क्या है वो ‘ब्लैक होल’ जो निगल जाएगा 100 लाख करोड़? नितिन कामथ के खुलासे से दलाल स्ट्रीट में हड़कंप
Nithin Kamath: नितिन कामथ ने यह भी बताया कि Zerodha पिछले चार साल से अपना खुद का OMS और RMS सिस्टम बनाने पर काम कर रहा है। लेकिन यह काम जितना जरूरी है, उतना ही खतरनाक भी।
- Written By: मनोज आर्या
नितिन कामथ, (सीईओ, जेरोधा)
Nithin Kamat Warning: भारत की ब्रोकिंग इंडस्ट्री भले ही तेजी से बढ़ रही हो, लेकिन इसके पीछे एक ऐसा जोखिम छिपा है, जिस पर शायद ही निवेशकों की नजर जाती हो। Zerodha के CEO नितिन कामथ ने हाल ही में इस खतरे को सार्वजनिक रूप से सामने रखा है। उनका कहना है कि शेयर ट्रेडिंग का पूरा सिस्टम बेहद संवेदनशील तकनीक पर टिका है और अगर इसमें जरा सी चूक हुई, तो ट्रेडिंग पूरी तरह रुक सकती है।
नितिन कामथ के मुताबिक, ज्यादातर ब्रोकर्स अपने ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म की मुख्य तकनीक खुद कंट्रोल नहीं करते। वे ऑर्डर मैनेजमेंट सिस्टम (OMS) और रिस्क मैनेजमेंट सिस्टम (RMS) के लिए थर्ड पार्टी वेंडर्स पर निर्भर रहते हैं। यही दोनों सिस्टम तय करते हैं कि ऑर्डर कैसे प्रोसेस होगा और निवेशकों का जोखिम कैसे मैनेज किया जाएगा। कामथ ने इन्हें ब्रोकिंग बिजनेस का “दिल” बताया और साफ कहा कि अगर यह सिस्टम फेल हुआ, तो पूरी ट्रेडिंग रुक जाएगी।
ब्रोकिंग इंडस्ट्री में कुछ ही लोगों का दबदबा
कामथ ने बताया कि ब्रोकिंग इंडस्ट्री में कुछ गिने-चुने टेक वेंडर्स का दबदबा है। OmneNest, Kambala, 63 Moons और Rupeeseed जैसे नाम इस क्षेत्र में प्रमुख हैं। अकेले OmneNest करीब 70 फीसदी ब्रोकर्स को सर्विस देता है, जिसमें Zerodha भी शामिल है। यही केंद्रीकरण सबसे बड़ा जोखिम है। अगर किसी वजह से इन वेंडर्स के सिस्टम में तकनीकी खराबी आ गई, तो पूरे बाजार पर असर पड़ सकता है। कामथ के अनुसार, यही कारण है कि एक छोटी सी गड़बड़ी भी बड़े संकट का रूप ले सकती है।
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इंडस्ट्री के लिए सबसे बड़ा खतरा
कामथ ने यह भी बताया कि Zerodha पिछले चार साल से अपना खुद का OMS और RMS सिस्टम बनाने पर काम कर रहा है। लेकिन यह काम जितना जरूरी है, उतना ही खतरनाक भी। लाइव क्लाइंट पोजीशन को एक सिस्टम से दूसरे सिस्टम में शिफ्ट करना किसी उड़ते विमान को हवा में ही दोबारा बनाने जैसा है। एक छोटी गलती से ट्रेड गलत हो सकते हैं, मार्जिन कैलकुलेशन फेल हो सकता है या निवेशक अपनी पोजीशन से बाहर ही न निकल पाएं। इसके अलावा, लगातार बदलते रेगुलेटरी नियम हर बार सिस्टम में नए बदलाव की मांग करते हैं, जो हर बार टूटने का नया खतरा बन जाते हैं।
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नितिन कामथ की चेतावनी से हड़कंप
कुल मिलाकर, नितिन कामथ की यह चेतावनी भारत की तेजी से बढ़ती ब्रोकिंग इंडस्ट्री की उस कमजोर कड़ी को दिखाती है, जिस पर अब तक बहुत कम चर्चा हुई है। निवेशकों को भले ही यह सब दिखाई न दे, लेकिन उनके हर ट्रेड के पीछे यही नाजुक तकनीकी ढांचा काम करता है, जिस पर पूरे बाजार की रफ्तार टिकी हुई है।
