कर्जदारों को अभी और करना होगा इंतजार! FY27 में भी स्थिर रह सकती हैं ब्याज दरें, जानें RBI की नई रिपोर्ट
Repo Rate: रिपोर्ट के अनुसार, आर्थिक वृद्धि दर सामान्य रुझान के आसपास बनी रहने की उम्मीद है। 2011-12 सीरीज के आधार पर वित्त वर्ष 2027 में जीडीपी की वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
- Written By: मनोज आर्या
भारतीय रिजर्व बैंक, (सोर्स- सोशल मीडिया)
Reserve Bank Of India: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) वित्त वर्ष 2027 में नीतिगत ब्याज दरों को स्थिर रख सकती है, क्योंकि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई में हल्की बढ़ोतरी की संभावना है। मंगलवार को जारी क्रिसिल रेटिंग्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि खाद्य महंगाई सामान्य होने के कारण सीपीआई में बढ़ोतरी हो सकती है, हालांकि कच्चे तेल की कम कीमतों और साल की पहली छमाही में जीएसटी कटौती के लाभ से गैर-खाद्य महंगाई नियंत्रित रह सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, आर्थिक वृद्धि दर सामान्य रुझान के आसपास बनी रहने की उम्मीद है। 2011-12 सीरीज के आधार पर वित्त वर्ष 2027 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
भारत-US ट्रेड टील से रुपया मजबूत
एजेंसी ने कहा कि डिफ्लेटर में संभावित बढ़ोतरी से वास्तविक वृद्धि पर कुछ दबाव पड़ सकता है, लेकिन केंद्र सरकार के पूंजीगत खर्च और निजी निवेश में सुधार के संकेत अर्थव्यवस्था को गति देंगे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिका-भारत व्यापार समझौते से रुपए की स्थिति मजबूत हुई है और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की वापसी के संकेत मिले हैं, और अनुमान है कि मार्च 2027 तक रुपया 89 प्रति डॉलर पर स्थिर हो जाएगा।
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घरेलू बाजार में लौटे विदेशी निवेशक
16 फरवरी तक एफपीआई ने फरवरी महीने में शुद्ध रूप से 2.8 अरब डॉलर का निवेश किया, जिससे रुपए पर दबाव कम हुआ। रुपया जनवरी के अंत में करीब 92 प्रति डॉलर से मजबूत होकर लगभग 90.7 के स्तर पर आ गया है। हालांकि नीतिगत दरों में बदलाव की संभावना कम है, लेकिन पहले की गई दर बढ़ोतरी का असर अर्थव्यवस्था में ब्याज दरों पर जारी रहेगा।
क्रिसिल फाइनेंशियल कंडीशंस इंडेक्स (एफसीआई) जनवरी में -0.5 पर स्थिर रहा, जो दर्शाता है कि वित्तीय स्थितियां लंबी अवधि के औसत की तुलना में थोड़ी सख्त हैं, लेकिन आरबीआई के कदमों से यह स्थिति संतुलित बनी हुई है।
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बैंक लोन वृद्धि को मिला समर्थन
रिपोर्ट में कहा गया है कि आरबीआई द्वारा ओपन मार्केट ऑपरेशन (ओएमओ) के तहत सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद और डॉलर-रुपया बाय-सेल स्वैप से सिस्टम में तरलता को सहारा मिला। मौजूदा नरमी के चक्र में 125 आधार अंकों (बीपीएस) की दर कटौती से ऋण दरें कम हुईं, जिससे बैंक ऋण वृद्धि को समर्थन मिला।
