सुप्रीम कोर्ट पहुंचा Neet PG माइनस कटऑफ का मामला, डॉक्टरों ने जताया विरोध, जानें पूरा मामला
Neet PG Cutoff 2025: मेडिकल कॉलेजों में खाली पीजी सीटों को भरने के लिए कटऑफ को जीरो पर्सेंटाइल और स्कोर को माइनस 40 तक घटाने के फैसले के खिलाफ रेजिडेंट डॉक्टरों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।
- Written By: अर्पित शुक्ला
सुप्रीम कोर्ट (Image- Social Media)
NEET PG Row: देश के मेडिकल कॉलेजों में खाली रह गई पोस्टग्रैजुएट (पीजी) मेडिकल सीटों को भरने के लिए कुछ श्रेणियों में क्वॉलिफाइंग कटऑफ को शून्य पर्सेंटाइल और स्कोर को माइनस 40 तक घटाने के फैसले के खिलाफ रेजिडेंट डॉक्टरों का विरोध तेज होता जा रहा है। डॉक्टरों के संगठन यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) ने इस निर्णय को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की है।
UDF के अध्यक्ष डॉ. लक्ष्य मित्तल और अन्य डॉक्टरों द्वारा दायर याचिका में नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) की ओर से जारी उस नोटिस को चुनौती दी गई है, जिसमें पीजी मेडिकल प्रवेश के लिए न्यूनतम क्वालिफाइंग मानकों में अभूतपूर्व कटौती की गई है।
क्यों घटाई गई कटऑफ?
दरअसल, मेडिकल पीजी कोर्स की करीब 18 हजार सीटें खाली पड़ी हैं और इन्हें भरने के उद्देश्य से कटऑफ में भारी कमी की गई है। हालांकि रेजिडेंट डॉक्टरों का कहना है कि सीटें भरने के नाम पर न्यूनतम योग्यता मानकों को समाप्त करना किसी भी तरह से सही समाधान नहीं है। UDF के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. अरुण कुमार ने कहा कि इससे मेडिकल पेशे में भरोसा कमजोर पड़ेगा और इसका सीधा असर मरीजों को मिलने वाली देखभाल की गुणवत्ता पर होगा।
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कितनी घटाई गई कटऑफ?
सामान्य वर्ग और ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों के लिए क्वॉलिफाइंग कटऑफ 50 पर्सेंटाइल से घटाकर 7 पर्सेंटाइल कर दी गई है। वहीं एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के लिए पर्सेंटाइल 40 से घटा दी गई है। बेंचमार्क दिव्यांगता वाले सामान्य श्रेणी (PwBD) के उम्मीदवारों के लिए कटऑफ 45 से घटाकर 5 पर्सेंटाइल कर दी गई है।
विरोध में क्या तर्क दिए गए?
डॉ. लक्ष्य मित्तल ने कहा कि शून्य या नकारात्मक अंक लाने वाले अभ्यर्थियों को पीजी मेडिकल ट्रेनिंग के लिए योग्य ठहराना न केवल मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता को कमजोर करता है, बल्कि इससे मरीजों की सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।
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स्वास्थ्य मंत्री को लिखा पत्र
इस बीच, फोर्डा ने स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को लिखे पत्र में कहा है कि नीट पीजी की कटऑफ में इस तरह की कटौती से योग्य और मेहनती उम्मीदवारों के साथ अन्याय होगा और पोस्टग्रैजुएट मेडिकल शिक्षा की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचेगा। संगठन ने सरकार से इस फैसले पर दोबारा विचार करने और न्यूनतम क्वालिफाइंग मानकों को बहाल करने की मांग की है।
