'बीच में मत पड़ो, ये हमारा मामला है', भारत को आंख दिखाने लगा चीन; जानिए क्यों अचानक तल्ख हुए ड्रैगन के सुर

Dalai Lama Issue: चीन की बौखलाहट की असल वजह यह है कि दलाई लामा ने खुद यह बात साफ कर दी है कि उनके उत्तराधिकारी के चयन की भूमिका में चीन की भूमिका नहीं होगी। उसके बाद से वह भारत को निशाना बना रहा है।
china warned india in the matter related to dalai lama
नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग, (कॉन्सेप्ट फोटो)
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China Warned India Over Dalai Lama Issue: पड़ोसी मुल्क चीन ने एक बार फिर भारत को चेतावनी दी है। इस बार मामला दलाई लामा से जुड़ा हुआ है। भारत के लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश के सीमा पर अवैध दावा करने वाले चीन ने भारत को दलाई लामा से जुड़े मामले से दूर रहने को कहा है। गौरतलब है कि चीन इस समय तिब्बत के आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा के उत्तराधिकारी के चयन को लेकर घबराया हुआ है। हाल ही में दिल्ली में स्थित चीनी दूतावास ने एक बयान में कहा है कि यह हमारा आंतरिक मामला है भारत को इसमें दखलअंदाजी नहीं करनी चाहिए।

चीनी प्रवक्ता यू जिंग द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान कहा गया है कि दलाई लामा के उत्तराधिकारी का मुद्दा पूरी तरह से चीन का आंतरिक मामला है और भारत इसे दूर रहे। वहीं चीनी दूतावास ने भारत से यह मांग भी की है कि वह अपनी धरती का इस्तेमाल 'तिब्बत की आजादी' की मांग करने वाले संगठनों और उनके नेताओं को मंच देने के लिए न करे।

'उत्तराधिकारी के चयन में चीन की मंजूरी जरूरी'

चीन की ओर से कहा गया कि दलाई लामा के उत्तराधिकारी का चयन हमेशा से धार्मिक परंपराओं और ऐतिहासिक प्रथाओं के अनुसार होता है। इस प्रक्रिया में चीन की मंजूरी जरूरी होती है। यू जिंग ने कहा कि दलाई लामा के उत्तराधिकारी को चुनने के लिए सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं और ऐतिहासिक प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है और इसमें चीन की केंद्र सरकार की मंजूरी जरूरी होती है। 14वें दलाई लामा को भी इसी प्रक्रिया के तहत मान्यता दी गई थी। चीनी प्रवक्ता ने आगे कहा कि दलाई लामा के पुनर्जन्म का मुद्दा पूरी तरह चीन का आंतरिक मामला है और इसमें बाहरी हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। चीन ने यह भी कहा कि ‘सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन’ को किसी भी संप्रभु देश द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं है और उसे इस प्रक्रिया पर कोई दावा करने का अधिकार नहीं है। यू जिंग ने कहा कि हमें उम्मीद है कि भारत इन प्रतिबद्धताओं का पालन करता रहेगा, तिब्बत की आजादी से जुड़ी गतिविधियों को कोई मंच नहीं देगा और दलाई लामा के पुनर्जन्म के मुद्दे में हस्तक्षेप करने से बचेगा। चीन ने कहा कि इससे दोनों देशों के आपसी संबंध मजबूत करने में मदद मिलेगी।

पहले भी भारत को चेतावनी दे चुका है चीन

गौरतलब है कि चीन ने पिछले साल भी इस मामले पर भारत को चेतावनी देने की कोशिश की थी। चीनी दूतावास ने दलाई लामा के उत्तराधिकारी के मुद्दे को भारत-चीन संबंधों के बीच एक बड़ा कांटा भी बताया था। दरअसल, चीन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 14वें दलाई लामा को जन्मदिन की बधाई देने पर आगबबूला हुआ था। चीन ने तब इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी।

भारत पर क्यों भड़क उठा है चीन

चीन की बौखलाहट की असल वजह यह है कि दलाई लामा ने खुद यह बात साफ कर दी है कि उनके उत्तराधिकारी के चयन की भूमिका में चीन की भूमिका नहीं होगी। पिछले साल इसकी घोषणा के बाद से 14वें दलाई लामा कई बार सार्वजनिक रूप से यह बात कह चुके हैं। दलाई लामा कह चुके हैं कि उनका अगला अवतार किसी लोकतांत्रिक और स्वतंत्र देश में भी हो सकता है।

वहीं पिछले साल केंद्रीय मंत्री किरन रीजीजू ने भी एक बयान में कह दिया था कि दलाई लामा के अनुयायी यह चाहते हैं कि तिब्बती आध्यात्मिक नेता को अपना उत्तराधिकारी खुद चुनना चाहिए। हालांकि, उन्होंने साफ किया था कि यह भारत सरकार का बयान नहीं है, बल्कि उनकी व्यक्तिगत राय है।

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