दलाई लामा के स्वास्थ्य पर दुनिया की नजर, इलाज के लिए दिल्ली आ रहे हैं आध्यात्मिक गुरु

Dlai Lamba Health Update: तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा शुक्रवार को दिल्ली पहुंचेंगे। एक आधिकारिक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी गई है। यहां उनके बाएं घुटने का उपचार किया जाएगा।
The World's Eyes on the Dalai Lama's Health: The Spiritual Guru Is Coming to Delhi for Treatment.
दलाई लामा (सोर्स सोशल मीडिया)
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Dlai Lamba Delhi Visit: तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा शुक्रवार को दिल्ली पहुंचेंगे। एक आधिकारिक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी गई है। यहां उनके बाएं घुटने का उपचार किया जाएगा।

धर्मशाला स्थित उनके कार्यालय की ओर से ये एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी गई। इसमें आगे कहा गया कि उपचार और स्वास्थ्य लाभ के बाद दलाई लामा जून के अंत में लद्दाख की यात्रा करेंगे। वहां वे एक विस्तारित अवधि तक प्रवास करेंगे। लद्दाख में उनके कार्यक्रमों और प्रवास की विस्तृत जानकारी बाद में जारी की जाएगी।

अनुयायियों और शुभचिंतकों की नजर

दलाई लामा वर्तमान में धर्मशाला में निवास करते हैं, जो तिब्बती निर्वासित समुदाय का प्रमुख केंद्र माना जाता है। उनके स्वास्थ्य को लेकर दुनियाभर के अनुयायियों और शुभचिंतकों की नजर बनी हुई है। तिब्बती धर्मगुरु वर्तमान में हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में रहते हैं, जो तिब्बती निर्वासित समुदाय का प्रमुख केंद्र माना जाता है। वर्ष 1959 में तिब्बत छोड़ने के बाद से वे भारत में रह रहे हैं और धर्मशाला को ही अपना स्थायी निवास बना चुके हैं।

नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित

तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा एक करिश्माई व्यक्तित्व के धनी हैं, जिन्होंने बौद्ध धर्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्हें वर्ष 1989 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। यह सम्मान उन्हें निर्वासन में रहकर तिब्बत के मुद्दे को जीवित रखने और शांतिपूर्ण संघर्ष की वकालत करने के लिए दिया गया था।

तिब्बती निर्वासित सरकार का नेतृत्व

दलाई लामा ने वर्ष 1959 में तिब्बत छोड़कर भारत में शरण ली थी। यह घटना तब हुई जब चीन ने 1950 में हिमालयी क्षेत्र में सैनिक भेजे और दावा किया कि वह तिब्बत के "किसानों और गुलामों" को आजादी दिला रहा है। इसके बाद से दलाई लामा भारत के धर्मशाला में रहकर तिब्बती निर्वासित सरकार और समुदाय का नेतृत्व करते रहे हैं।तिब्बती बौद्ध परंपरा के अनुसार, उच्च स्तर के धार्मिक गुरु और विद्वान भिक्षु मृत्यु के बाद पुनर्जन्म लेते हैं। इसी विश्वास के आधार पर दलाई लामा के पुनर्जन्म की पहचान की जाती है। माना जाता है कि यह प्रक्रिया आध्यात्मिक संकेतों और धार्मिक खोज के माध्यम से पूरी की जाती है।

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