छत्तीसगढ़ की 6 नदियों में बह रहा जहरीला पानी, 11 सीवेज प्लांट की खुली पोल

Chhattisgarh River Pollution News : छत्तीसगढ़ में प्रमुख नदियों को प्रदूषण से बचाने के लिए सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। अब 6 नदियों में गिरने वाले नालों की जीआईएस मैपिंग की जाएगी।
Toxic water flowing in 6 rivers, 11 sewage plants exposed; government issues directive
छत्तीसगढ़ में नदियों का प्रदूषणसोर्स : AI जेनरेट
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Chhattisgarh River Water Pollution : छत्तीसगढ़ में नदियों को बचाने के लिए राज्य सरकार सख्त हो गई है। रिवर रिजुविनेशन कमेटी ने हाल ही में समीक्षा की है। इस बैठक में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। प्रदेश के 11 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट अपनी तय क्षमता से कम काम कर रहे हैं।

संयंत्रों का पूरा उपयोग न होना बेहद चिंता का विषय है। इससे नालों का गंदा पानी सीधे नदियों में बह रहा है। इस स्थिति को सुधारने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।

11 सीवेज संयंत्रों की स्थिति खराब

समीक्षा में पाया गया कि कई बड़े शहरों के संयंत्र सुस्त पड़े हैं। बिलासपुर के कोनी और दोमुहनी के संयंत्र क्षमता से कम चल रहे हैं। गोबरा नवापारा, धमतरी और किरोड़ीमल के संयंत्र भी पूरी क्षमता पर नहीं हैं। चरामा, कांकेर, सिमगा और चांपा में भी स्थिति ठीक नहीं है।

नवा रायपुर अटल नगर के सेक्टर-2, 3 और 4 के संयंत्र भी पिछड़ गए हैं। राज्य में प्रभावित क्षेत्रों में संयंत्रों की संख्या बढ़ाई गई है। अब इनकी संख्या 22 से बढ़ाकर 24 कर दी गई है। इसके बावजूद पुराने संयंत्रों का सही उपयोग नहीं हो पा रहा है।

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6 नदियों के नालों का नक्शा

नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय ने निर्देश दिए हैं। नगर निगम आयुक्तों और मुख्य नगरपालिका अधिकारियों को पत्र भेजा गया है। महानदी, अरपा, खारून, केलो, शिवनाथ और हसदेव के नालों की सूची मांगी गई है।

निकायों को जीआईएस मैपिंग करने को कहा गया है। इससे यह पता चलेगा कि कहां नए संयंत्रों की जरूरत है। जिन नालों पर उपचार संयंत्र नहीं हैं, उनके लिए नई योजना बनेगी।

उद्योगों को शोधित पानी देने का प्लान

उपचारित पानी का सही उपयोग करने के लिए नई तैयारी की जा रही है। इस पानी को बड़े उद्योगों को देने का समझौता हो रहा है। इसके लिए एक विशेष कार्यदल का गठन किया जा रहा है।

इस कार्यदल में उद्योग और नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारी होंगे। साथ ही चिप्स के प्रतिनिधि भी शामिल रहेंगे। आवास एवं पर्यावरण विभाग के तकनीकी अधिकारी भी सहयोग करेंगे। यह टीम संयंत्रों और उद्योगों के स्थानों की मैपिंग करेगी।

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