भारतीय शेयर बाजार आज लाल निशान पर (सोर्स-सोशल मीडिया)
Share market opening today 14 January 2026: भारतीय शेयर बाजार के लिए बुधवार की सुबह निराशाजनक रही, जहां प्रमुख सूचकांकों ने लाल निशान के साथ कारोबार की शुरुआत की। वैश्विक बाजारों से मिल रहे कमजोर संकेतों और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली ने दलाल स्ट्रीट पर दबाव बना दिया है।
सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तरों से नीचे फिसल गए हैं, जिससे कमोडिटी और मुद्रा बाजार में भी हलचल देखी जा रही है। निवेशकों की नजरें अब आगामी तिमाही नतीजों और अमेरिकी मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर टिकी हैं, जो बाजार की अगली दिशा तय करेंगे।
बुधवार को शेयर बाजार खुलते ही बिकवाली के दबाव में आ गया, जहां BSE सेंसेक्स 150.32 अंक गिरकर 83,477.37 के स्तर पर खुला। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 36.85 अंकों की कमजोरी के साथ 25,969.45 के स्तर पर ट्रेड करता दिखा, जो सुबह के सत्र में ही 25,700 के नीचे चला गया। बाजार में सुबह के वक्त करीब 1100 शेयरों में बढ़त देखी गई, जबकि 1044 शेयर गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे।
आज के कारोबार में कुछ चुनिंदा शेयरों ने बाजार को संभालने की कोशिश की, जिनमें ओएनजीसी (ONGC), कोल इंडिया और इंफोसिस प्रमुख रहे। दूसरी ओर, कोटक महिंद्रा बैंक, डॉ. रेड्डीज लैब्स और एशियन पेंट्स जैसे बड़े शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई, जिससे इंडेक्स पर दबाव बढ़ा। IT सेक्टर में कुछ खरीदारी जरूर दिखी, लेकिन बैंकिंग और ऑटो सेक्टर में कमजोरी ने निवेशकों के पोर्टफोलियो को लाल कर दिया।
बाजार के जानकारों का मानना है कि चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (Q3) के नतीजे अब बाजार की चाल को नियंत्रित करेंगे। कल यानी 15 जनवरी को जियो फाइनेंशियल सर्विसेज, एचडीएफसी लाइफ और एलएंडटी टेक्नोलॉजी सर्विसेज जैसी दिग्गज कंपनियां अपने परिणाम घोषित करेंगी। इसके अलावा अलोक इंडस्ट्रीज और साउथ इंडियन बैंक के नतीजों पर भी निवेशकों की पैनी नजर रहेगी, क्योंकि इनसे संबंधित सेक्टर की सेहत का पता चलेगा।
अमेरिकी बाजारों में गिरावट और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने घरेलू बाजार की धारणा को काफी प्रभावित किया है। विदेशी निवेशकों द्वारा पिछले कुछ सत्रों में की गई भारी बिकवाली ने लिक्विडिटी पर असर डाला है, जिससे रिकवरी की कोशिशें नाकाम हो रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक विदेशी फंड्स की वापसी नहीं होती, तब तक बाजार में इसी तरह का उतार-चढ़ाव और अस्थिरता बनी रहने की संभावना है।
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मौजूदा स्थिति को देखते हुए वित्तीय विशेषज्ञों ने निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े फैसले न लेने और सावधानी बरतने की सलाह दी है। बाजार में गिरावट को अच्छी गुणवत्ता वाले शेयरों को धीरे-धीरे खरीदने के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए, बशर्ते निवेश का नजरिया लंबी अवधि का हो। “बाय ऑन डिप्स” की रणनीति उन सेक्टरों में अपनाई जा सकती है जिनके बुनियादी मजबूत हैं और जहां तिमाही नतीजों में सुधार की उम्मीद है।