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Real Estate का बदलता मिजाज… प्रीमियम फ्लैट्स की भारी मांग, क्यों गायब हो रही अफोर्डेबल हाउसिंग?

Premium Housing Market: कोरोना के बाद रियल एस्टेट बाजार में प्रीमियम घरों का दबदबा बढ़ा है। जमीन की बढ़ती कीमतों और निर्माण लागत में 60% उछाल के कारण बिल्डर अब सस्ते घर बनाने से बच रहे हैं।

  • Written By: प्रिया सिंह
Updated On: Feb 21, 2026 | 01:33 PM

रियल एस्टेट बाजार का बदलता मिजाज (सोर्स-सोशल मीडिया)

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Shifting Trends In Real Estate: कोरोना महामारी के बाद भारतीय रियल एस्टेट बाजार ने अपनी दिशा पूरी तरह से बदल ली है और अब प्रीमियम प्रोजेक्ट्स छाए हुए हैं। बड़े शहरों में अब करोड़ों रुपये के फ्लैट्स लॉन्च हो रहे हैं जबकि आम आदमी के लिए घर खरीदना सपना बनता जा रहा है। रियल एस्टेट में बदलते ट्रेंड के इस दौर में डेवलपर्स अब बिक्री की संख्या के बजाय प्रति यूनिट मुनाफे पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि निर्माण लागत में भारी वृद्धि के कारण अब सस्ते घरों की सप्लाई बाजार में लगातार कम होती जा रही है।

प्रीमियम सेगमेंट का दबदबा

रियल एस्टेट बाजार में इस समय प्रीमियम और अपर-मिड सेगमेंट की मांग बहुत स्थिर बनी हुई है जिससे डेवलपर्स उत्साहित हैं। इस वर्ग के खरीदार बैंक लोन पर कम निर्भर होते हैं और ब्याज दरों में बदलाव का उन पर कोई खास असर नहीं पड़ता। बेहतर लोकेशन और आधुनिक सुविधाएं अब ग्राहकों की प्राथमिकता बन चुकी हैं जिससे महंगे घरों की बिक्री में तेजी आई है।

सस्ते घरों की सुस्त बिक्री

कोविड के बाद सस्ते और मिड-सेगमेंट घरों की बिक्री में भारी गिरावट देखी गई है जिससे आम खरीदार बाजार से दूर है। महंगाई और निर्माण लागत में उछाल ने मध्यम वर्ग के खरीदारों को पूरी तरह से सावधान और निवेश के प्रति सतर्क बना दिया है। पहली बार घर खरीदने वाले लोग अब बजट की कमी के कारण अपने फैसले टाल रहे हैं जबकि किराए में बढ़ोतरी जारी है।

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लागत में भारी बढ़ोतरी

डेवलपर्स का कहना है कि महानगरों से लेकर छोटे शहरों तक जमीन की कीमतें पिछले कुछ वर्षों में बहुत तेजी से बढ़ी हैं। निर्माण सामग्री की लागत में पिछले तीन वर्षों के दौरान करीब 60 फीसदी तक का बड़ा उछाल आया है जो चिंताजनक है। ऐसे में कम कीमत वाले मकान बनाना अब बिल्डरों के लिए आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण और घाटे का सौदा साबित हो रहा है।

बिल्डरों की नई रणनीति

डेवलपर्स अब ज्यादा यूनिट बेचने के बजाय प्रति यूनिट कीमत पर फोकस कर रहे हैं ताकि कम बिक्री में भी मुनाफा कमाया जा सके। करोड़ों के अल्ट्रा-लग्जरी अपार्टमेंट्स की मांग बढ़ने से बिल्डर अब केवल प्रीमियम प्रोजेक्ट्स को ही लॉन्च करने में ज्यादा रुचि ले रहे हैं। दिल्ली-एनसीआर जैसे इलाकों में 380 करोड़ रुपये जैसी बड़ी हाउसिंग डील इसके बदलते हुए बाजार का एक बड़ा प्रमाण है।

अफोर्डेबल हाउसिंग की चुनौतियां

सरकार ने अफोर्डेबल हाउसिंग की परिभाषा तो तय कर दी है लेकिन जमीन और लागत पर कोई बड़ी राहत अब तक नहीं मिली है। प्राइवेट डेवलपर्स के लिए इस सेगमेंट में नए प्रोजेक्ट्स लाना मुश्किल हो रहा है क्योंकि लाभ का मार्जिन काफी कम हो चुका है। जब तक लागत में कमी नहीं आती तब तक आम खरीदार के लिए घर खरीदना एक बहुत बड़ी चुनौती बना रहेगा।

भविष्य का संभावित ट्रेंड

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक आम खरीदार बाजार में नहीं लौटेंगे तब तक रियल एस्टेट की असली ग्रोथ अधूरी मानी जाएगी। अगर सरकार रियायती दरों पर जमीन उपलब्ध कराए तो इस ठप पड़े सेगमेंट में फिर से नई जान फूंकी जा सकती है। अफोर्डेबल हाउसिंग की परिभाषा में बदलाव करना भी समय की मांग है ताकि मध्यम वर्ग को घर का सुख मिल सके।

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बाजार में स्थिरता की जरूरत

रियल एस्टेट सेक्टर की मजबूती के लिए हर वर्ग के खरीदार का बाजार में सक्रिय होना अर्थव्यवस्था के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। केवल प्रीमियम सेगमेंट के भरोसे बाजार का लंबा सफर तय करना मुश्किल होगा क्योंकि मिड-सेगमेंट ही वॉल्यूम का मुख्य आधार है। भविष्य में सरकार और डेवलपर्स के बीच तालमेल ही इस समस्या का कोई स्थाई और सकारात्मक समाधान निकाल सकता है।

निवेश के बदलते विकल्प

मौजूदा समय में निवेशक भी अब उन प्रोजेक्ट्स की तलाश में हैं जहां बेहतर सुविधाएं और भविष्य में अच्छे रिटर्न की संभावना हो। लग्जरी घरों की चमक ने निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है जिससे अफोर्डेबल हाउसिंग में निवेश काफी कम हो गया है। बाजार का यह नया रुख आने वाले कई वर्षों तक रियल एस्टेट की दिशा और दशा को प्रभावित करता रहेगा।

Real estate market shift premium vs affordable housing trends india 2026

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Published On: Feb 21, 2026 | 01:33 PM

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