

पुराने ठेकेदारों को दोबारा अवसर देने पर बढ़ा विवाद।
साय सरकार ने नीलामी की प्रक्रिया नहीं अपनाई।
लीज विस्तार निरस्त कर नीलामी कराने की मांग।
कांग्रेस नेता बोले- दोबारा अवसर दिया जाना गंभीर विषय है।
Former Minister Dhanendra Sahu Statement: छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री एवं किसान नेता धनेन्द्र साहू ने रायपुर जिले की सात रेत खदानों की लीज अवधि तीन वर्ष बढ़ाए जाने और पुराने ठेकेदारों को ही उत्खनन की अनुमति दिए जाने के मामले में राज्य सरकार की खनिज नीति, प्रशासनिक पारदर्शिता और संभावित राजस्व हानि पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि अनुबंध अवधि समाप्त होने के बाद नियमानुसार नीलामी की प्रक्रिया अपनाने के बजाय पुराने ठेकेदारों को ही दोबारा अवसर दिया जाना गंभीर विषय है। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि इस निर्णय के पीछे क्या कानूनी आधार और परिस्थितियां थीं।
धनेन्द्र साहू ने कहा कि रायपुर जिले की कुरूद, लखना, कुम्हारी, परागांव हरदीडीह, चिकली ए और चिकली बी सहित सात रेत खदानों की लीज अवधि बढ़ाए जाने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि पिछले लगभग दो वर्षों में दूसरी बार लीज अवधि बढ़ाई गई है। यदि खदानों के अनुबंध समाप्त हो चुके थे, तो पारदर्शी प्रतिस्पर्धात्मक नीलामी कराने के बजाय पुराने ठेकेदारों को ही तीन वर्ष का अतिरिक्त अवसर क्यों दिया गया? सरकार को इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि रेत खदानें सार्वजनिक प्राकृतिक संसाधनों का हिस्सा हैं। इनसे प्राप्त राजस्व का लाभ प्रदेश की जनता को मिलना चाहिए। नीलामी की प्रक्रिया में अधिक प्रतिस्पर्धा होने पर शासन को अधिक राजस्व मिलने की संभावना रहती है। ऐसे में नीलामी नहीं कराए जाने से शासन को संभावित आर्थिक नुकसान हुआ है या नहीं, इसका आकलन कर पूरी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
धनेन्द्र साहू ने आरोप लगाया कि पुराने ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देशित किए जाने की बात भी सामने आ रही है। उन्होंने कहा कि इस आरोप की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। कलेक्टर और खनिज विभाग को लीज अवधि बढ़ाने के आदेश, उनके कानूनी आधार और निर्णय लेने की प्रक्रिया का विवरण सार्वजनिक करना चाहिए, ताकि पूरे मामले में पारदर्शिता बनी रहे।
धनेन्द्र साहू ने रेत खदानों में पर्यावरणीय नियमों के पालन को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि लीज अवधि बढ़ाई गई कुछ खदानों में पूर्व में पर्यावरणीय दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करने और नियम विरुद्ध उत्खनन के मामलों में कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई है। ऐसी स्थिति में उन्हीं खदानों को दोबारा संचालन की अनुमति देने से पहले यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि पूर्व की कार्रवाई में क्या तथ्य सामने आए थे और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि यदि लीज विस्तार के लिए पर्यावरण विभाग से दोबारा अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना आवश्यक नहीं है, तो पर्यावरणीय शर्तों की समीक्षा किस प्रक्रिया के तहत की गई, यह भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए। रेत उत्खनन के दौरान नदी के प्राकृतिक प्रवाह, जलस्तर, तटों की स्थिरता, भूजल पुनर्भरण और आसपास के पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित करना शासन की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि नदियों से निर्धारित सीमा से अधिक रेत निकालने से नदी की प्राकृतिक संरचना और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए रेत खदानों का संचालन वैज्ञानिक मानकों और निर्धारित नियमों के अनुरूप होना चाहिए। प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और शासन को उचित राजस्व मिलना, दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।
धनेन्द्र साहू ने कलेक्टर और मुख्यमंत्री, जो वर्तमान में खनिज विभाग का दायित्व भी संभाल रहे हैं, से मांग की कि रायपुर जिले की सातों रेत खदानों की लीज अवधि बढ़ाने के आदेश, कानूनी आधार, पर्यावरणीय अनुमतियों, पूर्व में की गई कार्रवाई और शासन को मिलने वाले राजस्व का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए। साथ ही यह भी बताया जाए कि अनुबंध समाप्त होने के बाद नीलामी क्यों नहीं कराई गई और इस निर्णय से शासन को संभावित राजस्व हानि हुई है या नहीं।
उन्होंने मांग की कि लीज अवधि बढ़ाने के निर्णय की समीक्षा कर उसे निरस्त किया जाए और नियमानुसार पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया अपनाई जाए, ताकि प्रतिस्पर्धा के माध्यम से शासन को अधिक राजस्व मिल सके और प्राकृतिक संसाधनों के आवंटन में किसी प्रकार के पक्षपात की आशंका न रहे।