IB अफसर अंकित शर्मा हत्याकांड: 51 वार कर नाले में फेंकी थी लाश, दिल्ली दंगों के इस खौफनाक केस में फैसला आज
Ankit Sharma Murder Delhi: 2020 के भयानक दिल्ली दंगों में आईबी अफसर अंकित शर्मा की हत्या के मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट आज अपना फैसला सुनाएगी। ताहिर सहित 11 आरोपियों पर यह मुकदमा चला है।
- Written By: प्रिया सिंह
दिल्ली दंगे 2020 IB अफसर अंकित शर्मा हत्याकांड (सोर्स-सोशल मीडिया)
IB Officer Ankit Sharma Murder News: उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 2020 के भयानक दंगों के दौरान मारे गए आईबी अधिकारी के मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट 11 जून को ऐतिहासिक फैसला सुनाएगी। इस संवेदनशील मामले में पूर्व आप पार्षद ताहिर हुसैन सहित 11 अन्य आरोपियों की किस्मत का अंतिम फैसला न्यायाधीश परवीन सिंह की अदालत में होना है।
यह अहम फैसला पहले 4 जून को आने वाला था लेकिन किन्हीं कारणों से इसे 11 जून तक टाल दिया गया था जिससे परिवार का इंतजार बढ़ गया। यह मामला केवल एक युवा खुफिया अधिकारी की बर्बर हत्या का नहीं है बल्कि यह दंगों के बीच रची गई गहरी साजिश का अहम हिस्सा था।
नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के भारी विरोध के कारण फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई इलाके हिंसा की आग में सुलग रहे थे। इन्हीं दंगों के बीच 25 फरवरी की शाम 26 वर्षीय युवा आईबी अफसर गली में हिंसक भीड़ को शांत कराने के मुख्य उद्देश्य से घर से बाहर निकले थे।
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प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक भीड़ ने हिंदू-हिंदू चिल्लाते हुए उन्हें ताहिर हुसैन के घर के पास ले जाकर धारदार हथियारों से उन पर ताबड़तोड़ कई जानलेवा वार किए थे। हत्या के बाद उनके शरीर की पहचान मिटाने और सबूत नष्ट करने के मकसद से शव को पास के ही खजूरी खास नाले की गंदी कीचड़ में बेरहमी से धकेल दिया गया था।
नाले में मिली थी लाश
मृतक अंकित के पिता रविंदर कुमार ने अगले दिन 26 फरवरी 2020 को अपने बेटे की गुमशुदगी की रिपोर्ट थाने में दर्ज कराई थी जिसके बाद पुलिस की तलाश शुरू हुई। पुलिस ने जब खजूरी खास के नाले से शव बाहर निकाला तो उनके शरीर पर हथियारों के 51 गहरे चोटों के भयंकर निशान मिले जिसने देश को चौंका दिया। मेडिकल जांच में डॉक्टरों ने बताया कि फेफड़ों और मस्तिष्क पर इतने घातक वार किए गए थे कि भारी खून बहने के कारण मौके पर ही उनकी मौत हो गई थी।
ताहिर हुसैन मुख्य आरोपी
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने पूर्व आप पार्षद ताहिर हुसैन को इस हत्याकांड का मास्टरमाइंड बताते हुए कुल 11 आरोपियों पर अपना गंभीर केस दर्ज किया था। पुलिस का दावा था कि ताहिर का घर दंगाइयों का मुख्य ठिकाना बना हुआ था जहां से तेजाब की बोतलें, गुलेल और पत्थर भारी मात्रा में बरामद हुए थे। ताहिर के अलावा हसीन, नाजिम, कासिम, समीर, अनस, फिरोज, जावेद, गुलफाम, शोएब और मुंतजिम को भी इस हत्याकांड के मामले में पूरी तरह से आरोपी बनाया गया है।
कोर्ट में दोनों पक्षों की दलीलें
सरकारी वकील ने अदालत में साफ कहा कि यह अचानक हुई कोई वारदात बिल्कुल नहीं थी बल्कि यह बहुसंख्यक समुदाय को अपना निशाना बनाने की बहुत गहरी साजिश थी। वहीं दूसरी ओर आरोपी ताहिर हुसैन के वकीलों ने लगातार दलील दी कि उन्हें केवल राजनीतिक द्वेष के तहत फंसाया गया है और उनके खिलाफ सीधे वार करने का सबूत नहीं है। अदालत ने पुलिस द्वारा पेश किए गए सीसीटीवी फुटेज देखते हुए यह टिप्पणी की थी कि ताहिर ने ही हिंसक भीड़ को पूरी तरह से उकसाया था।
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कई गंभीर धाराओं में चला मुकदमा
इन सभी आरोपियों पर धारा 147, धारा 148, धारा 153A, धारा 120B और हत्या की गंभीर धारा 302 के तहत बहुत ही बड़े मुकदमे लगातार चलाए गए हैं। मुख्य आरोपी ताहिर हुसैन पर इन सभी के अतिरिक्त धारा 109 और धारा 505 के तहत भी बेहद संगीन और आपराधिक आरोप लगाकर मुकदमा पेश किया गया है। अगर कड़कड़डूमा अदालत आज इन सभी 11 आरोपियों को दोषी करार देती है तो उन्हें उम्रकैद से लेकर फांसी तक की बड़ी और सख्त सजा हो सकती है। पूरे 6 साल से न्याय का इंतजार कर रहे पीड़ित परिवार और देश के लोगों को आज इस अहम और ऐतिहासिक फैसले का बहुत ही बेसब्री से इंतजार है।
