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अरविंद केजरीवाल के जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ हलफनामे के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंची CBI, जानें क्या कहा

Delhi Excise Policy Scam: दिल्ली आबकारी नीति मामले में सुनवाई से जज के खुद को अलग करने की मांग को लेकर कानूनी बहस तेज हो गई है। इस मामले में CBI ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी लिखित दलीलें दाखिल की है।

  • Written By: सजल रघुवंशी
Updated On: Apr 16, 2026 | 09:31 PM

सीबीआई और केजरीवाल (सोर्स- सोशल मीडिया)

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CBI On Arvind Kejriwal Affidavit In Supreme Court: दिल्ली आबकारी नीति मामले में सुनवाई से जज के खुद को अलग करने की मांग को लेकर कानूनी बहस तेज हो गई है। इस मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी लिखित दलीलें दाखिल करते हुए अरविंद केजरीवाल और अन्य याचिकाकर्ताओं की मांग का कड़ा विरोध किया है।

यह विवाद दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े केस में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के खुद को सुनवाई से अलग करने की मांग से जुड़ा है। केजरीवाल और अन्य याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया है कि जज के बच्चों का केंद्र सरकार के पैनल से जुड़ा होना हितों के टकराव का कारण बन सकता है।

सीबीआई का क्या है तर्क?

सीबीआई ने अपनी दलीलों में कहा कि यदि इस आधार पर जज को अलग होने के लिए कहा जाता है तो इसका दूरगामी असर होगा। एजेंसी के अनुसार, देश में ऐसे कई जज हैं जिनके रिश्तेदार किसी न किसी सरकारी पैनल से जुड़े होते हैं। सीबीआई का कहना है कि यदि केजरीवाल की दलील मान ली जाती है तो ऐसे सभी जज उन मामलों की सुनवाई करने के अयोग्य हो जाएंगे जो सरकार या किसी राजनीतिक व्यक्ति से जुड़े हों। इससे न्यायिक व्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।

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न्यायिक प्रक्रिया पर उठे सवाल

सीबीआई ने आगे कहा कि इस तर्क के अनुसार न सिर्फ जज बल्कि वह विधि अधिकारी भी प्रभावित होंगे जो पैनल वकीलों को केस सौंपते हैं। ऐसे में पूरी न्यायिक प्रक्रिया बाधित हो सकती है। एजेंसी ने अपने लिखित बयान में स्पष्ट किया कि यदि इस तरह की व्याख्या को स्वीकार किया गया तो यह न्यायपालिका के कामकाज को असंभव बना सकता है और कई मामलों की सुनवाई प्रभावित होगी।

सोशल मीडिया मुहिम पर भी आपत्ति

सीबीआई ने अपने हलफनामे में यह भी आरोप लगाया कि जस्टिस शर्मा के खिलाफ एक सोची-समझी सोशल मीडिया मुहिम चलाई जा रही है। एजेंसी का कहना है कि इस तरह के दबाव के जरिए न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। सीबीआई ने यह भी कहा कि केजरीवाल द्वारा दाखिल अतिरिक्त हलफनामा प्रतिष्ठित संस्थानों और व्यक्तियों की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश है।

यह भी पढ़ें: जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा के बच्चे केंद्र सरकार के वकील…अरविंद केजरीवाल ने दायर किया नया हलफनामा; लगाए आरोप

गलत मिसाल बनने का खतरा

सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट को आगाह करते हुए कहा कि यदि जस्टिस शर्मा खुद को इस मामले से अलग करती हैं, तो यह एक गलत मिसाल स्थापित करेगा। इससे भविष्य में कोई भी पक्ष सोशल मीडिया या बेबुनियाद आरोपों के जरिए जजों पर दबाव बनाकर उन्हें केस से हटाने की कोशिश कर सकता है। फिलहाल, इस मामले में अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट को लेना है। सभी की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि अदालत इस संवेदनशील मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है और न्यायिक स्वतंत्रता व निष्पक्षता के बीच संतुलन कैसे बनाए रखती है।

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Published On: Apr 16, 2026 | 09:31 PM

Topics:  

  • Arvind Kejriwal
  • CBI
  • Delhi Excise Policy Case
  • Delhi News
  • Supreme Court

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