घर की बढ़ती कीमतों से क्या मिलेगी राहत, आइए जानते हैं इस बजट में रियल एस्टेट की क्या है डिमांड
रियल एस्टेट सेक्टर में डिमांड बढ़ाने के लिए इस बार के बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण खास उपाय कर सकती है और टैक्स से जुड़े मुद्दों पर भी कुछ राहत दी जा सकती है। इससे देश की आर्थिक गति को बढ़ावा मिल सकती है।
- Written By: अपूर्वा नायक
रियल एस्टेट सेक्टर (सौजन्य : सोशल मीडिया)
नई दिल्ली : वित्त वर्ष 2024-25 में भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी पड़ती हुई नजर आ रही है। जिसका सीधा असर देश के हर सेक्टर को प्रभावित कर रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर रियल एस्टेट सेक्टर पर हो रहा है, जो देश में सबसे ज्यादा रोजगार देने वाले सेक्टरों में से एक है। इसीलिए ये सेक्टर इस बार के बजट को लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से काफी उम्मीदें है। निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2025 को देश का केंद्रीय बजट पेश करने वाली है।
बताया जा रहा है कि रियल एस्टेट सेक्टर में डिमांड बढ़ाने के लिए इस बार के बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण खास उपाय कर सकती है और टैक्स से जुड़े मुद्दों पर भी कुछ राहत दी जा सकती है। इससे देश की आर्थिक गति को बढ़ावा मिल सकती है। आइए जानते हैं कि इस बार के बजट से रियल एस्टेट सेक्टर को क्या कुछ उम्मीदें है?
घर खरीदने वालों को मिले राहत
बेसिक होम लोन के फाउंडर और सीईओ अतुल मोंगा ने इस बारे में बात करते हुए बयान दिया है कि केंद्रीय बजट में होम लोन की ईएमआई चुकाने वालों को टैक्स में छूट दी जानी चाहिए। उदाहरण के लिए सेक्शन 80सी के अंतर्गत, प्रिंसिपल रीपेमेंट में 1.5 लाख रुपये के कैप को बढ़ाना और सेक्शन 24 बी के अंतर्गत ब्याज पर 2 लाख रुपये की छूट को बढ़ाना एक अच्छी पहल साबित हो सकती है।
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उन्होंने कहा है कि ऐसा करने पर घर खरीदने वालों को प्रॉपर्टी की बढ़ती कीमतों और महंगाई से काफी हद तक राहत मिल सकती है। कंस्ट्रक्शन मटेरियल जैसे कि सीमेंट पर इस समय 28 प्रतिशत तक टैक्स लगाया जाता है, इसमें कटौती करके इसकी लागत को कम किया जा सकता है। इसका सीधा फायदा घर खरीदने वालों को होगा। अतुल मोंगा ने ये भी कहा है कि हमें उम्मीद है कि सरकार आने वाले बजट में किफायती हाउसिंग को प्राथमिकता दे सकती है, जिससे ज्यादा से ज्यादा भारतीयों का घर खरीदने का सपना साकार हो सकता है।
टैक्स का बोझ कम करने की डिमांड
निम्बस ग्रुप के सीईओ साहिल अग्रवाल ने कहा है कि घर खरीदने का सपना देखने वाले खरीदारों को टैक्स में राहत दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा है कि घर खरीदारों पर लगाए जाने वाले टैक्स और ड्यूटी को युक्तिसंगत बनाया जाना चाहिए। कई राज्यों में प्रॉपर्टीज की कीमतें 12 प्रतिशत से भी ज्यादा है। पिछले बजट में वित्त मंत्री ने राज्य सरकारों से इस मुद्दे को सुलझाने का आग्रह किया था, लेकिन अभी तक इसमें किसी भी प्रकार की कोई प्रगति नहीं हुई है। साथ ही हम सरकार से रियल एस्टेट पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स के बारे में एक बार फिर से विचार करने और राहत देने की सिफारिश करते हैं।
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इंडस्ट्री का दर्जा दिया जाए
निम्बस ग्रुप के सीईओ साहिल अग्रवाल ने रियल एस्टेट सेक्टर को इंडस्ट्री का दर्जा देने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि रियल एस्टेट सेक्टर लंबे समय से इंडस्ट्री का दर्जा प्राप्त करने का इंतजार कर रहा है। अगर इसे इंडस्ट्री का दर्जा दिया जाता है, तो डेवलपर्स के लिए भी फंड जुटाना काफी आसान हो जाएगा। इससे उन्हें बढ़ती इनपुट और लैंड कॉस्ट के बीच उधारी खर्च को कम करने में भी मदद मिल सकती है।
