RBI के डिप्टी गवर्नर एम राजेश्वर राव की सलाह, वित्तीय संस्थानों लंबी छलांग लगाने की जरूरत
डिप्टी गवर्नर एम राजेश्वर राव ने कहा कि दुनिया में ऐसे केंद्रीय बैंक कम हैं, जिन्हें आरबीआई जैसी व्यापक जिम्मेदारी मिली हुई है। एक नियामक तथा पर्यवेक्षक के रूप में 75 साल के अनुभव ने एक मजबूत वित्तीय क्षेत्र की नींव बनाई है जो देश को अपनी विकास संबंधी आकांक्षाओं को पूरा करने में मदद कर सकता है।
- Written By: विजय कुमार तिवारी
भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर एम राजेश्वर राव ( फाइल फोटो- सौ. से सोशल मीडिया)
मुंबई : भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर एम राजेश्वर राव ने कहा है कि भारत को 2047 तक विकसित देश बनने की आकांक्षा को पूरा करने के लिए वित्तीय संस्थानों के पैमाने और आकार के मामले में लंबी छलांग लगाने की जरूरत है।
डिप्टी गवर्नर एम राजेश्वर राव ने पिछले सप्ताह यहां भारतीय रिजर्व बैंक के 90 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित ‘वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) में केंद्रीय बैंकों के उच्चस्तरीय नीति सम्मेलन’ में कहा कि हम अगर पीछे मुड़कर देखते हैं, हम पाते हैं कि अतीत में शुरू किए गए नियामकीय विकास और नीतिगत उपायों से भारत में एक मजबूत वित्तीय प्रणाली का विकास हुआ है, जिसने कई संकट का सामना किया है।
उन्होंने कहा कि हमारे देश के लिए जो लक्ष्य हैं, उसके लिए हमें वित्तीय संस्थानों के पैमाने और आकार में लंबी छलांग लगाने की जरूरत है। हो सकता है इससे इकाइयों और उनके उपयोगकर्ताओं के लिए जोखिम भी बढ़े।
सम्बंधित ख़बरें
Bank Holidays May 2026: मई में छुट्टियों की भरमार! 13 दिन बंद रहेंगे बैंक, यहां देखें पूरी लिस्ट
RBI Grade B Recruitment 2026: 60 पदों पर निकली भर्ती, जानें योग्यता, सैलरी और आवेदन प्रक्रिया
Paytm यूजर्स के लिए बड़ा झटका, RBI का सख्त एक्शन, क्या आपका पैसा डूबेगा या मिलेगा पूरा?
Paytm पेमेंट्स बैंक का लाइसेंस रद्द! RBI ने लिया बड़ा एक्शन, जानें आपके UPI पर क्या पड़ेगा असर
बिजनेस की अन्य खबरें पढ़ने के लिए यहां पर क्लिक करें
डिप्टी गवर्नर ने कहा कि इसे देखते हुए, मजबूत संचालन व्यवस्था और प्रभावी जोखिम प्रबंधन दोहरे आधार बनने जा रहे हैं जो हमारे वित्तीय संस्थानों को चालू रखेंगे और उन्हें लगातार बढ़ने में मदद करेंगे।”
भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर एम राजेश्वर राव ने कहा-
‘‘व्यापक तौर पर, वर्ष 2047 तक एक विकसित अर्थव्यवस्था बनने की हमारी राष्ट्रीय आकांक्षा को अब भी एक जटिल और तेजी से विकसित हो रहे वित्तीय परिदृश्य में वित्तीय संस्थानों की एक मजबूत नींव की आवश्यकता है।”
राव ने कहा कि बैंकों के अलावा, मौजूदा इकाइयों को परिसंपत्ति की अपनी बढ़ती जरूरतों को वित्तपोषित करने के लिए मजबूत पूंजी बाजारों तक आसान पहुंच की आवश्यकता होगी। साथ ही उन्हें मजबूत वित्तीय बाजारों तक पहुंच की जरूरत होगी जो उन्हें बही-खाते से संबंधित जोखिमों से बचाव करने में सक्षम बनाएगी। उन्होंने कहा कि इसके अलावा, बढ़ती कर्ज जरूरतों को पूरा करने के लिए नयी इकाइयों, उत्पादों और सेवाओं (निजी क्रेडिट) का आगमन होगा।
भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर एम राजेश्वर राव-
‘‘इसीलिए, इन चुनौतियों से निपटने और नवोन्मेष की प्रक्रिया में बाधा डाले बिना वित्तीय स्थिरता को बनाये रखने के लिए एक उपयुक्त नियामकीय प्रणाली स्थापित करनी होगी।”
डिप्टी गवर्नर एम राजेश्वर राव ने कहा कि दुनिया में ऐसे केंद्रीय बैंक कम हैं, जिन्हें आरबीआई जैसी व्यापक जिम्मेदारी मिली हुई है।
डिप्टी गवर्नर ने कहा-
‘‘आरबीआई एक पूर्ण सेवा वाला केंद्रीय बैंक है। इसका कार्यक्षेत्र मौद्रिक नीति, मुद्रा प्रबंधन, विनियमन और पर्यवेक्षण, भुगतान प्रणाली, वित्तीय समावेश और विदेशी मुद्रा भंडार के प्रबंधन जैसे क्षेत्रों तक फैला हुआ है।
राव ने कहा कि इस बढ़ी जिम्मेदारी के बावजूद, आरबीआई के अस्तित्व के नौ शानदार दशक और एक नियामक तथा पर्यवेक्षक के रूप में 75 साल के अनुभव ने एक मजबूत वित्तीय क्षेत्र की नींव बनाई है जो देश को अपनी विकास संबंधी आकांक्षाओं को पूरा करने में मदद कर सकता है।
–एजेंसी इनपुट के साथ
