

नई दिल्ली: दिल्ली में बीते 24 घंटे के भीतर दूसरी बार भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। इस बार भूकंप की तीव्रता 3.7 दर्ज की गई, जिसका केंद्र हरियाणा के झज्जर जिले में था। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के अनुसार, भूकंप की गहराई 10 किलोमीटर थी। इस तरह, दिल्ली में लगातार दूसरे दिन भूकंप का अनुभव हुआ।
इससे पहले, पिछले दिन सुबह 9 बजकर 4 मिनट पर दिल्ली-एनसीआर में एक तेज भूकंप आया था, जिसकी तीव्रता 4.1 थी और इसका केंद्र हरियाणा के झज्जर में था। हाल ही में जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भी कई बार भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुरुवार को भूकंप के झटके रोहतक और गुरुग्राम जिलों के साथ-साथ पानीपत, हिसार और मेरठ में भी महसूस किए गए। भूकंप के कारण लोग डर के मारे अपने घरों से बाहर भाग निकले। दिल्ली में भूकंप के झटके महसूस होते ही दहशत फैल गई और लोग खुले स्थानों पर जमा हो गए। इसके चलते कई लोग तो नंगे पैर ही अपने घरों से बाहर निकलकर भागने लगे।
दिल्ली देश के उन चुनिंदा क्षेत्रों में शामिल है जहाँ भूकंप का खतरा अधिक रहता है। भारत में भूकंप की तीव्रता के आधार पर चार भूकंपीय क्षेत्र बनाए गए हैं। जोन II, जोन III, जोन IV और जोन V, दिल्ली सिस्मिक जोन IV में आता है, जिसमें उत्तराखंड के नैनीताल, पीलीभीत, रुड़की, बिहार के पटना, उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर, गोरखपुर, सिक्किम के गंगटोक और पंजाब के अमृतसर जैसे क्षेत्र भी शामिल हैं। इन क्षेत्रों में भूकंप का जोखिम अधिक होता है।
भुगतना पड़ सकता दिल्ली को खामियाजा
विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली की भौगोलिक स्थिति इसे भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील बनाती है, क्योंकि यह हिमालय के नजदीक स्थित है। भारत और यूरेशिया जैसी टेक्टोनिक प्लेटों की टक्कर के कारण पृथ्वी की सतह के नीचे लगातार गतिविधियां होती रहती हैं, जिसका प्रभाव दिल्ली पर भी दिखाई देता है। इसी वजह से नेपाल और तिब्बत जैसे भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में आने वाले झटकों का असर दिल्ली और इसके आसपास के क्षेत्रों पर भी महसूस किया जाता है।