

एक महीने में दो बार टूटा उत्पादन का रिकॉर्ड।
सालाना उत्पादन में 63% की छलांग।
2023 में 400 एकड़ खेत प्रभावित होने का आरोप।
110 किसान करीब एक करोड़ के कर्ज में।
NMDC Nagarnar Steel Plant Production: बस्तर की धरती पर स्थापित एनएमडीसी के नगरनार स्टील प्लांट की उत्पादन क्षमता लगातार नए कीर्तिमान बना रही है। 3 नवंबर को प्लांट ने महज 24 घंटे में 455 हॉट रोल्ड (एचआर) कॉइल्स का उत्पादन कर अब तक का अपना सर्वाधिक दैनिक उत्पादन रिकॉर्ड कायम किया है। खास बात यह है कि इसी महीने की पहली तारीख को 440 कॉइल्स बनाकर प्लांट ने पिछला रिकॉर्ड बनाया था, जिसे महज दो दिन बाद ही पीछे छोड़ दिया गया। लेकिन उत्पादन की इस चमक के बीच एक दूसरा पहलू भी है। प्लांट के आसपास के गांवों में औद्योगिक अपशिष्ट जल के खेतों तक पहुंचने और फसलें प्रभावित होने की शिकायतें वर्षों से सामने आती रही हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि उत्पादन के बढ़ते आंकड़ों के साथ पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी कितनी प्रभावी ढंग से निभाई जा रही है?
स्टील प्लांट सूत्रों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में नगरनार स्टील प्लांट ने 23,24,902 टन हॉट रोल्ड कॉइल्स का उत्पादन किया। जबकि 2024-25 में यह आंकड़ा 14,38,646 टन था। इस तरह सालाना उत्पादन में करीब 63 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। तीन नवंबर को 455 कॉइल्स का उत्पादन प्लांट की हॉट स्ट्रिप मिल की तकनीकी क्षमता और कर्मचारियों की दक्षता का नया उदाहरण बनकर सामने आया है।
उत्पादन के आंकड़ों के साथ पर्यावरण संबंधी शिकायतों का पुराना सिलसिला भी चर्चा में है। नवंबर 2023 में मंगनपुर और उपनपाल क्षेत्र के किसानों ने आरोप लगाया था कि प्लांट के गेट नंबर-3 से निकलने वाला काला और तेलयुक्त पानी उनके खेतों तक पहुंच रहा है। किसानों ने करीब 200 एकड़ कृषि भूमि में धान की फसल प्रभावित होने और जमीन की उर्वरता पर असर पड़ने की शिकायत की थी।
वहीं जुलाई 2023 में सामने आई एक अन्य रिपोर्ट में किसानों ने करीब 400 एकड़ खेतों के प्रभावित होने का दावा किया था। किसानों का आरोप था कि प्लांट से निकलने वाला दूषित पानी उनकी कृषि भूमि को नुकसान पहुंचा रहा है। दोनों रिपोर्टों के आंकड़े अलग-अलग शिकायतों से संबंधित हैं, इसलिए इन्हें जोड़कर कुल प्रभावित रकबा नहीं माना जा सकता।
यह मामला केवल एक-दो गांवों तक सीमित नहीं रहा। वर्ष 2024 में आसपास की 10 पंचायतों के प्रतिनिधियों ने भी दूषित पानी और कृषि भूमि पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर शिकायतें उठाई थीं। भू-प्रभावितों ने मुआवजे और स्थायी समाधान की मांग को लेकर आंदोलन भी किया था। किसानों की प्रमुख मांग थी कि प्लांट से निकलने वाले पानी को खेतों तक पहुंचने से रोकने के लिए स्थायी व्यवस्था बनाई जाए।
शिकायतों का सिलसिला वर्ष 2026 में भी थमता नजर नहीं आया। जून 2026 में कस्तूरी गांव के किसानों ने नगरनार स्टील प्लांट के कथित काले अपशिष्ट जल के खेतों में फैलने की शिकायत की। सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, करीब 250 एकड़ कृषि भूमि प्रभावित हुई और 110 किसानों की खेती पर संकट खड़ा हो गया। किसानों ने खरीफ फसल की तैयारी के लिए सहकारी समितियों से लगभग एक करोड़ रुपये का कृषि ऋण लिया था। किसानों द्वारा अपने स्तर पर मिट्टी का अस्थायी बांध बनाकर पानी रोकने का प्रयास भी किया गया, लेकिन बारिश के दौरान यह बह गया और पानी फिर खेतों तक पहुंच गया।
किसानों ने प्रशासन से प्रभावित खेतों का सर्वे, मिट्टी और पानी की वैज्ञानिक जांच, फसल नुकसान का मुआवजा और अपशिष्ट जल को खेतों तक पहुंचने से रोकने के लिए स्थायी व्यवस्था बनाने की मांग की थी।
एनएमडीसी स्टील की वार्षिक रिपोर्ट में प्लांट की प्रमुख इकाइयों में एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट, पानी के पुनर्चक्रण के लिए UF-RO ट्रीटमेंट और सेंट्रलाइज्ड जीरो लिक्विड डिस्चार्ज व्यवस्था का उल्लेख है। कंपनी ने प्लांट के आसपास ग्रीन बेल्ट विकसित करने की जानकारी भी दी है। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 139 हेक्टेयर क्षेत्र में ग्रीन बेल्ट विकसित किया जा चुका है और इसे लगभग 240 हेक्टेयर तक ले जाने का लक्ष्य है।
इसके बावजूद किसानों की बार-बार सामने आ रही शिकायतें व्यवस्था की जमीनी प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करती हैं। यदि अपशिष्ट जल के उपचार और पुन: उपयोग की व्यवस्था प्रभावी है तो फिर बारिश के दौरान कथित काला पानी खेतों तक कैसे पहुंच रहा है? क्या इसकी नियमित वैज्ञानिक जांच हो रही है? क्या प्रभावित किसानों को नुकसान का आकलन कर मुआवजा दिया गया है?
नगरनार स्टील प्लांट बस्तर के औद्योगिक विकास की महत्वपूर्ण परियोजना है। इससे रोजगार, कारोबार और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को गति मिलने की उम्मीद है। लेकिन औद्योगिक विकास का लाभ तभी सार्थक होगा, जब आसपास के गांवों की खेती, जलस्रोत और प्राकृतिक पर्यावरण भी सुरक्षित रहें।
अब जरूरत है कि छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल और जिला प्रशासन कस्तूरी, मंगनपुर, उपनपाल सहित शिकायत वाले क्षेत्रों में मिट्टी और पानी के नमूनों की स्वतंत्र वैज्ञानिक जांच कराएं। जांच रिपोर्ट सार्वजनिक हो और यह स्पष्ट किया जाए कि किसानों की शिकायतों में कितनी सच्चाई है तथा अपशिष्ट जल के खेतों तक पहुंचने के कारण क्या हैं। नगरनार प्लांट ने 24 घंटे में 455 कॉइल्स बनाकर उत्पादन का नया इतिहास जरूर रचा है, लेकिन बस्तर के किसानों के लिए असली उपलब्धि तब होगी, जब उनके खेतों तक काला पानी पहुंचने की शिकायतों का स्थायी समाधान भी सामने आएगा।