अब दिल्ली को छू भी नहीं पाएंगे दुश्मन, सुरक्षा की ऐसी जबरदस्त व्यवस्था कि हवा में ही नष्ट होंगे हमले
Delhi Air Defence System: भारत सरकार ने दिल्ली को हवाई खतरों से बचाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। देश स्वदेशी एकीकृत वायु रक्षा प्रणाली को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में तैनात करेगा।
- Written By: रंजन कुमार
भारत की रक्षा प्रणाली। इमेज-सोशल मीडिया
Multi Layer Integrated Air Defense: भारत सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को हवाई खतरों से बचाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। इसके तहत दिल्ली-एनसीआर को मिसाइलों, ड्रोन और तेज गति वाले विमानों जैसे दुश्मन के हवाई खतरों से बचाने के लिए अपनी स्वदेशी एकीकृत वायु रक्षा प्रणाली तैनात करने की दिशा में आगे बढ़ रहा।
वरिष्ठ रक्षा सूत्रों ने के अनुसार बहुस्तरीय एकीकृत वायु रक्षा हथियार प्रणाली (IADWS) दिल्ली-एनसीआर की सुरक्षा के लिए स्वदेशी वायु रक्षा मिसाइलों, जैसे-त्वरित प्रतिक्रिया सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली और अति लघु दूरी वायु रक्षा प्रणाली के साथ-साथ अन्य संबंधित उपकरणों पर आधारित होगी।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान बनाना चाहता था निशाना
रक्षा मंत्रालय इस प्रोजेक्ट पर ऐसे समय में विचार कर रहा, जब पाकिस्तान ने मई में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत को निशाना बनाने की कोशिश की थी। स्वदेशी हथियार प्रणाली तैनात करने की योजना घरेलू रक्षा प्रणालियों के लिए बड़ा बढ़ावा होगी, क्योंकि भारत ने पहले अमेरिका निर्मित नेशनल एडवांस्ड सरफेस टू एयर मिसाइल सिस्टम-II (NASAMS-II) तैनात करने की योजना बनाई थी।
सम्बंधित ख़बरें
AFHQ सिविलियन सर्विस को मिलेगा नया रोल, राजनाथ सिंह बोले- सेना की ताकत सिर्फ हथियार नहीं, अदृश्य हाथ भी…
कुवैत ने पाकिस्तान के साथ किया बड़ा रक्षा समझौता, शाही आदेश जारी होते ही बढ़ी हलचल, जानें क्या है खास
PoK पर राजनाथ सिंह की दो-टूक, पाकिस्तान में मची खलबली! Video
अब बात होगी तो सिर्फ PoK पर…, कारगिल वॉर मेमोरियल से राजनाथ सिंह की पाकिस्तान को सख्त चेतावनी; देखें Video
अमेरिका से नहीं बनी बात
भारत ने वाशिंगटन डीसी शहर और व्हाइट हाउस की सुरक्षा करने वाली अमेरिकी प्रणाली की बिक्री के लिए बातचीत शुरू कर दी थी। सूत्रों के अनुसार, भारत सरकार ने अमेरिकियों के साथ इस सौदे को आगे नहीं बढ़ाया, क्योंकि वे बहुत ज्यादा कीमत मांग रहे थे। आईएडीडब्ल्यूएस दिल्ली-एनसीआर में महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार होगा और यह भारतीय वायु सेना की जिम्मेदारी है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) उन उत्पादन एजेंसियों के साथ काम करेगा, जो नेटवर्किंग और कमान एवं नियंत्रण पर काम करेंगी।
यह भी पढ़ें: भारत तकनीक में निकला एक कदम और आगे, DRDO ने फाइटर जेट एस्केप सिस्टम का किया सफल परीक्षण, जानें फायदा
DRDO कर रहा काम
सूत्रों का कहना है कि ऐसी जटिल वायु रक्षा प्रणाली के लिए विशेष प्रणालियों की जरूरत होती है। डीआरडीओ ने क्यूआरएसएएम, मध्यम दूरी की एसएएम जैसी कई वायु रक्षा प्रणालियों का सफलतापूर्वक विकास किया और कुशा परियोजना के तहत लंबी दूरी की एसएएम विकसित करने पर काम कर रहा है। भारत एस-400 सुदर्शन वायु रक्षा मिसाइल प्रणालियों के दो शेष स्क्वाड्रनों को प्राप्त करने के लिए भी काम कर रहा है। इसके साथ ही एस-500 वायु रक्षा प्रणाली के साथ-साथ अधिक एस-400 के लिए रूसी प्रस्ताव पर भी विचार कर रहा है।
