ट्रंप के टैरिफ को मिलेगा मोदी का करारा जवाब, सीतारमण ने सेट कर दिए समीकरण, बजट में बड़ा दांव खेलेगी सरकार?

Union Budget 2026-27: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण मोदी सरकार का 15वां बजट पेश करने जा रही है। बजट ऐसे समय में पेश हो रहा है जब देश की अर्थव्यवस्था बाहरी दबावों और अंदरूनी चुनौतियों से जूझ रही है।
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Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण केंद्र की मोदी सरकार का 15वां बजट पेश करने जा रही है। यह बजट ऐसे समय में पेश हो रहा है जब देश की अर्थव्यवस्था बाहरी दबावों और अंदरूनी चुनौतियों दोनों का सामना कर रही है। बढ़ते वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, कुछ भारतीय उत्पादों पर अमेरिका द्वारा लगाए गए भारी टैरिफ और राजस्व पर दबाव के बीच आर्थिक गति को बढ़ाए रखना और राजकोषीय संतुलन हासिल करना सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा रविवार को पेश किया जाने वाला यह बजट एक ऐसे वित्तीय वर्ष के लिए होगा, जिसमें टैक्स कटौती से सरकारी खजाने पर लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ने की उम्मीद है। इससे सरकार के लिए GDP के अनुपात में सरकारी खर्च को सीमित करना ज़रूरी हो जाता है।

आखिर क्या है सरकार का असली लक्ष्य?

सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष के लिए GDP के लगभग 4.4 प्रतिशत का राजकोषीय घाटे का लक्ष्य रखा है। यह साफ तौर पर दिखाता है कि सरकार अब बड़े पैमाने पर लोकलुभावन खर्च के बजाय संरचनात्मक सुधारों की ओर बढ़ना चाहती है। जो कि दीर्घकालिक समाधानों के लिए महत्वपूर्ण है।

जानिए क्या कुछ है पीएम मोदी की मंशा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही यह साफ कर चुके हैं कि देश अल्पकालिक समस्याओं से हटकर दीर्घकालिक समाधानों की ओर बढ़ रहा है। ऐसे समाधान न केवल स्थिरता लाते हैं बल्कि वैश्विक विश्वास भी बढ़ाते हैं। सरकार का मानना ​​है कि अगले पच्चीस साल भारत के लिए महत्वपूर्ण होंगे, जो देश को एक विकसित राष्ट्र बनाने की नींव रखेंगे।

निजी निवेश के लिए क्या कर रही सरकार?

पिछले कुछ महीनों में केंद्र सरकार ने निजी निवेश और घरेलू मांग को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इनमें उपभोग और आय पर टैक्स में राहत, श्रम कानूनों में बदलाव और परमाणु ऊर्जा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को धीरे-धीरे खोलना शामिल है। उम्मीद है कि बजट में इन सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए और कदम उठाए जा सकते हैं।

कैसी नीतियों पर है सरकार का फोकस?

सरकार का ध्यान ऐसी नीतियां बनाने पर है जो निजी क्षेत्र को निवेश करने और रोजगार सृजन में तेजी लाने के लिए प्रोत्साहित करें। सीधे सरकारी खर्च के सीमित दायरे को देखते हुए नीतिगत सुधार अर्थव्यवस्था को सहारा देने के मुख्य साधन के रूप में उभर रहे हैं। मोदी सरकार एक बार फिर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को अर्थव्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ बनाने की कोशिश कर रही है। इस दिशा में पिछले प्रयासों से मनचाहे नतीजे नहीं मिले हैं।

रक्षा उत्पादन में आसान किए जाएंगे नियम

अब एक तीसरी बड़ी पहल की तैयारी की जा रही है। इसके लिए सरकार नियमों को आसान बनाकर और प्रोत्साहन देकर उद्योगों को आकर्षित करने पर ध्यान केंद्रित करेगी। इसके साथ ही रक्षा उत्पादन क्षेत्र में निवेश नियमों को भी आसान बनाए जाने की संभावना है। सरकार चाहती है कि भारत न केवल अपनी ज़रूरतों को पूरा करे बल्कि रक्षा उपकरणों का एक प्रमुख निर्यातक भी बने।

राजकोषीय अनुशासन से समझौता नहीं

आने वाले वित्तीय वर्ष में केंद्र सरकार की कुल उधारी सोलह लाख करोड़ रुपये से सोलह लाख अस्सी हजार करोड़ रुपये के बीच रहने का अनुमान है, जो चालू वर्ष से अधिक है। हालांकि, सरकार यह मैसेज देने की कोशिश करेगी कि उधार बढ़ने के बावजूद राजकोषीय अनुशासन से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

ट्रंप के टैरिफ की 'काट' खोज रहा भारत

कुछ भारतीय प्रोडक्ट्स पर अमेरिका द्वारा लगाए गए ऊंचे टैरिफ के असर को कम करने के लिए भारत दूसरे रास्ते तलाश रहा है। इस संबंध में यूरोपीय संघ के साथ ऐतिहासिक व्यापार समझौते जैसे कदम बहुत ज़रूरी माने जा रहे हैं। सरकार का मानना ​​है कि बाजारों में विविधता लाने से एक्सपोर्ट को स्थिर करने में मदद मिलेगी।

कुल मिलाकर बजट 2026 बड़े ऐलान करने के बजाय पॉलिसी के संकेत देने और सुधारों की दिशा तय करने पर ज्यादा फोकस करेगा। खर्च करने की सीमित क्षमता को देखते हुए सरकार इस बात पर ध्यान देगी कि विश्वास, स्थिरता और सुधारों के जरिए अनिश्चित वैश्विक स्थितियों से भारतीय अर्थव्यवस्था की रक्षा कैसे की जाए।

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