IBC Amendment: दिवालिया प्रक्रिया में नहीं होगी देरी! लोकसभा से संशोधन विधेयक को मंजूरी, आम आदमी पर क्या असर?

Insolvency and Bankruptcy Code: लोकसभा में विधेयक पेश करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि आईबीसी ने बेहतर लोन अनुशासन में योगदान दिया है और कंपनियों की क्रेडिट प्रोफाइल में सुधार किया है।
Lok Sabha passes Insolvency and Bankruptcy Code (Amendment) Bill to address interpretational issues among stakeholders
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, (सोर्स- संसद टीवी)
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IBC Amendment Bill 2026: लोकसभा ने सोमवार को दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य दिवालियापन प्रक्रिया में गई कंपनियों के मामलों का तेजी से समाधान करना है। इस विधेयक में कंपनी के डिफॉल्ट साबित हो जाने के बाद दिवालियापन के आवेदनों को स्वीकार करने के लिए 14 दिनों की अनिवार्य समय सीमा निर्धारित की गई है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार ने दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक में 12 संशोधन प्रस्तावित किए हैं ताकि समाधान तंत्र को और मजबूत किया जा सके। उन्होंने आगे कहा कि आईबीसी समाधान में देरी का मुख्य कारण व्यापक मुकदमेबाजी है, और आईबीसी विधेयक में प्रक्रिया के दुरुपयोग को रोकने के लिए दंड का प्रावधान है।

27 मार्च को विधेयक पर हुई थी चर्चा

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए विधेयक पर लोकसभा में 27 मार्च को चर्चा हुई थी। यह विधेयक, जिसे पहले एक चयन समिति को भेजा गया था, कंपनी या व्यक्ति की दिवालियापन संबंधी मामलों के निपटारे में होने वाली देरी को दूर करने के लिए लाया गया है। वित्त मंत्री ने सदन में कहा कि दिवालियापन संहिता (आईबीसी) ने बैंकिंग क्षेत्र की स्थिति सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, साथ ही उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस कानून का उद्देश्य कभी भी लोन वसूली तंत्र के रूप में कार्य करना नहीं था।

लोकसभा में वित्त मंत्री ने क्या कहा?

लोकसभा में विधेयक पेश करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि आईबीसी ने बेहतर लोन अनुशासन में योगदान दिया है और कंपनियों की क्रेडिट प्रोफाइल में सुधार किया है। मंत्री ने कहा कि दिवालियापन समाधान प्रक्रिया से बाहर आने के बाद कंपनियों का प्रदर्शन अच्छा रहा है और उनकी कॉर्पोरेट गवर्नेंस प्रथाओं में भी सुधार हुआ है। यह बयान उन्होंने चयन समिति द्वारा प्रस्तुत दिवालियापन और दिवालियापन संहिता (संशोधन) विधेयक, 2025 के जवाब में दिया।

संशोधन के पीछे सरकार का मकसद

सीतारमण ने कहा कि दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, जो 2016 में लागू हुई, भारतीय बैंकिंग क्षेत्र के समग्र स्वास्थ्य में सुधार का एक प्रमुख कारक रही है। उन्होंने आगे कहा कि इस ढांचे ने कंपनियों को समय के साथ बेहतर क्रेडिट रेटिंग प्राप्त करने में भी मदद की है। साथ ही, उन्होंने कहा कि इस कानून का उद्देश्य संकटग्रस्त संपत्तियों का समाधान करना है, न कि केवल बकाया राशि की वसूली करना।

वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि आईबीसी व्यवहार्य व्यवसायों को बचाने और उद्यम मूल्य को संरक्षित करते हुए वित्तीय संकट को दूर करने का एक ढांचा है। आईबीसी का उद्देश्य कभी भी ऋण वसूली का साधन बनना नहीं था।

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