Budget 2026: उद्योग जगत को बड़ी घोषणाओं से ज्यादा नीति स्थिरता और टैक्स स्पष्टता की उम्मीद
Policy Stability Demands: बजट 2026 को लेकर उद्योग जगत बड़ी घोषणाओं के बजाय नीति स्थिरता और टैक्स स्पष्टता की मांग कर रहा है। सर्वे के अनुसार कंपनियां सरल नियमों और मध्यम अवधि के विकास पर केंद्रित हैं।
- Written By: प्रिया सिंह
बजट 2026 से उद्योग जगत की उम्मीदें (सोर्स-सोशल मीडिया)
Stable Tax Policy Framework: उम्मीद है कि आने वाला यूनियन बजट 2026-27 ग्लोबल अनिश्चितताओं के बीच भारत के मिड-टर्म आर्थिक विजन का संकेत देगा। इंडस्ट्री लीडर्स लॉन्ग-टर्म ग्रोथ और निवेशकों का भरोसा बनाए रखने के लिए एक स्थिर टैक्स पॉलिसी फ्रेमवर्क की वकालत कर रहे हैं। ग्रांट थॉर्नटन सर्वे के अनुसार, कंपनियां अस्थायी वित्तीय उपायों के बजाय एक्सपोर्ट इंसेंटिव पर स्पष्टता चाहती हैं। सरकार मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च बनाए रखते हुए 4.4 प्रतिशत के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को हासिल करना चाहती है।
नीतिगत स्थिरता की मांग
ग्रांट थॉर्नटन भारत के ‘प्री-बजट सर्वे 2026’ के अनुसार अब कंपनियां बड़ी घोषणाओं से ज्यादा नीतियों की दिशा और निरंतरता पर ध्यान दे रही हैं। दुनिया भर में बढ़ती अनिश्चितता के बीच भारतीय उद्योग जगत चाहता है कि सरकार राजकोषीय घाटे को धीरे-धीरे कम करने की अपनी योजना पर कायम रहे। सरकार का लक्ष्य वित्तीय वर्ष 2026 तक घाटे को देश की कुल GDP के लगभग 4.4 प्रतिशत के स्तर तक लाने का निर्धारित किया गया है।
आर्थिक विकास और रोजगार
अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026 में भारत की अर्थव्यवस्था 6.5 से 7 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी जो वैश्विक स्तर पर एक मजबूत संकेत है। सर्वे में शामिल 35 प्रतिशत लोगों का मानना है कि बजट में विकास और रोजगार को सबसे अधिक प्राथमिकता दी जानी चाहिए भले ही घाटा कम हो। केंद्र सरकार का पूंजीगत खर्च अब वित्त वर्ष 2020 की तुलना में तीन गुना से ज्यादा हो चुका है जो बुनियादी ढांचे के विकास को दर्शाता है।
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टैक्स और निर्यात सुधार
करीब 44 प्रतिशत नौकरीपेशा करदाताओं का मानना है कि कम टैक्स दरें या ज्यादा टैक्स स्लैब नई कर व्यवस्था को पहले से अधिक आकर्षक बना सकते हैं। व्यापार के मोर्चे पर 40 प्रतिशत लोगों ने एक सरल और भरोसेमंद निर्यात प्रोत्साहन व्यवस्था को विकास के लिए सबसे जरूरी कदम करार दिया है। कंपनियां चाहती हैं कि प्रमुख देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) जल्द पूरे हों ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की पहुंच और बेहतर हो सके।
निवेश और बुनियादी ढांचा
लंबे समय के निवेश के लिए लगभग 41 प्रतिशत लोगों ने इनविटेशनल इन्वेस्टमेंट्स (इनविट्स), रीइट्स और इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड के लिए स्थिर टैक्स व्यवस्था की मांग की है। नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण को 43 प्रतिशत उद्योगपतियों ने सबसे बड़ी प्राथमिकता बताया है जिसके बाद शहरी ढांचा और परिवहन का स्थान आता है। विदेशी फंडिंग की मंजूरी प्रक्रिया को आसान करने और PPP परियोजनाओं में टैक्स स्पष्टता लाने पर भी सर्वे में विशेष रूप से जोर दिया गया है।
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नियमों का सरलीकरण
सर्वे के अनुसार 40 प्रतिशत उद्योगों ने लाइसेंस प्रक्रिया और नियमों को सरल बनाने को व्यापार करने की आसानी के लिए सबसे जरूरी कदम माना है। टैक्स विवादों के जल्दी समाधान के लिए उद्योग जगत स्पष्ट नियम चाहता है ताकि कंपनियों को कानूनी उलझनों से राहत मिल सके और काम सुचारू रहे। कंपनियां चाहती हैं कि कस्टम्स के नियम अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार हों और जरूरी कच्चे माल पर लगने वाले शुल्क में प्रभावी कमी की जाए।
Frequently Asked Questions
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Que: वित्त वर्ष 2026 के लिए भारत की GDP विकास दर का क्या अनुमान है?
Ans: सूत्रों के अनुसार वित्त वर्ष 2026 में भारत की अर्थव्यवस्था 6.5 से 7 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान लगाया गया है।
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Que: सरकार का राजकोषीय घाटे को लेकर क्या लक्ष्य है?
Ans: केंद्र सरकार का लक्ष्य राजकोषीय घाटे को धीरे-धीरे कम करते हुए GDP के करीब 4.4 प्रतिशत के स्तर तक लाने का है।
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Que: नौकरीपेशा करदाताओं की नई टैक्स व्यवस्था से क्या उम्मीदें हैं?
Ans: लगभग 44 प्रतिशत करदाताओं का मानना है कि कम टैक्स दरें या ज्यादा टैक्स स्लैब नई व्यवस्था को और अधिक आकर्षक बना सकते हैं।
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Que: उद्योग जगत ने निवेश के लिए किस तरह की टैक्स व्यवस्था की मांग की है?
Ans: करीब 41 प्रतिशत लोगों ने इनविट्स, रीइट्स और इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड जैसे दीर्घकालिक निवेशों के लिए एक स्थिर टैक्स व्यवस्था की मांग की है।
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Que: व्यापार के मोर्चे पर सर्वे में सबसे जरूरी कदम क्या बताया गया है?
Ans: सर्वे के अनुसार 40 प्रतिशत लोगों ने सरल और भरोसेमंद निर्यात प्रोत्साहन व्यवस्था को व्यापार के लिए सबसे जरूरी कदम माना है।
