गौतम अडानी और अनिल अग्रवाल, (सोर्स- सोशल मीडिया)
Supreme Court Vedanta vs Adani Jaypee Associates: अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांता को सुप्रीम कोर्ट में झटका लगा है। कोर्ट ने जेपी ग्रुप की कंपनी जयप्रकाश एसोसिएट्स के लिए अडानी ग्रुप के रिजॉल्यूशन प्लान पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही इस कंपनी के लिए NCLT ने अडानी एंटरप्राइजेज के 14,500 करोड़ रुपये के रिजॉल्यूशन प्लान मंजूर कर दिया था। लेकिन अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांता ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी और इस टेकओवर पर रोक लगाने की मांग की थी।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने इन मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मामले की अंतिम सुनवाई एनसीएलएटी में 10 अप्रैल को होनी है, इसलिए इसमें हस्तक्षेप का कोई कारण नहीं है। साथ ही कोर्ट ने ट्रिब्यूनल से इस मामले की सुनवाई आउट ऑफ टर्न बेसिस पर करने को कहना है। कोर्ट का कहना है कि अगर एक दिन में दलीलें पूरी नहीं होती हैं तो अगले कार्यदिवस पर सुनवाई जारी रहनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही कहा कि अगर मॉनीटरिंग कमेटी कोई बड़ा नीतिगत फैसला लेती है तो वह एनसीएलएटी के रुख के बाद ऐसा कर सकती है। वेदांता ग्रुप ने 30 मार्च को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। उसका दावा है कि पहले उसकी बोली को सबसे ऊंची घोषित किया गया था और उसे इस बारे में लिखित में बताया गया था। लेकिन बाद में बिना किसी स्पष्टीकरण के उस फैसले को बदल दिया गया।
वेदांता ने 16,726 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी जो अडानी एंटरप्राइजेज की 14,535 करोड़ रुपये की बोली से अधिक थी। उसका दावा है कि उसकी बोली को प्राथमिकता मिलनी चाहिए थी। उसने अडानी ग्रुप के प्लान की वैधता के साथ-साथ कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स और एजुकेटिंग अथॉरिटी के प्रोसेस पर भी सवाल उठाते हुए कई अपीलें दायर की थी।
इससे पहले एनसीएलएटी ने अडानी एंटरप्राइजेज के रिजॉल्यूशन प्लान को मंजूरी देने के एनसीएलटी के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया था। एनसीएलएटी ने इस मामले में लेंडर्स से जवाब मांगा था और इनसॉल्वेंसी प्रोसेस को जारी रखते हुए मामले की अगली सुनवाई अप्रैल में तय की थी।
बैंकों ने अपने फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि इसमें इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड के सभी नियमों का पालन किया गया था। उनका तर्क था कि रिजॉल्यूशन प्लान का चुनाव केवल सबसे ऊंची बोली पर आधारित नहीं था बल्कि इसमें अपफ्रंट कैश और पेमेंट टाइमलाइन जैसे दूसरे फैक्टर्स को भी ध्यान में रखा गया। अडानी के प्रस्ताव को इसलिए वरीयता दी गई क्योंकि इसमें 6000 करोड़ रुपये के अपफ्रंट का प्रावधान था और तेजी से रिपेमेंट के लिए दो साल का शेड्यूल दिया गया था।
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दूसरी तरफ वेदांता का पेमेंट शेड्यूल पांच साल की थी। क्रेडिटर्स ने साथ ही वेदांता के रिवाइज्ड ऑफर को भी रिजेक्ट कर दिया था। उनका कहना था कि डेडलाइन खत्म होने के बाद इसे सबमिट किया गया था और अगर इसे स्वीकार किया जाता तो पूरी प्रोसेस दोबारा शुरू करनी पड़ती।