Delhi Riots Case: उमर खालिद को कड़कड़डूमा कोर्ट से बड़ी राहत, परिवार के साथ हफ्ते में दो बार होगी ई-मुलाकात
Delhi Riots Case Umar Khalid: दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने उमर खालिद के परिवार से सप्ताह में दो बार होने वाली ई-मुलाकात सुविधा बहाल कर दी है। कोर्ट ने कहा कि इसमें कटौती का कोई उचित आधार नहीं था।
- Written By: करुणा नंद शाहवाल
दिल्ली कड़कड़डूमा कोर्ट और उमर खालिद (सोर्स- एआई नीर्मित)
Delhi Karkardooma Court Umar Khalid E-Mulakat: दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा साजिश मामले में आरोपी उमर खालिद को राहत देते हुए उनके परिवार के साथ सप्ताह में दो बार होने वाली ई-मुलाकात (वीडियो कॉल) की सुविधा बहाल करने का आदेश दिया है। अदालत ने माना कि उमर खालिद पिछले लगभग छह वर्षों से बिना किसी जेल नियम का उल्लंघन किए नियमित रूप से इस सुविधा का उपयोग कर रहे थे। ऐसे में उनकी ई-मुलाकातों की संख्या दो से घटाकर एक किए जाने का कोई उचित आधार रिकॉर्ड पर उपलब्ध नहीं है।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि मई 2026 से बिना कोई स्पष्ट कारण बताए उनकी साप्ताहिक वीडियो कॉल की संख्या कम कर दी गई थी। इस पर अदालत ने पहले की व्यवस्था बहाल करने का निर्देश दिया। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह राहत केवल ई-मुलाकात से संबंधित है। इससे पहले इसी मामले में उमर खालिद और सह-आरोपी शरजील इमाम की नियमित जमानत याचिकाएं खारिज की जा चुकी हैं। अदालत ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय शर्तें पूरी होने के बाद ही नई जमानत याचिका पर विचार किया जा सकता है।
बचाव पक्ष ने कटौती पर उठाया सवाल
अदालत ने कहा कि उमर खालिद पिछले करीब छह वर्षों से बिना किसी जेल नियम का उल्लंघन किए सप्ताह में दो बार ई-मुलाकात की सुविधा का लाभ उठा रहे थे। ऐसे में इस सुविधा में कटौती का कोई उचित आधार रिकॉर्ड पर नहीं है। सुनवाई के दौरान उमर खालिद की ओर से उनके वकील ने दलील दी कि मई 2026 से बिना कोई कारण बताए उनकी ई-मुलाकातों की संख्या दो से घटाकर एक कर दी गई थी। बचाव पक्ष ने इसे मनमाना बताते हुए पहले की व्यवस्था बहाल करने की मांग की।
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दिल्ली दंगा मामले में न्यायिक हिरासत जारी
दलीलों पर विचार करने के बाद अदालत ने उमर खालिद के परिवार के साथ सप्ताह में दो बार वीडियो कॉल (ई-मुलाकात) की सुविधा फिर से बहाल करने का निर्देश दिया। बता दें कि उमर खालिद वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा साजिश मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) समेत विभिन्न धाराओं के तहत न्यायिक हिरासत में हैं।
पिछले 6 वर्षों से जेल में बंद
इससे पहले कड़कड़डूमा कोर्ट ने इसी मामले में उमर खालिद और सह-आरोपी शरजील इमाम की नियमित जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं। दोनों ने दूसरी बार जमानत की मांग करते हुए कहा था कि 5 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद भी मुकदमे की सुनवाई में कोई खास प्रगति नहीं हुई है और वे पिछले छह वर्षों से जेल में हैं।
जमानत पर पहले ही मिल चुकी है निराशा
हालांकि, अदालत ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि दोनों आरोपी एक वर्ष पूरा होने या अभियोजन पक्ष के प्रमुख गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद ही नई जमानत याचिका दाखिल कर सकते हैं। चूंकि इनमें से कोई भी शर्त अभी पूरी नहीं हुई है, इसलिए इस चरण में जमानत याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।
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कोर्ट ने ई-मुलाकात बहाल की
अदालत ने यह भी कहा था कि जमानत से जुड़े कानूनी पहलुओं पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी पीठ विचार कर रही है, इसलिए उस पर अंतिम निर्णय आने तक निचली अदालत इस संबंध में कोई राहत नहीं दे सकती। दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने उमर खालिद के परिवार से सप्ताह में दो बार होने वाली ई-मुलाकात सुविधा बहाल कर दी है। अदालत ने कहा कि सुविधा में कटौती का कोई उचित आधार नहीं था।
