

दीपावली से पहले बाढ़ पीड़ितों को मिले 10 हजार रुपये।
एक माह बाद भी सरकारी सहायता का इंतजार।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने की है 10 हजार रुपए देने का ऐलान।
गंगरेल बांध में आई बाढ़ ने कई घरों को उजाड़ा।
Gobara Nawapara Flood-affected Family: महानदी की भीषण बाढ़ से तबाह हुए परिवारों को अब तक घोषित सहायता राशि नहीं मिलने पर पूर्व मंत्री धनेन्द्र साहू ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा प्रत्येक बाढ़ प्रभावित परिवार को 10 हजार रुपये देने की घोषणा के बावजूद एक माह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन आज तक प्रभावितों के हाथ एक रुपया भी नहीं पहुंचा है। सरकार की यह कार्यप्रणाली आपदा से जूझ रहे गरीब परिवारों के साथ भद्दा मजाक है।
धनेन्द्र साहू ने कहा कि महानदी में आई भीषण बाढ़ और गंगरेल बांध से अचानक बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण अभनपुर विधानसभा क्षेत्र के गोबरा नवापारा शहर सहित आसपास के 15 से 16 गांवों में भारी नुकसान हुआ था। अकेले गोबरा नवापारा में डेढ़ से दो हजार मकान बाढ़ के पानी में डूब गए थे। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में सैकड़ों किसानों की धान की फसलें प्रभावित हुई थीं।
उन्होंने बताया कि रात लगभग दो बजे अचानक तेजी से बढ़े बाढ़ के पानी ने लोगों को संभलने तक का मौका नहीं दिया। घरों में रखा राशन, कपड़े, बर्तन, फर्नीचर, टीवी, फ्रिज, कूलर सहित घरेलू उपयोग की अनेक वस्तुएं पानी में डूबकर नष्ट हो गईं। कई परिवारों की वर्षों की मेहनत से जुटाई गई गृहस्थी बर्बाद हो गई और उनके सामने रोजमर्रा के जीवनयापन का संकट खड़ा हो गया।
पूर्व मंत्री ने कहा कि प्रभावित परिवारों को राहत दिलाने के लिए धरना-प्रदर्शन भी किया गया था। उस दौरान अनुविभागीय अधिकारी राजस्व ने मौके पर पहुंचकर दो-तीन दिनों के भीतर सहायता राशि देने का आश्वासन दिया था, लेकिन एक माह से अधिक समय गुजरने के बाद भी भुगतान नहीं हुआ। प्रशासन का कहना है कि प्रभावितों का प्रकरण तैयार कर शासन को भेज दिया गया है, लेकिन शासन से राशि जारी नहीं हुई है। ऐसे में गरीब परिवार शासन और प्रशासन के बीच अपनी सहायता के लिए भटकने को मजबूर हैं।
धनेन्द्र साहू ने कहा कि प्रभावित परिवारों को दशहरा से पहले सहायता मिलने की उम्मीद थी, लेकिन त्योहार गुजर गया। अब दीपावली सामने है। जिन परिवारों के घरों का सामान बाढ़ में बर्बाद हो चुका है, वे आर्थिक तंगी के बीच त्योहार मनाने की चिंता में हैं। सरकार ने 10 हजार रुपये देने की घोषणा तो कर दी, लेकिन उसका लाभ कब मिलेगा, यह बताने वाला कोई नहीं है।
उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि दीपावली के पहले सभी पात्र बाढ़ प्रभावित परिवारों को बिना किसी और विलंब के 10 हजार रुपये की सहायता राशि उपलब्ध कराई जाए। इसके साथ ही बाढ़ से प्रभावित किसानों की धान की फसलों का उचित सर्वेक्षण कराकर नियमानुसार पर्याप्त मुआवजा दिया जाए।
धनेन्द्र साहू ने कहा कि सरकार की घोषणाएं केवल मंचों और कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी यदि प्रभावित परिवारों को एक माह से अधिक समय तक सहायता नहीं मिलती है तो यह शासन की संवेदनहीनता को दर्शाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि दीपावली के पहले सहायता राशि का भुगतान नहीं होने पर सरकार के इस रवैये के खिलाफ पुरजोर विरोध किया जाएगा। बाढ़ पीड़ितों को उनका अधिकार दिलाने के लिए संघर्ष जारी रहेगा।