थोक महंगाई में बड़ी गिरावट, 20 महीनें के निचले स्तर पर WPI; आम जनता पर क्या असर
Wholesale Inflation: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत में थोक महंगाई जून में निगेटिव रही, जबकि मई में यह आंकड़ा 0.39 प्रतिशत थी। 20 महीने के बाद यह निगेटिव दर्ज हुआ है।
- Written By: मनोज आर्या
प्रतीकात्मक तस्वीर
Wholesale Inflation June 2025: जून 2025 में देश की थोक महंगाई दर (WPI) -0.13 प्रतिशत रही, जो बीते महीने मई में 0.39 प्रतिशत दर्ज की गई थी। ये पिछले करीब 20 महीनों में पहली बार है जब WPI निगेटिव में गई है। इसका सीधा मतलब है कि थोक स्तर पर सामान की कीमतें पिछले साल के मुकाबले गिर गई हैं, और इसका असर आने वाले समय में रिटेल महंगाई (CPI) पर भी पड़ सकता है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत में थोक महंगाई (WPI) जून में नकारात्मक (-) 0.13 प्रतिशत रही, जबकि मई में यह 0.39 प्रतिशत थी।
अप्रैल 2023 में थोक महंगाई निगेटिव में दर्ज की गई थी। इसी प्रकार कोविड-19 के शुरुआती दिनों में जुलाई 2020 में WPI निगेटिव रही थी। वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि जून 2025 में थोक महंगाई की निगेटिव रेट मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों, खनिज तेलों, मूल धातुओं के निर्माण, कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की कीमतों में कमी के कारण थी।
साल 2023 में 7 महीनों तक निगेटिव रही थे WPI
इससे पहले साल 2023 में थोक मूल्य सूचकांक- आधारित महंगाई लगातार सात महीनों तक नकारात्मक रही। वहीं, थोक मूल्य सूचकांक (WPI)-आधारित महंगाई सितंबर 2022 तक लगातार 18 महीनों तक दोहरे अंकों में रही, उसके बाद इसमें गिरावट आई। अर्थशास्त्री अक्सर कहते हैं कि थोक महंगाई में थोड़ी वृद्धि अच्छी होती है क्योंकि यह आमतौर पर वस्तु निर्माताओं को अधिक उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहित करती है।
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हर महीने 14 तारीख को जारी होती है महंगाई दर
डीपीआईआईटी (DPIIT) हर महीने की 14 तारीख को (या अगले वर्किंग डे, यदि 14 तारीख छुट्टी के दिन हो) संदर्भ माह के दो सप्ताह के अंतराल के साथ भारत में थोक मूल्य सूचकांक मासिक आधार पर जारी करता है, और यह सूचकांक देश भर के संस्थागत स्रोतों और चुनिंदा मैन्युफैक्चरिंग यूनिटों से से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर तैयार किया जाता है। इस बीच,अपनी गिरावट का रुख जारी रखते हुए भारत में कंज्यूमर प्राइस इंफ्लेशन मई में छह साल से भी अधिक के निचले स्तर पर पहुंच गई, जिससे आम लोगों को बड़ी राहत मिली।
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आम जनता पर क्या असर?
थोक महंगाई दर का आम जनता पर सीधा असर पड़ता है, क्योंकि यह खुदरा कीमतों को प्रभावित करता है। जब थोक कीमतें बढ़ती हैं, तो खुदरा विक्रेता अक्सर अपनी कीमतें बढ़ा देते हैं, जिससे आम जनता को अधिक कीमत चुकाना पड़ता है या यह कह सकते हैं कि महंगाई बढ़ जाती है। इसके विपरीत, जब थोक कीमतें घटती हैं, तो खुदरा विक्रेता अपनी कीमतें कम कर सकते हैं, जिससे आम लोगों को राहत मिल सकती है।
