

PhD Stipend : ग्रेजुएशन या मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद रिसर्च के क्षेत्र में करियर बनाने वाले छात्रों के लिए PhD एक अच्छा विकल्प हो सकता है। PhD पूरी करने में विषय और यूनिवर्सिटी के आधार पर कई साल लग सकते हैं। इस दौरान पढ़ाई और रिसर्च का खर्च छात्रों के लिए बड़ी चिंता होती है, लेकिन कई देशों में PhD उम्मीदवारों को स्टाइपेंड या सैलरी दी जाती है।
कई जगह PhD रिसर्चर्स यूनिवर्सिटी के साथ काम करते हुए क्लास लेने, लैब से जुड़े काम करने या रिसर्च प्रोजेक्ट पर काम करने जैसी जिम्मेदारियां भी निभाते हैं। ऐसे में अगर आप विदेश से PhD करने का प्लान बना रहे हैं, तो उस देश की फंडिंग और रहने के खर्च को जरूर देखना चाहिए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार ऑस्ट्रिया, नीदरलैंड, डेनमार्क, फिनलैंड और स्वीडन ऐसे देशों में शामिल हैं, जहां PhD के दौरान आकर्षक फंडिंग मिल सकती है।
इस सूची में ऑस्ट्रिया सबसे ऊपर है। यहां औसत PhD स्टाइपेंड करीब 1,04,328 डॉलर (लगभग 1 करोड़ रुपये) बताई गई है। यहां रहने का औसत खर्च करीब 1,955 डॉलर प्रति माह बताया गया है। PhD के लिए वियना यूनिवर्सिटी, वियना यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, इंसब्रुक यूनिवर्सिटी, मेडिकल यूनिवर्सिटी ऑफ ग्राज और साल्जबर्ग यूनिवर्सिटी जैसे संस्थान विकल्प हो सकते हैं।
इसके बाद नीदरलैंड का नाम आता है, जहां औसत स्टाइपेंड करीब 74,163 डॉलर (लगभग 70.99 लाख रुपये) बताई गई है। एम्स्टर्डम यूनिवर्सिटी, लीडेन यूनिवर्सिटी, ग्रोनिंगन यूनिवर्सिटी, डेल्फ्ट यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी और इरास्मस यूनिवर्सिटी रॉटरडैम यहां प्रमुख विकल्प हैं।
डेनमार्क में औसत PhD स्टाइपेंड करीब 53,436 डॉलर (लगभग 51.14 लाख रुपये) बताई गई है। यहां कोपेनहेगन यूनिवर्सिटी, टेक्निकल यूनिवर्सिटी ऑफ डेनमार्क, आरहूस यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न डेनमार्क जैसे संस्थान हैं। फिनलैंड में औसत स्टाइपेंड करीब 46,537 डॉलर (लगभग 44.54 लाख रुपये) बताई गई है।
हेलसिंकी यूनिवर्सिटी, आल्टो यूनिवर्सिटी और टुर्कू यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों में रिसर्च के अवसर मिल सकते हैं। वहीं स्वीडन में औसत PhD स्टाइपेंड करीब 42,618 डॉलर (लगभग 40.80 लाख रुपये) बताई गई है। चाल्मर्स यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, डलारना यूनिवर्सिटी, हाल्मस्टैड यूनिवर्सिटी और जोंकोपिंग यूनिवर्सिटी जैसे संस्थान विकल्प हैं।
हालांकि, स्टाइपेंड की वास्तविक राशि विषय, यूनिवर्सिटी, फंडिंग मॉडल, टैक्स और कॉन्ट्रैक्ट के अनुसार अलग हो सकती है, इसलिए आवेदन से पहले संबंधित यूनिवर्सिटी की आधिकारिक जानकारी जरूर जांचें।