शेयर बाजार में हड़कंप! राजेश एक्सपोर्ट्स पर 15 लाख करोड़ की फर्जी कमाई का आरोप, सेबी ने लगाया बैन
Massive Rajesh Exports Scam: सेबी ने राजेश एक्सपोर्ट्स पर 15 लाख करोड़ की फर्जी कमाई के आरोप में बड़ा बैन लगाया है। इस फेक रेवेन्यू से शेयर बाजार और सभी निवेशक बहुत ही ज्यादा हैरान हुए हैं।
- Written By: प्रिया सिंह
सेबी ने राजेश एक्सपोर्ट्स पर लगाया बैन (सोर्स-सोशल मीडिया)
Massive Rajesh Exports Scam, SEBI ans Promoter: बेंगलुरु स्थित राजेश एक्सपोर्ट्स सालों तक भारत की सबसे सफल कंपनियों में गिनी जाती थी। यह मशहूर कंपनी सोने और अन्य कीमती धातुओं की रिफाइनिंग करके दुनिया भर में जूलरी निर्यात करती थी। इसकी आय हमेशा देश की सबसे बड़ी सूचीबद्ध कंपनियों में शामिल होती थी। लेकिन सेबी की मौजूदा जांच ने इस बड़ी सफलता की कहानी पर अब बहुत गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सेबी की इस जांच के बाद शेयर बाजार और दलाल स्ट्रीट में भारी हड़कंप मच गया है। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कंपनी ने 15 लाख करोड़ रुपये की भारी फर्जी कमाई दिखाकर बहुत बड़ा घोटाला किया है। कंपनी द्वारा दिखाई गई आय का बड़ा हिस्सा वास्तविक रिकॉर्ड और दस्तावेजों से बिल्कुल भी मेल नहीं खाता। इस बड़े खुलासे से निवेशकों का भरोसा टूट गया है और तत्काल नियामकीय हस्तक्षेप हुआ है।
शेयरों में लोअर सर्किट और राजस्व में फर्जीवाड़ा
सेबी की कार्रवाई के बाद गुरुवार को राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में 5 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई। शेयर BSE पर 110.15 रुपए से सीधा गिरकर 104.65 रुपए पर आ गया और लोअर सर्किट लग गया। इन शेयरों का 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर 239 रुपए और न्यूनतम स्तर 80.11 रुपए रहा है। इस नकारात्मक खबर के बाद से शेयर बाजार में निवेशकों के बीच भारी घबराहट फैल गई है।
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सेबी ने 3 जून के आदेश में कहा कि कंपनी का 97 से 99 प्रतिशत राजस्व पूरी तरह बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया है। सेबी सदस्य कमलेश चंद्र वर्ष्णेय ने इन असामान्यताओं को बहुत ही गंभीर और अभूतपूर्व बताया है। बाजार नियामक ने प्रमोटर राजेश मेहता पर शेयरों की खरीद-बिक्री या लेन-देन से तुरंत रोक लगा दी है। निवेशकों की सुरक्षा और बाजार की निष्पक्षता के लिए यह कदम बहुत आवश्यक था।
जांच में नहीं किया सहयोग
यह मामला मार्च 2024 में एक शेयरधारक की शिकायत के बाद से गहराई से जांच के दायरे में आया था। सेबी ने अप्रैल 2020 से मार्च 2024 की जांच के लिए बीडीओ इंडिया सर्विसेज को नियुक्त किया था। लेकिन राजेश एक्सपोर्ट्स ने जांच के दौरान कई प्रमुख लेखा प्रणालियों तक पहुंच नहीं दी। इससे कई वित्तीय आंकड़ों का सही सत्यापन बुरी तरह प्रभावित हुआ और गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।
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विदेशी कंपनियों की भी हुई जांच
सेबी ने सिंगापुर और स्विट्जरलैंड स्थित विदेशी सहायक कंपनियों की वित्तीय रिपोर्टिंग की भी जांच की है। नियामक ने कंपनी को 30 दिनों के भीतर सभी लंबित और जरूरी जानकारियां देने का सख्त आदेश दिया है। इस बड़े घोटाले का सीधा असर एलआईसी के शेयरों पर भी पड़ा, जिसकी कंपनी में 10 प्रतिशत हिस्सेदारी है। एलआईसी का शेयर भी इस नकारात्मक खबर के कारण करीब 1 प्रतिशत तक नीचे गिर गया।
