सिर्फ नाम ही नहीं…ये है ‘VB-G RAM G’ के विरोध का असली कारण? NDA के अंदर भी उठे बगावती सुर
'VB-G RAM G' Bill 2025: पुराने मनरेगा कानून में ग्रामीण परिवारों को साल में कम से कम 100 दिनों के अकुशल काम की गारंटी दी जाती थी। नए VB-GRAM G बिल में इस सीमा को बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है।
- Written By: मनोज आर्या
'वीबी-जी राम जी' बिल लोकसभा से पास, (डिजाइन फोटो/ नवभारत लाइव)
‘VB-G RAM G’ Bill Passed From Lok Sabha: नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ग्रामीण भारत के लिए रोजगार की नई व्यवस्था ‘विकसित भारत – रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटी विधियेक, 2025 लाने जा रही है। यह नया कानून 20 साल पुराने मनरेगा (MGNREGA) की जगह लेका। नए कानून का मकदस न केवल रोजगार देना है, बल्कि गांवों के ढांचे को आधुनिक और विकसित भारत के विजन के साथ जोड़ना है।
इसमें टेक्नोलॉजी का भी इस्तेमाल होगा और काम के दिनों को बढ़ाकर ग्रामीण परिवारों को बड़ी राहत दी गई है। हालांकि, इसमें कुछ ऐसे भी बदलावों को शामिल किए गए, जिसको लेकर एनडीए के सहयोगी दलों ने भी विरोध किया है। आइए सबकुछ विस्तार से जानते हैं।
मनरेगा और ‘VB-G RAM G’ में अंतर
पुराने मनरेगा कानून में ग्रामीण परिवारों को साल में कम से कम 100 दिनों के अकुशल काम की गारंटी दी जाती थी। नए VB-GRAM G बिल में इस सीमा को बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य को हासिल करना है। जहां पुराना कानून सिर्फ रोजगार पैदा करने पर ध्यान देता था, वहीं नया बिल गांवों को समृद्ध, सशक्त और हर मुसीबत से लड़ने के लिए तैयार (लचीला) बनाने पर केंद्रित है।
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केंद्र और राज्यों के बीच बंटेगा खर्चा
मनरेगा में मजदूरी का पूरा 100% खर्च केंद्र उठाता था, लेकिन नए कानून में राज्यों की हिस्सेदारी बढ़ जाएगी। पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों के लिए केंद्र-राज्य का खर्च 90:10 के अनुपात में होगा। वहीं अन्य राज्यों में अब 60:40 का फार्मूला लागू होगा। इसका मतलब है कि राज्यों को भी अब योजना के लिए 40% पैसा खर्च करना होगा। हालांकि, बिना विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों का पूरा खर्च केंद्र ही उठाएगा। यहीं वो बदलाव है, जिसको लेकर एनडीए के सहयोगी दल विरोध कर रहे हैं। चंद्रबाबू नायडू के पार्टी ने भी इसको लेकर असजह महसूस कर रही है।
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शिकायत और भत्ते के नियम
अगर किसी व्यक्ति को काम मांगने के 15 दिनों के भीतर रोजगार नहीं मिलता, तो वह बेरोजगारी भत्ते का हकदार होगा। पहले 30 दिनों के लिए मजदूरी का एक-चौथाई हिस्सा और उसके बाद आधा हिस्सा भत्ता मिलेगा। शिकायत दूर करने के लिए ब्लॉक और जिला स्तर पर एक मजबूत सिस्टम बनेगा, जहां अधिकारियों को हर हफ्ते एक निश्चित दिन जनता की समस्याएं सुनने के लिए मौजूद रहना होगा।
