Budget 2026: देश की अर्थव्यवस्था का असली आइना! बजट से ठीक एक दिन पहले ‘आर्थिक सर्वे’ क्यों पेश करती है सरकार?
Budget 2026: इकोनॉमिक सर्वे तीन हिस्सों में बना है। आर्थिक सर्वेक्षण का पहला हिस्सा मुख्य इकोनॉमिक मुद्दों का पूरा रिव्यू और चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर का नजरिया बताता है।
- Written By: मनोज आर्या
आर्थिक सर्वेक्षण 2026, ( डिजाइन फोटो/ नवभारत लाइव)
What Is Economic Survey: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार, (1 फरवरी) को संसद में केंद्रीय बजट 2026 पेश करेंगी। बजट में इस बात की जानकारी दी जाती है कि केंद्र सरकार आने वाले फाइनेंशियल ईयर में पैसा कैसे जुटाएगी और उसे कहां-कहां खर्च करेगी। बजट से पहले वित्त मंत्रालय आर्थिक सर्वेक्षण यानी की इकोनॉमिक सर्वे (Economic Survey) पेश करता है, जिसमें देश की अर्थव्यवस्था की स्थिति और रुझानों की समीक्षा की जाती है।
आर्थिक सर्वेक्षण हर साल तैयार की जाने वाली एक रिपोर्ट है, जिसे वित्त मंत्रालय के तहत आर्थिक कार्य विभाग तैयार करता है। इसमें मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) की अहम भूमिका होती है। यह रिपोर्ट पिछले एक साल में देश की अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन का आकलन करती है और कृषि, उद्योग, सर्विस सेक्टर, निर्यात और रोजगार जैसे अहम क्षेत्रों की समीक्षा करती है।
सरकार के लिए आर्थिक सर्वेक्षण क्यों जरूरी?
बजट जहां सरकार की आय और खर्च की योजना बताता है, वहीं आर्थिक सर्वेक्षण एक तरह की समीक्षा और मार्गदर्शक दस्तावेज होता है। इसमें आंकड़े, तथ्य, रुझान और आने वाले साल के अनुमान शामिल होते हैं। इसके साथ ही, इसमें अर्थव्यवस्था की चुनौतियों, उपलब्धियों और सुधारों के सुझाव भी दिए जाते हैं, जिनका इस्तेमाल बजट बनाते समय किया जा सकता है।
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बजट से पहले क्यों पेश होता है आर्थिक सर्वेक्षण?
आमतौर पर आर्थिक सर्वेक्षण केंद्रीय बजट से एक दिन पहले संसद में रखा जाता है। इसके पीछे कई कारण होते हैं।
- नीति निर्धारण में मदद: सर्वेक्षण अर्थव्यवस्था की स्थिति बताता है और उन क्षेत्रों की पहचान करता है जहां सुधार या ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। इससे सरकार को टैक्स, खर्च और आर्थिक नीतियों पर फैसले लेने में मदद मिलती है।
- वहीं नीतियों की वजह समझाना: यह अर्थव्यवस्था की उपलब्धियों और चुनौतियों को सामने रखता है, जिससे बजट में प्रस्तावित नीतियों और खर्च की वजह समझ में आती है।
- पारदर्शिता: इससे संसद और आम जनता को सरकार के आर्थिक दृष्टिकोण की जानकारी मिलती है, जैसे विकास दर, वित्तीय स्थिति, महंगाई, रोजगार और विभिन्न क्षेत्रों का प्रदर्शन।
- चर्चा को बढ़ावा: बजट से पहले विशेषज्ञों, विपक्ष और मीडिया को अर्थव्यवस्था पर चर्चा का मौका मिलता है। कई बार ये चर्चाएं बजट प्रस्तावों को प्रभावित भी कर सकती हैं।
आर्थिक सर्वेक्षण की प्रमुख विशेषताएं
- जीडीपी विकास दर, महंगाई, राजकोषीय घाटा और चालू खाता संतुलन जैसे मैक्रो-आर्थिक संकेतकों का विश्लेषण।
- कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र जैसे विभिन्न सेक्टरों के प्रदर्शन की समीक्षा।
- स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसे सामाजिक और विकास से जुड़े पहलुओं पर चर्चा।
- सुधारों और निवेश से जुड़े नीति सुझाव, जो सरकार की प्राथमिकताओं को दर्शाते हैं।
- जटिल आर्थिक रुझानों को आसान भाषा में समझाने के लिए आंकड़ों, चार्ट और विश्लेषण का उपयोग।
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तीन हिस्सों में बना है इकोनॉमिक सर्वे
इकोनॉमिक सर्वे तीन हिस्सों में बना है, हर हिस्सा भारत की इकोनॉमी के बारे में कीमती जानकारी देता है। पहला हिस्सा मुख्य इकोनॉमिक मुद्दों का पूरा रिव्यू और चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर का नजरिया बताता है। दूसरा हिस्सा सेक्टर-वाइज डेटा पर फोकस करता है। वहीं, तीसरा पार्ट बड़े इकोनॉमिक नंबरों पर बात करता है, जिसमें नेशनल इनकम, प्रोडक्शन, एम्प्लॉयमेंट, इन्फ्लेशन, बैलेंस ऑफ़ ट्रेड और एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट ट्रेंड जैसे एरिया शामिल हैं, जिससे इकोनॉमी की पूरी तस्वीर मिलती है।
