Supreme Court on Vande Mataram: राष्ट्रगीत वंदे मातरम को लेकर सियासी घमासान तेज है। इसी बीच आज सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। मामला राष्ट्रगान के सम्मान और उसके अंतरे के गायन को लेकर था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि कितने अंतरे का गायन होना है यह काम लोकतांत्रिक सरकार का है, सरकार तय करेगी कितने पद का गायन जरूरी है न कि कोर्ट।
अदालत ने आगे कहा किसी व्यक्ति को इसलिए नहीं दंड़ित किया जा सकता है कि वह राष्ट्रगान को नहीं गा रहा है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से दो हफ्ते में जवाब मांगा है।
सुप्रीम कोर्ट में संगीतकार टी.एम. कृष्णा की याचिका की सुनवाई करते हुए कहा कि यदि कोई नागरिक अपने धार्मिक विश्वास या अंतरात्मा की आवाज के कारण राष्ट्रगीत को गाने में परहेज करता है तो उसपर कोई आपराधिक मुकदमा या दंडात्मक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। गौरतलब है कि संगीतकार टी.एम. कृष्णा ने राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण(संसोधन) विधेयक 2026 को चुनौती दी थी।
जिसके अनुसार राष्ट्रगीत के अपमान पर 3 साल की सजा और आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा गृह मंत्रालय के उस निर्देश को भी चुनौती दी गई है, जिसमें आधिकारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम के सभी 6 पदों को गाने की बात कही गई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई की है।
हाल ही में संसद से राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संसोधन) विधेयक पास हुआ, जो कि 1971 के राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम के भाग 3 में संसोधन कर राष्ट्रगीत को भी राष्ट्रगान जैसी सुरक्षा प्रदान करता है और वंदे मातरम के भी अपमान पर दंड का प्रावधान करता है।
वंदे मातरम की रचना के 150 साल पूरा होने पर स्वतंत्रता दिवस 2026 के मौके पर आजादी के बाद पहली बार लाल किले के प्राचीर से राष्ट्रगीत का गायन किया गया था। उसी दिन कांग्रेस मुख्यालय पर झंड़ारोहण के समय राष्ट्रगीत के दो ही पद गाए गए थे जिसकों लेकर राजनीतिक बहस छिड़ गई थी।
जिसके बाद गृह मंत्रालय ने आदेश जारी करते हुए राष्ट्रगीत के सभी 6 अंतरे के गायन को अनिवार्य बताया था। गौरतलब है कि सर बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने स्वतंत्रता के अलख को जगाने करने और क्रांतिकारियों के जजबे को मजबूत करने के लिए राष्ट्रगीत की रचना की थी।