

Chhattisgarh BJP Leader Ajay Chandrakar Controversial News : छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। वरिष्ठ भाजपा नेता अजय चंद्राकर का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में वे किसानों के बीच खड़े दिखाई दे रहे हैं।
वीडियो में वे एक अधिकारी के रवैये पर नाराजगी जता रहे हैं। उन्होंने बातचीत के दौरान बेहद तल्ख टिप्पणी की। चंद्राकर ने कहा कि अधिकारी सामने दिखता तो उसे गाड़ देते।
यह बयान सामने आते ही राज्य में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस ने इस मुद्दे को तुरंत भुनाना शुरू कर दिया है।
यह पूरा मामला किसानों से जुड़ा हुआ है। किसान धान की फसल के लिए बांध से पानी मांग रहे थे। इसी मुद्दे पर अजय चंद्राकर किसानों से बात कर रहे थे।
बातचीत के दौरान एक अधिकारी के बयान का जिक्र आया। अधिकारी ने कथित तौर पर किसान आंदोलन को नेतागिरी कहा था। इसी बात पर पूर्व मंत्री बेहद नाराज हो गए।
नाराजगी में उन्होंने अधिकारी के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। हालांकि वीडियो के पूरे संदर्भ को लेकर अलग-अलग दावे हैं।
वीडियो वायरल होते ही कांग्रेस ने भाजपा पर निशाना साधा। कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि अजय चंद्राकर लगातार अभद्र भाषा बोलते हैं।शुक्ला ने कहा कि भाजपा नेतृत्व को इसका संज्ञान लेना चाहिए।
उन्होंने चंद्राकर की मानसिक स्थिति पर सवाल उठाए। शुक्ला ने उन्हें थोड़ा आराम करने की सलाह दी। साथ ही उन्होंने एम्स जाकर जांच कराने की बात भी कही। इस तंज के बाद मामला और अधिक गरमा गया है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि वरिष्ठ नेताओं को संयम रखना चाहिए। ऐसी भाषा का प्रयोग सार्वजनिक जीवन में शोभा नहीं देता। इससे पूरे प्रदेश के राजनीतिक माहौल पर असर पड़ता है। उन्होंने दावा किया कि ऐसे बयान लगातार सामने आ रहे हैं।
भाजपा संगठन को इस पर विचार करना चाहिए। पार्टी को अपने नेताओं को समझाना चाहिए।सार्वजनिक मंचों पर मर्यादित भाषा का प्रयोग होना चाहिए। नेताओं के बयानों से जनता के बीच गलत संदेश जाता है।
सुशील आनंद शुक्ला ने चंद्राकर की स्थिति पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल में जगह न मिलने से वे हताश हैं। इसी हताशा में वे इस तरह के बयान दे रहे हैं।
हालांकि यह कांग्रेस की अपनी राजनीतिक व्याख्या है। दूसरी तरफ चंद्राकर किसानों के हक की बात कर रहे थे। वे अधिकारियों के अडियल रवैये से नाराज थे।
फिलहाल इस मामले में भाजपा की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। चंद्राकर की तरफ से भी विस्तृत सफाई नहीं आई है।
यह मामला ऐसे समय आया है जब किसान परेशान हैं। धान की फसल के लिए पानी की भारी जरूरत है। स्थानीय स्तर पर अधिकारी और किसान आमने-सामने हैं।
ऐसे में नेताओं के बयान आग में घी डाल रहे हैं। अधिकारी और नेताओं के बीच की यह जंग पुरानी है। लेकिन इस बार भाषा की मर्यादा टूटती दिख रही है।
अब देखना होगा कि भाजपा इस पर क्या रुख अपनाती है। क्या पार्टी अपने नेता के बयान का बचाव करेगी? या फिर इस मामले पर चुप्पी साधे रखेगी?