​बिलासपुर HC से राहत के तीन दिन बाद भूपेंद्र कुलदीप सस्पेंड, HY विश्वविद्यालय में फिर गरमाया कुलसचिव विवाद

Bilaspur High Court: 12 अक्टूबर को निलंबन का आदेश जारी किया। खास बात यह है कि 9 अक्टूबर को ही हाईकोर्ट ने उच्च शिक्षा संचालनालय, रायपुर में अटैच करने के शासन के आदेश को निरस्त कर दिया था।
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कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप सस्पेंड(सोर्स- सोशल मीडिया)
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Durg HYU Registrar Bhupendra Kuldeep Suspended: हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के कुलसचिव भूपेंद्र कुमार कुलदीप को बिलासपुर हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिलने के महज तीन दिन बाद राज्य शासन ने निलंबित कर दिया है। उच्च शिक्षा विभाग ने 12 अक्टूबर को निलंबन का आदेश जारी किया। खास बात यह है कि 9 अक्टूबर को ही छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कुलदीप को उच्च शिक्षा संचालनालय, रायपुर में अटैच करने के शासन के आदेश को निरस्त कर दिया था। इसके बाद कुलदीप विश्वविद्यालय में दोबारा कार्यभार संभालने पहुंचे थे, लेकिन उनके कक्ष में ताला लगा मिला था। अब निलंबन के नए आदेश से विश्वविद्यालय में कुलसचिव पद को लेकर विवाद ने नया मोड़ ले लिया है।

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हाईकोर्ट ने निरस्त किया था अटैचमेंट का आदेश

उच्च शिक्षा विभाग ने 29 सितंबर को भूपेंद्र कुलदीप को हेमचंद यादव विश्वविद्यालय से हटाकर उच्च शिक्षा संचालनालय, नवा रायपुर में अटैच करने का आदेश जारी किया था। इसके साथ ही दुर्ग के शासकीय वीवाईटी पीजी कॉलेज के इतिहास विभाग के प्राध्यापक डॉ. अनिल कुमार पांडेय को प्रभारी कुलसचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

कुलदीप ने शासन के इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। सुनवाई के बाद अदालत ने 9 अक्टूबर को अटैचमेंट का आदेश निरस्त कर दिया। अदालत में शासन ऐसा स्पष्ट वैधानिक प्रावधान प्रस्तुत नहीं कर सका, जिसके आधार पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव को उच्च शिक्षा संचालनालय में अटैच किया जा सके। हालांकि, हाईकोर्ट ने शासन को कानून के दायरे में नया आदेश जारी करने की छूट दी थी।

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राहत के बाद ज्वाइनिंग देने पहुंचे, कक्ष में मिला था ताला

हाईकोर्ट से राहत मिलने के अगले दिन भूपेंद्र कुलदीप विश्वविद्यालय में कार्यभार ग्रहण करने पहुंचे थे, लेकिन उनके आवंटित कक्ष में ताला लगा मिला। विश्वविद्यालय प्रशासन ने शासन स्तर से नया आदेश नहीं होने का हवाला देते हुए उन्हें ज्वाइनिंग नहीं दी। इस घटनाक्रम के बाद कुलदीप के अधिवक्ता ने अदालत की अवमानना याचिका दायर करने की चेतावनी भी दी थी।

अब 12 अक्टूबर को शासन ने कुलदीप को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया। इस घटनाक्रम ने हाईकोर्ट से मिली राहत और उसके बाद शासन की कार्रवाई को लेकर विश्वविद्यालय के प्रशासनिक विवाद को फिर सुर्खियों में ला दिया है।

वित्तीय अनियमितताओं समेत कई आरोप

निलंबन की कार्रवाई के पीछे कुलदीप के खिलाफ सामने आए विभिन्न आरोपों का भी उल्लेख है। इनमें विश्वविद्यालय की दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी शुभांगी मराठे के वेतन से संबंधित 1,49,384 रुपये उनके बेटे के बैंक खाते में ट्रांसफर होने का मामला शामिल है। इस संबंध में 3 अगस्त 2026 को दुर्ग के मोहन नगर थाने में अपराध दर्ज किया गया था। इसके अलावा शासकीय वाहन के कथित दुरुपयोग, मरम्मत के बिलों में अनियमितता, ओडोमीटर में छेड़छाड़ और फर्जी पीएचडी डिग्री से जुड़े आरोपों की जांच का भी उल्लेख किया गया है।

अब शासन की अगली कार्रवाई पर नजर

निलंबन अवधि में भूपेंद्र कुलदीप का मुख्यालय उच्च शिक्षा संचालनालय, इंद्रावती भवन, अटल नगर, नवा रायपुर निर्धारित किया गया है। उनके खिलाफ विभागीय जांच के लिए अलग से आरोप पत्र जारी किए जाने की बात कही गई है।

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