जन धन, आधार और UPI का कमाल, डिजिटल भुगतान में देश ने रचा इतिहास; 2 करोड़ से बढ़कर 24,162 करोड़ हुआ ट्रांजैक्शन

UPI Transaction: 10 साल में UPI ने ऑनलाइन ट्रांजेक्शन्स के मामले में एक नया इतिहास रचा है। प्रधानमंत्री जन धन योजना, आधार और मोबाइल (JAM) क्रांति ने पूरा देश बदल दिया है।
The magic of Jan Dhan, Aadhaar, and UPI: The country has made history in digital payments; transactions have surged from 2 crore to 24,162 crore.
यूपीआई (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
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UPI Transaction Growth In India: एक आधिकारिक फैक्टशीट में शनिवार को कहा गया कि 10 वर्ष पहले एक साधारण डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म के रूप में शुरू हुई यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) आज भारत में रोजमर्रा के डिजिटल कारोबार की रीढ़ बन चुकी है। वित्त वर्ष 2016-17 में जहां यूपीआई के जरिए केवल 2 करोड़ लेनदेन (ट्रांजैक्शन) हुए थे, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 24,162 करोड़ से अधिक हो गई।

बयान में कहा गया है कि जन धन, आधार और मोबाइल ने भारत में वित्तीय समावेशन और सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लोगों तक पहुंचाने की व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया। इस पहल के जरिए करोड़ों लोगों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा गया और उन्हें सरकारी सेवाओं तक आसान और पारदर्शी पहुंच मिली।

प्रधानमंत्री जन धन योजना से मिली रफ्तार

प्रधानमंत्री जन धन योजना के माध्यम से देशभर में बैंकिंग सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ। मार्च 2015 में जन धन खातों की संख्या 14.72 करोड़ थी, जो फरवरी 2026 तक बढ़कर 57.78 करोड़ हो गई। इसी अवधि में इन खातों में जमा राशि 15,670 करोड़ रुपए से बढ़कर 2.94 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई। फैक्टशीट के अनुसार, आधार ने देश में सुरक्षित और त्वरित डिजिटल पहचान उपलब्ध कराई। वर्ष 2010-11 में आधार नामांकन केवल 0.42 करोड़ था, जो मार्च 2026 तक बढ़कर 144 करोड़ से अधिक हो गया। इससे डिजिटल प्रमाणीकरण पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और आसान बना है।

मोबाइल कनेक्टिविटी ने बढ़ाई पहुंच

मोबाइल कनेक्टिविटी ने जैम ट्रिनिटी को और मजबूत बनाया तथा देश भर में डिजिटल सेवाओं की पहुंच बढ़ाई। मार्च 2026 तक भारत के 85.5 प्रतिशत परिवारों के पास कम से कम एक स्मार्टफोन था, जबकि 109 करोड़ से अधिक लोग इंटरनेट का उपयोग कर रहे थे। इन तीनों पहलों ने मिलकर डिजिटल इंडिया के समावेशी शासन मॉडल की मजबूत नींव तैयार की। जून 2026 तक प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से 51 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि 176 करोड़ लाभार्थियों के खातों में सीधे भेजी जा चुकी है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है और सरकारी योजनाओं का लाभ तेजी से लोगों तक पहुंचा है।

डिजिलॉकर से आया बड़ा बदलाव

डिजिलॉकर ने कागजी दस्तावेजों की जगह सुरक्षित डिजिटल दस्तावेज उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा बदलाव किया है। मार्च 2026 तक इस प्लेटफॉर्म पर 70.69 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता पंजीकृत हो चुके हैं, जबकि 850 करोड़ से अधिक डिजिटल दस्तावेज जारी किए जा चुके हैं। इससे दस्तावेजों का सत्यापन तेज, कागजरहित और अधिक भरोसेमंद बना है।

11 लाख से ज्यादा MSMEs को मिला बाजार

बयान में कहा गया है कि गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जेम) ने सरकारी खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तेज और पूरी तरह डिजिटल बना दिया है। जून 2026 तक जेम पर कुल 18.4 लाख करोड़ रुपए से अधिक का सकल व्यापार मूल्य (जीएमवी) दर्ज किया गया है, जिसमें वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 5 लाख करोड़ रुपए का कारोबार शामिल है। इस प्लेटफॉर्म के जरिए 11 लाख से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को सरकारी बाजारों तक पहुंचने का अवसर मिला है।

एजेंसी इनपुट के साथ...

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