राजपाल यादव फिर जाएंगे 3 महीने के लिए जेल, हाई कोर्ट ने बरकरार रखी सजा, पैसे देने से मुकरे एक्टर

Rajpal Yadav Jail: हाई कोर्ट ने राजपाल यादव के चेक बाउंस मामलों में एक्टर की सजा को बरकरार रखा है। कोर्ट ने राजपाल यादव को चेक बाउंस के सभी सात मामलों में तीन-तीन महीने के कारावास की सजा सुनाई है।
Rajpal Yadav
राजपाल यादव (फोटो-सोर्स,सोशल मीडिया)
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Delhi High Court on Rajpal Yadav: दिल्ली हाई कोर्ट ने राजपाल यादव के चेक बाउंस मामलों में एक्टर की सजा को बरकरार रखा है। हाई कोर्ट की लगातार कोशिशों के बाद भी समझौते की कोशिशें नाकाम रहीं, इसके बाद जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने 2 अप्रैल को इस मामले में फैसला सुरक्षित रखा था। दिल्ली हाई कोर्ट ने बकाया रकम चुकाने को लेकर राजपाल यादव के बदलते रुख पर नाराजगी जताई थी।

हाई कोर्ट ने लगातार जबाव नहीं मिलने पर आपत्ति जताई थी और कहा था कि मुझे मेरे जवाब नहीं मिल रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि अंडरटेकिंग में कुछ और कहा गया था और अब आप कुछ और कह रहे हैं। जिससे राजपाल यादव की तरफ से दी गई दलीलों में विरोधाभास पर चिंता जाहिर हुई थी।

सभी मामलों में राजपाल की सजा बरकरार

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक्टर राजपाल यादव को चेक बाउंस के सभी सात मामलों में तीन-तीन महीने के कारावास की सजा सुनाई है। हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी, इसलिए राजपाल यादव को कुल तीन महीने की ही सजा भुगतनी होगी। कोर्ट ने हर मामले में 1.05 करोड़ का जुर्माना भी लगाया है। इस तरह राजपाल यादव पर सातों मामलों में कुल जुर्माना 7.35 करोड़ बनता है।

हाई कोर्ट के आदेश के मुताबिक, सभी मामले में 1 करोड़ 4 लाख 75 हजार शिकायतकर्ता को दिए जाएंगे और 25 हजार राज्य को अदा किए जाएंगे।

हाई कोर्ट में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच ने सुनवाई के दौरान अभिनेता के रवैए को संदिग्ध बताया और कहा कि उनको रकम चुकाने के कई मौके दिए गए थे। लेकिन वो अपने वादों को पूरा करने में पूरी तरह से नाकाम रहे।

राजपाल यादव ने ठुकराया प्रस्ताव

हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान आपसी समझौते की भी कोशिशें जारी रखीं। अदालत के सुझाव पर शिकायतकर्ता फुल एंड फाइनल सेटलमेंट के तौर पर 6 करोड़ रुपये लेने को तैयार भी हो गया। हालांकि, पिछली सुनवाई के दौरान वर्चुअली पेश हुए राजपाल यादव ने प्रस्ताव ठुकरा दिया और कोर्ट को बताया कि उनको पहले ही भारी आर्थिक नुकसान हो चुका है।

राजपाल यादव ने दलील दी कि उन्हें अपनी प्रॉपर्टी बेचनी पड़ी और वे पहले ही काफ़ी पेमेंट कर चुके हैं। हाई कोर्ट ने एक तय समय-सीमा के अंदर 3 करोड़ रुपये के स्ट्रक्चर्ड पेमेंट का सुझाव भी दिया था और यह भी कहा था कि ये केवल एक न्यायिक सुझाव था न कि कोई पक्का समझौता।

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