakshin assembly election 2026 bjp vs tmc battle

Get Latest   Hindi News ,  Maharashtra News ,  Entertainment News ,  Election News ,  Business News ,  Tech ,  Auto ,  Career and  Religion News  only on Navbharatlive.com

Published On: Apr 14, 2026 | 01:48 PM

Topics:  

  • Assembly Election 2026
  • TMC
  • West Bengal
  • West Bengal Assembly Election

Popular Section

  • देश
  • विदेश
  • खेल
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • वेब स्टोरीज़

States

  • महाराष्ट्र
  • उत्तर प्रदेश
  • मध्यप्रदेश
  • दिल्ली NCR
  • बिहार

Maharashtra Cities

  • मुंबई
  • पुणे
  • नागपुर
  • ठाणे
  • नासिक
  • अकोला
  • वर्धा
  • चंद्रपुर

More

  • वायरल
  • करियर
  • ऑटो
  • टेक
  • धर्म
  • वीडियो

Follow Us On

Contact Us About Us Disclaimer Privacy Policy Terms & Conditions Author
Marathi News Epaper Hindi Epaper Marathi RSS Sitemap

© Copyright Navbharatlive 2026 All rights reserved.