आम आदमी को डबल झटका, 12 महीने के हाई लेवल पर थोक महंगाई; खाने-पीने की चीजों के दाम ने बिगाड़ा बजट
WPI Inflation: मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि फरवरी 2026 में महंगाई के सकारात्मक रहने की वजह मैन्युफैक्चरिंग, गैर-खाद्य उत्पादों, खाद्य उत्पादों और टेक्सटाइल की कीमतों में वृद्धि होना है।
- Written By: मनोज आर्या
थोक महंगाई दर, (कॉन्सेप्ट फोटो)
Wholesale Inflation India February 2026: थोक मूल्य सूचकांक (WPI) पर आधारित महंगाई दर फरवरी में बढ़कर 2.13 प्रतिशत हो गई है। इसके बढ़ने की वजह खाद्य और गैर-खाद्य उत्पादों की कीमतों में इजाफा होना है। यह जानकारी सरकार की ओर से सोमवार को दी गई। थोक महंगाई दर जनवरी में 1.81 प्रतिशत और पिछले साल समान अवधि में यह आंकड़ा 2.45 प्रतिशत था।
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया कि फरवरी 2026 में महंगाई के सकारात्मक रहने की वजह मैन्युफैक्चरिंग, मैन्युफैक्चर ऑफ बेसिक मेटल, गैर-खाद्य उत्पादों, खाद्य उत्पादों और टेक्सटाइल की कीमतों में वृद्धि होना है।
खाद्य उत्पादों में थोक महंगाई दर
आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी में खाद्य उत्पादों में थोक महंगाई दर 2.19 प्रतिशत रही है, जो कि पिछले महीने 1.55 प्रतिशत थी। सब्जियों में थोक महंगाई दर फरवरी में कम होकर 4.73 प्रतिशत रह गई है, जो कि जनवरी में 6.78 प्रतिशत थी। हालांकि, दालों, आलू, अंडे, मांस और मछली की थोक महंगाई दर में फरवरी में पिछले महीने की तुलना में वृद्धि देखी गई।
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मैन्युफैक्चरिंग उत्पादों में भी बढ़ोतरी
मैन्युफैक्चरिंग उत्पादों में फरवरी में थोक महंगाई दर पिछले महीने के 2.86 प्रतिशत से बढ़कर 2.92 प्रतिशत हो गई। गैर-खाद्य पदार्थों की श्रेणी में महंगाई दर जनवरी के 7.58 प्रतिशत से बढ़कर फरवरी में 8.80 प्रतिशत हो गई। फ्यूल और पावर बास्केट में थोक महंगाई सालाना आधार नकारात्मक बनी हुई है। फरवरी में यह -3.78 प्रतिशत थी, जो कि जनवरी में -4.01 प्रतिशत थी।
फरवरी में खुदरा महंगाई भी बढ़ा
बीते शुक्रवार को सरकार द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, भारत में खुदरा महंगाई दर फरवरी में 3.21 प्रतिशत रही है, जो कि जनवरी की महंगाई दर 2.74 प्रतिशत से 0.47 प्रतिशत अधिक है। सरकार की ओर से जारी किए गए डेटा के मुताबिक, फरवरी में ग्रामीण इलाकों में खुदरा महंगाई दर 3.37 प्रतिशत रही है, जो कि जनवरी में 2.73 प्रतिशत थी।
वहीं, शहरी इलाकों में फरवरी में खुदरा महंगाई दर 3.02 प्रतिशत रही है, जो कि शहरी इलाकों में 2.75 प्रतिशत थी। खाद्य महंगाई दर फरवरी में 3.47 प्रतिशत रही है। इस दौरान ग्रामीण इलाकों में खाद्य महंगाई दर 3.46 प्रतिशत और शहरी इलाकों में 3.48 प्रतिशत रही है।
WPI का आम जनता पर क्या असर?
थोक महंगाई के लंबे समय तक बढ़े रहने से ज्यादातर प्रोडक्टिव सेक्टर पर इसका बुरा असर पड़ता है। अगर थोक मूल्य बहुत ज्यादा समय तक ऊंचे स्तर पर रहता है तो प्रोड्यूसर इसका बोझ कंज्यूमर्स पर डाल देते हैं। सरकार केवल टैक्स के जरिए WPI को कंट्रोल कर सकती है।
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जैसे कच्चे तेल में तेज बढ़ोतरी की स्थिति में सरकार ने ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी कटौती की थी। हालांकि, सरकार टैक्स कटौती एक सीमा में ही कम कर सकती है। WPI में ज्यादा वेटेज मेटल, केमिकल, प्लास्टिक, रबर जैसे फैक्ट्री से जुड़े सामानों का होता है।
