23 साल बाद सलाखों के पीछे पहुंचे पूर्व CM के बेटे, हाईकोर्ट ने अमित जोगी को सुनाई उम्रकैद की सजा

Ram Avtar Jaggi Murder Case: हाईकोर्ट ने 2003 में हुए राम अवतार जग्गी हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाते हुए अमीत जोगी को दोषी करार दिया है। अदालत ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
Ram Avtar Jaggi Murder Case
अमित जोगी (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Amit Jogi Convicted: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने 2003 में हुए बहुचर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे और पूर्व विधायक अमीत जोगी को दोषी करार दिया है। अदालत ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला उस समय आया है, जब पहले ट्रायल कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था, जिसे अब हाई कोर्ट ने पलट दिया है।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पिछले महीने दोबारा सुनवाई शुरू की थी। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने 2 अप्रैल को सुनवाई पूरी करते हुए अहम फैसला सुनाया। आदेश की प्रति सोमवार को आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड की गई, जिससे यह मामला फिर सुर्खियों में आ गया।

हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को बताया गलत

दरअसल, हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह साफ कहा कि हमारी यह सुविचारित राय है कि निचली अदालत द्वारा आरोपी  अमित जोगी को बरी करते हुए दिया गया फैसला स्पष्ट रूप से गैर-कानूनी, गलत, विकृत, रिकॉर्ड पर उपलब्ध सबूतों के विपरीत और बिना किसी ठोस आधार के है। आदेश में कहा गया है कि आरोपी अमित जोगी को बरी करने के संबंध में माननीय विशेष न्यायाधीश (अत्याचार) रायपुर द्वारा दिया गया फैसला रद्द किया जाता है।

हत्या का मामला और सजा का प्रावधान

यह मामला राम अवतार जग्गी की 4 जून 2003 को हुई हत्या से जुड़ा है, जब अजित जोगी छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री थे। मामले की शुरुआत में जांच राज्य पुलिस ने की लेकिन बाद में इसे सीबीआई को सौंप दिया गया। सीबीआई ने अमित जोगी समेत कई आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अमित जोगी को भी अन्य दोषियों चिमन सिंह, याह्या ढेबर, अभय गोयल और फिरोज सिद्दीकी की तरह ही सजा मिलनी चाहिए।

आईपीसी की धाराओं के तहत दोषी करार

अदालत ने अमित जोगी को भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश) और धारा 302 (हत्या) के तहत दोषी ठहराया। उन्हें उम्रकैद के साथ 1,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना न देने की स्थिति में 6 महीने की अतिरिक्त कठोर सजा का प्रावधान किया गया है। गौरतलब है कि 31 मई 2007 को रायपुर की निचली अदालत ने 28 आरोपियों के खिलाफ आरोप सिद्ध मानते हुए फैसला सुनाया था लेकिन अमित जोगी को राहत दी गई थी। अब हाईकोर्ट के इस फैसले ने उस पूरे मामले को एक नया मोड़ दे दिया है।

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