हमारे यहां इस्तीफे नहीं होते कहने वाली मोदी सरकार को कॉकरोचों ने कैसे हराया? कब, क्या हुआ…यहां जानें सबकुछ
NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद परीक्षा से निकलकर राष्ट्रीय आंदोलन बन गया। CJP के नेतृत्व, छात्र प्रदर्शन, विपक्ष के समर्थन और सरकार से वार्ता के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया।
- Written By: अर्पित शुक्ला
PM मोदी (Image- Social Media)
Dharmendra Pradhan Resignation: नीट-यूजी 2026 पेपर लीक विवाद केवल एक परीक्षा में गड़बड़ी का मामला नहीं रहा। कुछ ही हफ्तों में यह देश की सबसे बड़ी राजनीतिक और सामाजिक बहस बन गया। दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का लंबा आंदोलन, संसद का बार-बार ठप होना, विपक्ष का खुला समर्थन और अंततः केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इन घटनाओं ने पूरे घटनाक्रम को राष्ट्रीय मुद्दा बना दिया।
इस्तीफे के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का एक पुराना बयान भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा। उस बयान में उन्होंने कहा था, “मंत्रियों के त्यागपत्र नहीं होते हैं भैया, ये UPA सरकार नहीं, NDA सरकार है।” धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
3 मई 2026 को देशभर में NEET-UG परीक्षा आयोजित हुई, जिसमें करीब 22 से 24 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए। परीक्षा के कुछ दिनों बाद कथित पेपर लीक की शिकायतें सामने आने लगीं। आरोप था कि कुछ स्थानों पर वास्तविक प्रश्नपत्र पहले ही लीक हो गया था।
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लगातार बढ़ते दबाव के बीच 12 मई को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने परीक्षा रद्द कर दी और मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी। 15 मई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वीकार किया कि परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर चूक हुई है। इसके बाद 21 जून को दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया।
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (फोटो क्रेडिट-X)
कैसे बना ‘कॉकरोच जनता पार्टी’?
इसी दौरान सोशल मीडिया पर एक अलग घटनाक्रम शुरू हुआ। सुप्रीम कोर्ट की एक टिप्पणी के बाद “कॉकरोच” शब्द चर्चा में आया। इसी संदर्भ में 16 मई को अभिजीत दीपके ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) नाम से एक ऑनलाइन मंच शुरू किया। शुरुआत में इसे केवल सोशल मीडिया का मजाक माना गया, लेकिन NEET विवाद बढ़ने के साथ यही मंच हजारों छात्रों की आवाज बन गया।
जंतर-मंतर पर शुरू हुआ आंदोलन
6 जून को CJP ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर पहला बड़ा प्रदर्शन किया। आंदोलन की तीन प्रमुख मांगें थीं, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार। कथित तौर पर परीक्षा विवाद के कारण जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा। 20 जून से प्रदर्शन अनिश्चितकालीन धरने में बदल गया।
सोनम वांगचुक और अभिजीत दीपके
सोनम वांगचुक भी आंदोलन से जुड़े
इसी दौरान सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी आंदोलन में शामिल हुए और भूख हड़ताल शुरू कर दी। उनका अनशन लगभग 26 दिनों तक चला। इस दौरान उन्हें अस्पताल में भर्ती भी कराया गया।
20 जुलाई: ‘चलो संसद’ मार्च और हिंसा
20 जुलाई को CJP ने “चलो संसद” मार्च का आह्वान किया। हजारों छात्र संसद की ओर बढ़े। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ। कई स्थानों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों दोनों के घायल होने की खबरें सामने आईं। इसी घटना ने आंदोलन को और बड़ा बना दिया।
जंतर-मंतर (Image- IANS)
विपक्ष भी खुलकर मैदान में उतरा
इसके बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे समेत INDIA गठबंधन के कई नेता छात्रों के समर्थन में सड़कों पर उतर आए। विपक्ष की प्रमुख मांगें थीं, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। पुलिस कार्रवाई की जांच और छात्रों से सार्वजनिक माफी।
संसद भी रही ठप
मानसून सत्र शुरू होने के साथ ही NEET विवाद संसद तक पहुंच गया। लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष लगातार धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करता रहा। कई दिनों तक दोनों सदनों की कार्यवाही बाधित रही। सरकार चर्चा के लिए तैयार होने की बात कहती रही, जबकि विपक्ष पहले इस्तीफे की मांग पर अड़ा रहा।
प्रधानमंत्री मोदी का वीडियो संदेश
23 जुलाई की रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो संदेश जारी कर कहा कि पेपर लीक के दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। फास्ट ट्रैक अदालतें बनाई जाएंगी। सख्त कानून लाया जाएगा। छात्रों के भविष्य से समझौता नहीं किया जाएगा। अगले दिन उन्होंने एक और वीडियो जारी कर युवाओं के सुझावों के लिए धन्यवाद दिया।
PM मोदी (Image- Insta/@narendramodi)
सरकार और CJP के बीच बातचीत
24 जुलाई को CJP प्रतिनिधियों और केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा तथा जितेंद्र सिंह के बीच बैठक हुई। बैठक में CJP ने अपनी तीन प्रमुख मांगें दोहराईं। बताया गया कि सरकार ने मुआवजे और मामलों की समीक्षा पर सकारात्मक संकेत दिए, लेकिन इस्तीफे के मुद्दे पर निर्णय के लिए समय मांगा।
आखिरकार आया बड़ा फैसला
25 जुलाई 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले दिन से इस पूरे मामले की नैतिक जिम्मेदारी ली थी और देशहित में अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री को सौंप दिया है। उधर केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पेपर लीक के मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट, कड़ी सजा और भारी जुर्माने वाले नए विधेयक के मसौदे को भी मंजूरी दे दी।
धर्मेंद्र प्रधान (Image- IANS)
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CJP ने खत्म किया आंदोलन
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP ने घोषणा की कि सरकार के साथ उसकी प्रमुख मांगों पर सहमति बनने के बाद जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन समाप्त किया जा रहा है। हालांकि संगठन ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और अन्य लंबित मांगों पर वह आगे भी नजर बनाए रखेगा।
