

Cryptocurrency In Budget 2026: जैसे-जैसे केंद्रीय बजट 2026-27 की तारीख नजदीक आ रही है, भारत के क्रिप्टो निवेशक और वेब3 (Web3) स्टार्टअप्स एक ही सवाल पूछ रहे हैं, क्या इस बार वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) पर लगने वाले भारी-भरकम टैक्स में कोई कटौती होगी? बजट 2024 में लागू किए गए सख्त नियमों के बाद से ही क्रिप्टो इंडस्ट्री लगातार टैक्स सुधारों की मांग कर रही है।
वर्तमान समय में भारत में क्रिप्टोकरेंसी से होने वाली आय पर 30% का फ्लैट टैक्स लगता है। इसके अलावा हर ट्रांजैक्शन पर 1% टीडीएस (Tax Deducted at Source) काटा जाता है। वहीं, आप एक कॉइन में हुए नुकसान को दूसरे कॉइन के मुनाफे से भरपाई (Offset) नहीं कर सकते। माइनिंग या इंफ्रास्ट्रक्चर के खर्च को लागत के रूप में नहीं घटाया जा सकता।
इंडस्ट्री विशेषज्ञों और ‘भारत वेब3 एसोसिएशन’ का सुझाव है कि क्रिप्टोकरेंसी को सट्टेबाजी (जैसे जुआ या लॉटरी) की श्रेणी से हटाकर ‘पूंजीगत संपत्ति’ (Capital Assets) माना जाए। मांग है कि टैक्स की दर को घटाकर 20% किया जाए या इसे अन्य संपत्तियों की तरह इनकम स्लैब के अनुसार रखा जाए।
Mudrex के सीईओ Edul Patel का कहना है कि क्रिप्टो अपनाने में भारत दुनिया के लीडर्स में से एक बना हुआ है, जो डिजिटल एसेट्स में भारतीय इन्वेस्टर्स की मजबूत और बढ़ती दिलचस्पी को दिखाता है। हालांकि, 2022 के यूनियन बजट ने इस सेक्टर को बहुत जरूरी पहचान दिलाई, लेकिन कुछ उपायों, खासकर ट्रांजैक्शन पर 1% TDS ने ट्रेडिंग एक्टिविटी को ऑफशोर प्लेटफॉर्म पर धकेल दिया, जिससे घरेलू इकोसिस्टम में विजिबिलिटी और पार्टिसिपेशन कम हो गया। नुकसान को मुनाफे के बदले सेट ऑफ करने पर रोक ने भी इन्वेस्टर्स का मूड खराब किया है।
Edul Patel ने आगे कहा कि जैसे-जैसे हम FY27 के यूनियन बजट के नजदीक पहुंच रहे हैं, ज्यादा बैलेंस्ड और आगे की सोच वाला तरीका अपनाने का मौका है। TDS को 0.1% तक कम करने और नुकसान की भरपाई की इजाजत देने से इन्वेस्टर्स के लिए दिक्कत कम होगी, ट्रांसपेरेंसी बढ़ेगी और भारत की क्रिप्टो इंडस्ट्री की लंबे समय तक चलने वाली, टिकाऊ ग्रोथ को सपोर्ट मिलेगा।