आज से शुरु हुआ छत्तीसगढ़ में हरेली तिहार का त्योहार, जानिए इसकी पूजा का विशेष महत्व
छत्तीसगढ़ के प्रमुख प्राचीन त्योहारों में से एक हरेली का त्योहार है जिसे ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस त्योहार में हरेली शब्द का अर्थ हरियाली से है, इस त्योहार का मुख्य उद्देश्य खेती और हरियाली के महत्व को बताता है।
- Written By: दीपिका पाल
हरेली तिहार (सौ.सोशल मीडिया)
हरेली तिहार त्योहार, छत्तीसगढ़ राज्य के प्रमुख त्योहार में से एक है जो ऱाज्य की परंपरा एक सूत्र में समेटता है। आज से इस पावन त्योहार की शुरुआत राज्य में हो जाएगी जो किसानों के मुख्य त्योहार होता है। आज के दिन से ही किसान भाई धरोहर और पूर्वजों की परंपरा को संजोते हुए कृषि उपकरणों और औजारों की पूजा की जाती है। चलिए जानते हैं इस त्योहार के बारे में..
जानिए हरेली त्योहार के बारे में
यह त्योहार छत्तीसगढ़ के प्रमुख प्राचीन त्योहारों में से एक है जिसे ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस त्योहार में हरेली शब्द का अर्थ हरियाली से है, इस त्योहार का मुख्य उद्देश्य खेती और हरियाली के महत्व को बताता है। किसान अपने खेतों की अच्छी फसल और समृद्धि की कामना करते हैं, ताकि उनकी फसल हरी भरी रहे और राज्य भी हमेशा सुख समृद्धि की ओर आगे बढ़ सकें। त्योहार के दिन बड़े ही धूमधाम से कामना करते हुए पूजा करने से फल अच्छा मिलता है।
#WATCH रायपुर: छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा, “हरेली छत्तीसगढ़ की परंपरा, संस्कृति का पहला त्योहार है, यह किसानों को समर्पित है। इस दिन किसान अपने उपकरणों, गौ माता की पूजा करते हैं… यह सालों से मनाया जा रहा है, मैं प्रदेश वासियों को इसकी शुभकामनाएं देता हूं…” pic.twitter.com/qo89DJ5MPm — ANI_HindiNews (@AHindinews) August 4, 2024
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पांरपरिक परिधानों में करते हैं पूजा
इस हरेली त्योहार के मौके पर कृषि से जुड़े किसान बंधु पूजा अर्चना करते हैं इस दौरान लोग अपनी पारंपरिक वेशभूषा तो पहनते है। वहीं पर किसान अपने खेतों में उपयोग किए जाने वाले हल, गेती, हसिया, रापा,कुल्हाड़ी, बसूला,सब्बल सहित अन्य कृषि उपकरणों की पूजा अच्छे कार्य के लिए करते हैं। इस त्योहार के मौके पर विभिन्न पारंपरिक मीठे पकवान भी बनाए जाते हैं. जिसमें चावल दाल सब्जी तो है ही है इसके अलावा सबसे प्रमुख पकवान होता है चीला, गुलगुला भजिया, बबरा. इन पकवानों को महिलाओं के द्वारा बड़े ही उत्साह के साथ घर के सदस्यों के द्वारा मिलकर बनाया जाता है।
किसान काली चूड़ी करते हैं समर्पित
आपको बताते चलें कि, आज हरियाली त्योहार के मौके पर गांव में जो चुरैलिन दाई की जगह होती है,किसान काली चूड़ी समर्पित करते हुए हुम देकर दाई से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इस दिन किसान, खेतों में ना जाकरअपने गांव में ही रहकर त्योहार को मनाते है। इस दौरान विभिन्न खेलों का आयोजन किया जाता है. जिसमें सबसे लोकप्रिय खेल “गेड़ी”है. जिसमें युवा बुजुर्ग सभी चढ़ते हैं यह विशेष रूप से बांस की लकड़ी से बनाया जाता है. इसके अलावा कबड्डी, खो-खो, नारियल फेक आज खेलते हैं।
किसानों के घरों में पहुंचकर नीम की डाली लगाई जाती है, और व्यापारी के दुकानों व वाहनो में भी जाकर नीम की डाली लगाकर उन्हें सुख समृद्धि की कामना करते हैं।हरेली तिहार के अवसर पर कई जगह महिलाएं भगवान गौरी गौरा की भी पूजा करते हैं. इस दौरान मिट्टी से बनी भगवान की मूर्तियां बनाकर उसे सजाया जाता है।
