अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Trump Tariff War Impact Indian Pharma: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक ताजा बयान ने भारतीय फार्मास्युटिकल उद्योग में खलबली मचा दी है। ट्रंप ने संकेत दिया है कि अमेरिका में आयात की जाने वाली विदेशी दवाओं पर 100% तक का भारी-भरकम टैरिफ लगाया जा सकता है। इस खबर के सामने आते ही भारतीय शेयर बाजार में फार्मा सेक्टर के प्रति निवेशकों का सेंटिमेंट बिगड़ गया और प्रमुख दवा कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई।
गुरुवार, 2 अप्रैल को बाजार खुलते ही निवेशकों में घबराहट देखी गई। निफ्टी फार्मा इंडेक्स करीब 2.5% तक लुढ़क गया। सबसे ज्यादा असर दिग्गज कंपनी सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज पर पड़ा, जिसके शेयर 4-5% तक टूटकर अपने 52 हफ्तों के निचले स्तर के करीब पहुंच गए। इसके अलावा, डिविस लैबोरेटरीज, बायोकॉन, ल्यूपिन, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, सिपला और ज़ायडस लाइफसाइंसेज जैसी बड़ी कंपनियों के शेयरों में भी 2% से 5% तक की गिरावट दर्ज की गई।
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप का प्राथमिक उद्देश्य अमेरिका में घरेलू विनिर्माण और रोजगार को बढ़ावा देना है। ट्रंप का तर्क है कि यदि विदेशी दवा कंपनियां अमेरिका की धरती पर उत्पादन नहीं करती हैं तो उन्हें अमेरिकी बाजार में प्रवेश के लिए भारी करों का भुगतान करना होगा। यह कदम उनकी ‘मेड इन अमेरिका’ नीति का हिस्सा है जिससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने की योजना है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार में जो गिरावट देखी जा रही है वह मुख्य रूप से सेंटिमेंट यानी धारणा पर आधारित है। भारत से अमेरिका को होने वाले दवा निर्यात का एक बड़ा हिस्सा (90% से अधिक) जेनरिक दवाओं का है। विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रंप का मुख्य फोकस ब्रांडेड और पेटेंट वाली दवाओं पर टैरिफ लगाना है जबकि जेनरिक दवाएं फिलहाल इस रडार से बाहर मानी जा रही हैं।
हालांकि, सन फार्मा जैसी कंपनियां जो अमेरिका में स्पेशलिटी और ब्रांडेड दवाएं भी बेचती हैं उन पर दबाव अधिक देखा गया है। वहीं, डिविस लैबोरेटरीज और लॉरस लैब्स जैसी कंपनियां जो एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (API) का निर्यात करती हैं उनमें भी कमजोरी नजर आई है।
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एक सकारात्मक पहलू यह भी है कि कई भारतीय कंपनियां पहले से ही अमेरिका में अपनी उपस्थिति मजबूत कर रही हैं। उदाहरण के तौर पर, बायोकॉन ने हाल ही में न्यू जर्सी में अपनी यूनिट शुरू की है। भारत हर साल अमेरिका को करीब 10.5 अरब डॉलर की दवाओं का निर्यात करता है।
जानकारों का कहना है कि यदि भारतीय कंपनियां अपनी रणनीतियों में बदलाव करती हैं और अमेरिका में स्थानीय विनिर्माण बढ़ाती हैं तो वे इस टैरिफ नीति के प्रभाव को कम कर सकती हैं। फिलहाल, निवेशकों को घबराने के बजाय नीति के आधिकारिक रूप से लागू होने का इंतजार करना चाहिए।