फाइल फोटो (Image- Social Media)
Arunachal Pradesh Foundation Day 2026: उगते सूरज की धरती के नाम से प्रसिद्ध अरुणाचल प्रदेश का स्थापना दिवस हर वर्ष 20 फरवरी को मनाया जाता है। 20 फरवरी 1987 को इसे पूर्ण राज्य का दर्जा मिला था। वर्ष 2026 में राज्य अपनी स्थापना के 39 वर्ष पूरे करेगा (40वें वर्ष में प्रवेश)। यह भारत का 24वां राज्य बना था।
पूर्वोत्तर भारत के “सेवन सिस्टर्स” राज्यों में शामिल अरुणाचल प्रदेश अपनी भौगोलिक, सांस्कृतिक और सामरिक महत्ता के लिए जाना जाता है। यहां सूरज की किरणें देश में सबसे पहले पहुंचती हैं और शाम भी अपेक्षाकृत जल्दी हो जाती है।
अरुणाचल प्रदेश को 20 फरवरी 1987 को पूर्ण राज्य का दर्जा मिला। इससे पहले यह केंद्र शासित प्रदेश था और प्रशासनिक रूप से असम के अधीन रहा।
1972 तक इसे North East Frontier Agency (NEFA) यानी उत्तर-पूर्वी सीमांत एजेंसी के नाम से जाना जाता था। 1972 में इसका नाम बदलकर अरुणाचल प्रदेश किया गया और इसे केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया।
क्षेत्रफल: 83,743 वर्ग किमी के साथ यह पूर्वोत्तर का सबसे बड़ा राज्य है।
जनसंख्या घनत्व: यहां प्रति वर्ग किमी लगभग 13–17 लोग ही निवास करते हैं, जो देश में सबसे कम घनत्व वाले क्षेत्रों में से एक है।
वन संपदा: लगभग 82% क्षेत्र वनाच्छादित है।
डोंग गांव: Dong village भारत का वह गांव माना जाता है जहां सूरज की पहली किरण पड़ती है।
जनजातीय विविधता: यहां 26 प्रमुख जनजातियां और लगभग 100 उप-जनजातियां निवास करती हैं, जिनकी अपनी विशिष्ट भाषा और संस्कृति है।
तवांग मठ: Tawang Monastery भारत का सबसे बड़ा और विश्व का दूसरा सबसे बड़ा बौद्ध मठ है।
सबसे ऊंची चोटी: Kangto Peak (ऊंचाई लगभग 7,090 मीटर) राज्य का सर्वोच्च बिंदु है।
अरुणाचल प्रदेश के बारे में यह जानकारी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए उपयोगी है और राज्य से जुड़े सामान्य ज्ञान के प्रश्नों के उत्तर देने में सहायक साबित होगी।