सेबी ने UPSI का दायरा बढ़ाने का किया ऐलान, बाजार में पारदर्शिता लाने पर बाजार नियामक का जोर
SEBI: सेबी ने कहा कि कंपनी, उसके प्रवर्तक, निदेशक, प्रबंधन से जुड़े कर्मचारी या सहायक कंपनी की धोखाधड़ी, चूक या कंपनी के प्रमुख कर्मचारियों की गिरफ्तारी, चाहे वह भारत में हुई हो या विदेश में, यूपीएसआई अंतर्गत आएगी।
- Written By: मनोज आर्या
प्रतीकात्मक तस्वीर
नई दिल्ली: बाजार नियामक सेबी ने अप्रकाशित मूल्य संवेदनशील सूचना (यूपीएसआई) के दायरे को बढ़ाया है। इसमें ऐसी किसी भी प्रस्तावित राशि जुटाने वाली गतिविधियों के समझौतों को शामिल किया है, जो कंपनी के प्रबंधन या नियंत्रण, पुनर्गठन योजनाओं और एकमुश्त बैंक निपटान को प्रभावित कर सकते हैं। इस कदम का उद्देश्य अनुपालन में नियामकीय स्पष्टता, निश्चितता और एकरूपता को बढ़ाना है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने इसे अमल में लाने के लिए 11 मार्च को जारी एक अधिसूचना में भेदिया कारोबार नियमों में संशोधन किया। नए नियम 10 जून से लागू होंगे।
सेबी ने अधिसूचना में कहा कि कोई भी प्रस्तावित राशि जुटाने वाली गतिविधि, ईएसजी (पर्यावरण, सामाजिक और संचालन) रेटिंग के अलावा क्रेडिट रेटिंग में ऊपर या नीचे संशोधन और कंपनी के प्रबंधन या नियंत्रण को प्रभावित करने वाले समझौतों को अप्रकाशित मूल्य संवेदनशील सूचना माना जाएगा। इसके अलावा, कंपनी दिवाला प्रक्रियाओं से संबंधित मामले यूपीएसआई के दायरे में आएंगे। इसमें समाधान योजनाओं की मंजूरी, एकमुश्त निपटान या बैंकों या वित्तीय संस्थानों से ऋण का पुनर्गठन शामिल है।
सेबी के इस फैसले से क्या बदलेगा?
सेबी ने कहा कि कंपनी, उसके प्रवर्तक, निदेशक, प्रबंधन से जुड़े कर्मचारी या सहायक कंपनी की धोखाधड़ी या चूक या कंपनी के प्रमुख कर्मचारियों, प्रवर्तक या निदेशक की गिरफ्तारी, चाहे वह भारत में हुई हो या विदेश में, यूपीएसआई अंतर्गत आएगी। इसके अलावा, कंपनी की तरफ से गलत वित्तीय सूचना, गड़बड़ी, या कोष की हेराफेरी के संबंध में फॉरेंसिक ऑडिट की कोई भी शुरुआत या अंतिम फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट की प्राप्ति यूपीएसआई के दायरे में आएगी। कंपनी या उसके निदेशकों, प्रबंधन से जुड़े प्रमुख कर्मचारी, प्रवर्तक या सहायक कंपनियों के खिलाफ नियामक, वैधानिक, प्रवर्तन प्राधिकरण या न्यायिक निकाय द्वारा भारत या विदेश में शुरू की गई कोई भी कार्रवाई या पारित आदेश यूपीएसआई के अंतर्गत आएंगे।
सम्बंधित ख़बरें
Reliance Succession Plan: मुकेश अंबानी ने किया बड़ा ऐलान, बच्चों को मिला रिलायंस का साम्राज्य
SEBI Buyback Rules: सेबी ने बायबैक नियमों में किया बड़ा बदलाव, 1 अगस्त से कंपनियों को मिलेगी मंजूरी
India Russia Deal: रेयर अर्थ मिनरल्स की सप्लाई के लिए भारत और रूस की कंपनी रोसनेफ्ट में बड़ी डील
KCC Rules: RBI ने किसान क्रेडिट कार्ड के नियमों में किया अहम बदलाव, जनवरी से होंगे लागू
बिजनेस सेक्टर की अन्य खबरों के लिए यहां क्लिक करें…
सेबी क्या है?
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड का गठन 12 अप्रैल, 1988 को भारत सरकार के एक प्रस्ताव के माध्यम से एक गैर-सांविधिक निकाय के रूप में किया गया था। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड की स्थापना वर्ष 1992 में एक वैधानिक निकाय के रूप में की गई थी और भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) के प्रावधान 30 जनवरी, 1992 को लागू हुए।
