तुगलक लेन
नई दिल्ली: दिल्ली में ‘तुगलक लेन’ में रहने वाले भाजपा सांसदों के घरों के बाहर ‘विवेकानंद मार्ग’ लिखा हुआ है। भाजपा सांसद दिनेश शर्मा और केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर के सरकारी आवास के बाहर अब ‘तुगलक लेन’ के साथ ‘विवेकानंद मार्ग’ भी लिखा हुआ है। हालांकि, इस नाम में अभी तक कोई आधिकारिक बदलाव नहीं हुआ है। नाम बदलने की आधिकारिक प्रक्रिया क्या है? दिल्ली में किसी भी गली, सड़क, चौराहे या इलाके का नाम बदलने की प्रक्रिया आसान नहीं है। इसके लिए दिल्ली नगर निगम या एमसीडी को प्रस्ताव भेजना होता है।
इसके बाद संबंधित समिति इसे सरकार को भेजती है। अगर केंद्र सरकार इसे मंजूरी देती है तो नया नाम आधिकारिक तौर पर लागू हो जाएगा। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद इसे आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित किया जाता है। इसके बाद ही नाम बदलने की प्रक्रिया पूरी होती है। केंद्र की मंजूरी इसलिए जरूरी है क्योंकि दिल्ली एक केंद्र शासित प्रदेश है। भाजपा ने 2022 में नाम बदलने का प्रस्ताव रखा था
2022 में दिल्ली भाजपा ने मांग की है कि कथित तौर पर ‘मुस्लिम गुलामी’ के प्रतीक कई सड़कों के नाम बदले जाएं।
तुगलक रोड – गुरु गोविंद सिंह मार्ग
अकबर रोड – महाराणा प्रताप रोड
हुमायूं रोड – महर्षि वाल्मीकि रोड
शाहजहां रोड – बिपिन रावत जनरल रोड
दिल्ली में कई सड़कों और इलाकों का नाम पहले ही बदला जा चुका है।
औरंगजेब रोड – डॉ एपीजे अब्दुल कलाम रोड (2015)
डलहौजी रोड – दीन दयाल उपाध्याय मार्ग (2017)
राजपथ – कर्तव्यपथ (2022)
रेस रूट – लोक कल्याण मार्ग (2016)
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दिल्ली में सड़कों के नाम बदलने को लेकर अक्सर राजनीति गरमा जाती है। भाजपा का कहना है कि मुगल शासकों और विदेशी सरकारों के नाम हटाकर उनकी जगह महान भारतीय पुरुषों के नाम रखे जाने चाहिए। जबकि विपक्षी दल इसे इतिहास से छेड़छाड़ बताते हैं। भाजपा सांसदों के घरों के बाहर ‘विवेकानंद मार्ग’ के पोस्टर लगाने से नया विवाद पैदा हो सकता है।