SBI के 71 साल: गांव से ग्लोबल तक, ऐसे बदली भारत की बैंकिंग की तस्वीर
SBI Foundation Day: एसबीआई ने 71 साल पूरे किए हैं।1 जुलाई 1955 को स्थापित यह बैंक आज देश का सबसे बड़ा सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक बनकर आर्थिक विकास और डिजिटल बैंकिंग का प्रमुख स्तंभ बन चुका है।
- Written By: अनन्या तिवारी
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स-AI)
SBI Completes 71 Years In India: भारतीय बैंकिंग इतिहास में 1 जुलाई काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी दिन देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) स्थापित हुआ था। 1955 या 71 वर्ष पहले बना यह बैंक आज केवल एक वित्तीय संस्थान नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक प्रगति, वित्तीय समावेशन और डिजिटल बैंकिंग क्रांति का सबसे मजबूत स्तंभ बन चुका है।
बैंक ऑफ कलकत्ता से एसबीआई बनने तक का सफर
एसबीआई का इतिहास आजादी से भी पहले शुरू होता है। इसकी जड़ें साल 1806 में स्थापित बैंक ऑफ कलकत्ता से जुड़ी हैं। बाद में इम्पीरियल बैंक ऑफ इंडिया के रूप में विकसित हुए इस संस्थान का 1 जुलाई 1955 को राष्ट्रीयकरण कर भारतीय स्टेट बैंक की स्थापना की गई। उस समय सरकार का उद्देश्य बैंकिंग सेवाओं को गांव-गांव तक पहुंचाना और विकास की मुख्यधारा से आम नागरिक को जोड़ना था। सात दशक बाद यह लक्ष्य काफी हद तक साकार होता दिखाई देता है।
देश का सबसे बड़ा बैंकिंग नेटवर्क
वर्तमान में एसबीआई देश के सबसे बड़े बैंकिंग नेटवर्क का संचालन करता है और इसके के पास 23,270 शाखाएं और 63,580 से अधिक ATM एवं ADWM हैं। वहीं, 50 करोड़ से अधिक ग्राहकों के साथ, इसका एसेट बेस 61 लाख करोड़ रुपए के पार पहुंच गया है।
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देश के आर्थिक विकास में एसबीआई का योगदान केवल बैंकिंग तक सीमित नहीं रहा। कृषि, MSME, इंफ्रास्ट्रक्चर, आवास, शिक्षा और कॉरपोरेट सेक्टर को वित्तपोषण उपलब्ध कराने में बैंक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। वहीं जन धन योजना, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT), अटल पेंशन योजना, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और सरकारी सब्सिडी के वितरण में भी एसबीआई ने बड़ी भूमिका निभाई है। वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में बैंक ने करोड़ों ऐसे लोगों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा, जो पहले इससे वंचित थे।
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डिजिटल बैंकिंग में एसबीआई की नई पहचान
डिजिटल बैंकिंग के दौर में भी एसबीआई ने खुद को तेजी से बदला है। इसके योनो प्लेटफॉर्म ने बैंकिंग, निवेश, बीमा, शॉपिंग और वित्तीय सेवाओं को एक ही डिजिटल मंच पर उपलब्ध कराकर ग्राहकों के अनुभव को नई दिशा दी। एआई, डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल भुगतान जैसी नई तकनीकों को अपनाने के साथ बैंक भविष्य की बैंकिंग के लिए भी खुद को तैयार कर रहा है।
हालांकि, एसबीआई के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। निजी बैंकों और फिनटेक कंपनियों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा, साइबर सुरक्षा, डिजिटल धोखाधड़ी की रोकथाम और लगातार बदलती ग्राहक अपेक्षाएं बैंक के लिए नई परीक्षा हैं। इसके बावजूद मजबूत पूंजी आधार, व्यापक ग्राहक नेटवर्क और ग्राहकों के भरोसे के कारण एसबीआई भारतीय बैंकिंग प्रणाली का सबसे विश्वसनीय संस्थान बना हुआ है।
71 साल का सफर, आगे भी विकास की मजबूत नींव
71 वर्षों का यह सफर केवल एक बैंक की सफलता की कहानी नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक यात्रा का प्रतिबिंब भी है। बदलते समय के साथ स्वयं को लगातार आधुनिक बनाते हुए एसबीआई ने यह साबित किया है कि परंपरा और तकनीक का संतुलित मेल किसी भी संस्था को लंबे समय तक प्रासंगिक बनाए रख सकता है। आने वाले वर्षों में डिजिटल नवाचार, हरित वित्त और वैश्विक विस्तार के साथ भारतीय स्टेट बैंक देश की विकास गाथा में अपनी भूमिका और मजबूत करता हुआ दिखाई देगा।
-IANS एजेंसी इनपुट
