गोल्डी बराड़ पर NIA की बड़ी कार्रवाई, गुरुग्राम बम केस में पांच आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई
NIA ने गुरुग्राम क्लब बम हमले केस में गोल्डी बराड़ समेत 5 के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। गोल्डी और रणदीप मलिक अभी फरार, बाकी सभी आरोपी पकड़े जा चुके हैं।
- Written By: सौरभ शर्मा
हरियाणा के गुरुग्राम में हुए दो क्लबों पर बम धमाकों पर NIA की चार्जशीट दाखिल (फोटो- सोशल मीडिया)
गुरुग्राम: हरियाणा के गुरुग्राम में हुए दो क्लबों पर बम धमाकों के पीछे की बड़ी साजिश का खुलासा हो गया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने इस मामले में कनाडा में बैठे आतंकवादी गोल्डी बराड़ समेत पांच आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। यह धमाके सिर्फ हिंसा नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से देश में सांप्रदायिक तनाव और अस्थिरता फैलाने के लिए किए गए थे। NIA की जांच से साफ हुआ है कि ये हमला एक अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क के इशारों पर हुआ, जिसका मकसद भारत की शांति और अखंडता को चोट पहुंचाना था।
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने आतंकी संगठन बीकेआई के इशारे पर हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक जुटाए थे। इसका मकसद सिर्फ बम विस्फोट करना नहीं था, बल्कि भारत के आर्थिक ढांचे और आम जनता के मन में डर पैदा करना था। गुरुग्राम जैसे शहरी इलाके को निशाना बनाना इस बात का संकेत था कि यह आतंकी नेटवर्क देश के भीतर गहरी पैठ बना रहा है और उसका उद्देश्य सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं है।
गुरुग्राम को दहलाने की साजिश में बड़े नाम शामिल
चार्जशीट में जिन पांच लोगों के नाम हैं, उनमें गोल्डी बराड़ और रणदीप मलिक को मुख्य साजिशकर्ता माना गया है। जबकि सचिन तालियान, अंकित और भाविश को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। ये सभी बब्बर खालसा इंटरनेशनल जैसे प्रतिबंधित आतंकी संगठन के लिए काम कर रहे थे। इन पर भारतीय दंड संहिता, विस्फोटक अधिनियम, आर्म्स एक्ट और यूएपीए जैसी गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है।
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बम धमाके से पहले की गई थी गहरी प्लानिंग
धमाके 10 दिसंबर 2024 को गुरुग्राम के सेक्टर-29 स्थित वेयरहाउस क्लब और ह्यूमन क्लब को निशाना बनाकर किए गए थे। जांच में पता चला कि इन हमलों के पीछे भारत में सांप्रदायिक विद्वेष फैलाने की मंशा थी। साथ ही धमाके के जरिए आतंकी फंडिंग, हथियारों की खरीद और नेटवर्क के विस्तार की कोशिशें भी की जा रही थीं। यह भी खुलासा हुआ कि यह सिंडिकेट देश की सुरक्षा और संप्रभुता को सीधे तौर पर चुनौती देने में जुटा था।
