

NCR Planning Board 42nd Meeting: मंगलवार को सुबह 11 बजे दिल्ली में विज्ञान भवन में NCR प्लानिंग बोर्ड की 42वीं बैठक हुई। इसकी अध्यक्षता केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने की। बैठक में एनसीआर का दायरा कम करने के प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली। अब एनसीआर के सीमा क्षेत्र में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं होगा। बैठक में हरियाणा सरकार की ओर से राज्य के 5 जिलों को NCR से बाहर रखने का प्रस्ताव रखा था।
बैठक में यह तय हुआ है कि जो क्षेत्र पहले से NCR में है, आगे भी वो बना रहेगा। हरियाणा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बताया कि बैठक में बोर्ड ने एक सब कमेटी बनाई है। यह कमेटी अगस्त तक अपनी रिपोर्ट देगी। प्लानिंग बोर्ड की अगली बैठक दिसंबर महीने में होगी।
आज नेशनल कैपिटल रीजन प्लानिंग बोर्ड की 42वीं बैठक हुई, जिसमें चार राज्यों के प्रतिनिधि शामिल हुए। संशोधित RP-21 की घोषणा दो महीने बाद की जाएगी। प्रदूषण से जुड़ी पाबंदियां तीन क्षेत्रों पर आधारित होंगी। BS-6 ट्रांज़िशन स्कीम के तहत BS-4 वाहनों पर 30% की छूट मिलेगी। बैठक में वाहनों की संख्या कम करने और उपलब्ध जमीन पर चार 'नमो सिटी' विकसित करने पर चर्चा हुई।
बैठक की अध्यक्षता कर रहे केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अपने एक्स हैंडल से जानकारी साझा करते हुए लिखा, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के सुव्यवस्थित, समन्वित एवं संतुलित विकास को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से आज राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (NCRPB) की 42वीं बैठक की अध्यक्षता की। बैठक के दौरान दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश एवं राजस्थान के बीच संस्थागत समन्वय को मजबूत करने, क्षेत्रीय आवागमन एवं संपर्क सुविधाओं को बेहतर बनाने, विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने तथा NCR से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा हुई।
NCRPB राज्यों के बीच समन्वित विकास के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है, जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र को अधिक सुव्यवस्थित, सुगम, सक्षम एवं सतत विकास की दिशा में अग्रसर करने में अहम भूमिका निभा रहा है।
इस बैठक में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायाब सैनी, उत्तर प्रदेश के शहरी विकास मंत्री और राजस्थान के शहरी विकास मंत्री भी शामिल रहे। बैठक का सबसे बड़ा मुद्दा एनसीआर के क्षेत्र को कम करना था।
बैठक में हरियाणा सरकार ने राज्य के 5 जिलों, चरखी दादरी, पानीपत, जींद आदि को NCR से बाहर करने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली। यदि यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता तो दिल्ली एनसीआर 100 किमी क्षेत्र में ही सिमट जाता।