

Chattisgarh Guest Teacher Misconduct: भारत में इन दिनों छात्र आंदोलन का एक नया और बेहद जागरूक दौर देखने को मिल रहा है। आज का युवा और छात्र वर्ग अपने अधिकारों को लेकर पहले से कहीं अधिक सजग हो चुका है। अन्याय और गलत आचरण के खिलाफ आवाज उठाने की यह चिंगारी अब केवल बड़े विश्वविद्यालयों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि देश के ग्रामीण इलाकों के सरकारी स्कूलों तक भी पहुंच चुकी है।
ऐसा ही एक बड़ा मामला छत्तीसगढ़ के छिंदवाड़ा जिले के बीचबहरी स्थित शासकीय माध्यमिक शाला से सामने आया है। यहां के छात्र-छात्राओं ने स्कूल के ही शिक्षक और शिक्षिका के गलत आचरण के खिलाफ एकजुट होकर ऐसा आंदोलन खड़ा किया कि आखिरकार प्रशासन को झुकना पड़ा और आरोपी शिक्षकों को हटाना पड़ा। आइए जानते हैं इस पूरे छात्र आंदोलन और हंगामे की पूरी कहानी।
यह पूरा मामला शासकीय माध्यमिक शाला बीचबहरी का है, जहां पुरुष और महिला अतिथि शिक्षक बच्चों को पढ़ाने आते थे। छात्र-छात्राओं का आरोप है कि इन दोनों शिक्षक और शिक्षिका के बीच आपस में प्रेम संबंध थे। वे दोनों स्कूल में बच्चों को पढ़ाने के बजाय आपस में ही खोए रहते थे।
छात्राओं ने आरोप लगाया कि दोनों अक्सर स्कूल के क्लासरूम में बैठकर घंटों प्यार-मोहब्बत की बातें किया करते थे। इस दौरान वे क्लासरूम की खिड़कियां और दरवाजे पूरी तरह से बंद कर लेते थे और बच्चों को पढ़ाने के बजाय उन्हें समय से पहले ही जबरन घर भेज देते थे ताकि उन्हें कोई डिस्टर्ब न कर सके। इसके अलावा दोनों स्कूल के समय में लगातार मोबाइल चलाने में व्यस्त रहते थे।
छात्रों के सब्र का बांध तब टूट गया जब उन्होंने मर्यादा की सारी सीमाएं टूटती देखीं। छात्राओं का आरोप है कि एक बार जब महिला शिक्षिका टॉयलेट गई, तो उनके पीछे-पीछे पुरुष शिक्षक भी उसी टॉयलेट के अंदर घुस गए।
जब कुछ विद्यार्थियों ने उन्हें इस हालत में देख लिया, तो शर्मिंदा होने या माफी मांगने के बजाय आरोपी शिक्षक ने उन बच्चों को धमकी दे कर चुप रहने को कहा।
शिक्षकों की इस तरह की हरकतों और धमकियों से तंग आकर बच्चों ने खुद मोर्चा संभालने का फैसला किया। उन्होंने पहले इस बात की जानकारी अपने माता-पिता को दी। इसके बाद 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) के मौके पर आयोजित ग्राम सभा के दौरान सभी छात्र-छात्राओं और ग्रामीणों ने मिलकर इस मुद्दे को उठाया और स्कूल परिसर में जोरदार विरोध प्रदर्शन व आंदोलन शुरू कर दिया।
इस पूरे हंगामे और छात्रों के विरोध का एक वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो गया। इंटरनेट पर वीडियो आते ही लोगों का गुस्सा भड़क उठा और उन्होंने दोषी शिक्षकों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग शुरू कर दी।
छात्रों और ग्रामीणों के इस उग्र आंदोलन को देखते हुए शिक्षा विभाग तुरंत हरकत में आया। मामले को गंभीरता से लेते हुए विभाग द्वारा आनन-फानन में एक तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया।
विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) ओपी जोशी ने बताया कि छात्राओं द्वारा लगाए गए आचरण संबंधी गंभीर आरोपों और वायरल वीडियो की जांच के लिए टीम स्कूल पहुंची थी, जहां उन्होंने छात्र-छात्राओं के बयान दर्ज किए। जांच रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि होने के बाद जिला प्रशासन के निर्देश पर स्कूल के सभी अतिथि शिक्षक-शिक्षिकाओं को तुरंत प्रभाव से पद से हटा दिया गया है। इसके साथ ही स्कूल में नए शिक्षकों की भर्ती के लिए विज्ञापन भी जारी कर दिया गया है।
यह घटना साबित करती है कि आज के बच्चे गलत के खिलाफ चुप बैठने वाले नहीं हैं। छात्र शक्ति के इस आंदोलन ने शिक्षा के मंदिर की गरिमा को बहाल करने में एक बड़ी मिसाल पेश की है।